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"ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आप फलां तरीक़े से स्वस्थ हैं और वो अमुक तरीक़े से। आप या तो स्वस्थ हैं या बीमार । बीमारियां पचास तरह की होती हैं;स्वास्थ्य एक ही प्रकार का होता है"- ओशो
सोमवार, 25 अप्रैल 2011
स्कूलों की कैंटीन से बीमारियां खरीद रहे हैं बच्चे
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शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
स्कूलों में अब 'पीरियड्स' की चिंता खत्म !
दिल्ली सरकार के विश्वस्त आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस अभियान के तहत पैड्स पर लगने वाले वैट को भी माफ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब शिक्षा विभाग ने इसी अभियान से खुद को जोड़ते हुए अपने सभी स्कूलों में मुफ्त में ये पैड उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया है।
उन्होंने बताया कि आम तौर पर सातवीं व उसके ऊपर की कक्षाओं में लड़कियों को इसकी जरूरत होती है। उनहोंने बताया कि शिक्षा विभाग को ये पैड १० रूपए में ही मिलेंगे लेकिन स्कूलों के मामले में होने वाले खर्च को वह वहन करेगा(नई दुनिया,दिल्ली,21.1.11)।
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बुधवार, 19 जनवरी 2011
भारत में पहली बारःलकवाग्रस्त पशु का स्टेम सेल से सफल इलाज़
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बुधवार, 29 दिसंबर 2010
सीएसए का कमाल, सीटी बजने से पहले पकेगी दाल
कम समय में खेत पर तैयार होगा हरा उर्द
जय व इंद्र : डॉ. राठी ने बताया कि मटर की प्रजाति जय और इंद्र से उपज 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। यह 120 दिन में तैयार हो जाती है। चने की आठ प्रजातियां विकसित हुई हैं(दैनिक जागरण,कानपुर,29.12.2010)।
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बुधवार, 8 दिसंबर 2010
उत्तराखंड के बच्चों में बढ़ रही है विकलांगता
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रविवार, 28 नवंबर 2010
मध्यप्रदेशः1 जनवरी से शुरू हो सकती है स्वास्थ्य बीमा योजना
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बुधवार, 17 नवंबर 2010
सिकलसेल एनीमिया पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रायपुर में 22 से
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मंगलवार, 2 नवंबर 2010
धड़ल्ले से बिक रही हैं रसायन वाली सब्जियां

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शनिवार, 30 अक्टूबर 2010
फरीदाबादःनिजी अस्पताल में भी गरीबों का फ्री इलाज
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गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010
आपका स्वास्थ्य और एज कैलकुलेटर
आपकी सही उम्र क्या है? आप अपनी उम्र से अधिक उम्र के दिखते हैं या कम उम्र के या उम्र के अनुरूप,जानने के लिए www.realage.com पर लॉगिन करें। इस वेबसाइट की सहायता से आप अपनी उम्र का कैलकुलेशन कर सकते हैं और खुद को युवा महसूस करने के लिए योजना बना सकते हैं।
www.healthstatus.com पर लॉगिन करें। इस वेब साइट की सहायता से आप स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और यह भी सीख सकते हैं कि कौन-कौन सी आदतें आपकी स्वास्थ्य देखभाल पर आने वाले खर्चे कम कर सकती हैं और आपके जीवन को 10 से 15 वर्ष तक बढ़ा सकती हैं।
अधिक टिप्स के लिए देखें www.itips.desimartini.com
(हिंदुस्तान,दिल्ली,27.10.2010)
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महामारियों से लड़ने के लिए योजना तैयार
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रविवार, 10 अक्टूबर 2010
फरीदाबादः 'मेंसुअल हाइजीन' अभियान में आशा वर्कर्स और टीचर्स करेंगी मदद
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सोमवार, 6 सितंबर 2010
आ गया मां और बच्चे की सेहत का गारंटी कार्ड!
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मंगलवार, 31 अगस्त 2010
सरकार बांटेगी सैनिटरी नैपकिन
*अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 150 जिलों की किशोरियों को मुफ्त में केंद्र देगा यह सुविधा *इससे नवजात शिशु मृत्यु दर और मातृत्व मृत्यु दर में कमी लायी जा सकेगी सार्थक पहल
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शुक्रवार, 27 अगस्त 2010
छत्तीसगढ़ःकटे होंठों पर खिलेगी मुस्कान
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खेल के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार
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मंगलवार, 24 अगस्त 2010
दिल्लीःआइस क्यूब के रूप में बिक रहा है धीमा जहर
अगर आप अपने घर में इस्तेमाल के लिए बाजार से आइस क्यूब खरीद रहे हैं तो सावधान। बाजार में बिकने वाली आइस क्यूब आपको किडनी व कैंसर जैसी घातक बीमारी का शिकार बना सकती है। यह खुलासा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में किया है। दरअसल इन दिनों राजधानी में बहुत सी जगहों पर स्वच्छ जल के बजाए हानिकारक तत्वों से युक्त बोरिंग के पानी से आइस क्यूब तैयार की जा रही है, जोकि स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। विभाग की इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए पूर्वी जिला प्रशासन ने पटपड़गंज इलाके में चल रही एक आइस क्यूब की फैक्टरी को सील कर दिया है। वहीं, कई अन्य जगहों पर बर्फ के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जुलाई के महीने में बाजार में बिकने वाली आइस क्यूब के कुछ सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट में पाया गया है कि मार्केट में बिकने वाली आइस क्यूब स्वच्छ जल से नहीं, बल्कि बोरिंग करके जमीन से निकाले हुए पानी से तैयार की गई है। यह पानी पीने लायक नहीं होता। इस तरह के पानी में कुछ ऐसे हानिकारक तत्व मिले होते हैं, जिनके सेवन से पेट संबंधी, किडनी व कैंसर जैसी बीमारियां मनुष्य के शरीर में होने लगती हैं। इस रिपोर्ट के आने के बाद पूर्वी जिला उपायुक्त एसएस घोंक्रोकता ने एसडीएम गांधी नगर डीपी सिंह, एसडीएम हुकम सिंह और एसडीएम उषा चतुर्वेदी को क्षेत्र में बिकने वाली आइस क्यूब के सैंपल भरने और बोरिंग के पानी से आइस क्यूब तैयार करने वाले लोगों की फैक्टरी सील करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में एसडीएम उषा चतुर्वेदी की टीम ने पटपड़गंज इलाके में चल रही एक आइस क्यूब फैक्टरी पर छापा मारा और कर्मचारियों को बोरिंग के पानी से आइस क्यूब तैयार करते पकड़ा। एसडीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उक्त फैक्टरी को सील कर दिया है(पवन कुमार,दैनिक जागरण,पूर्वी दिल्ली,24.8.2010)।आगे चलें...
सोमवार, 23 अगस्त 2010
अब घुटना प्रत्यारोपण में नहीं लगेंगे घंटों
नई तकनीक कस्टम मेड जिग्स ने नी रिप्लेसमेंट (घुटना प्रत्यारोपण) सर्जरी में आनेवाली कई दिक्कतों को आसान बना दिया है। इससे न केवल सर्जरी के दौरान समय का बचाव होगा, बल्कि मरीज भी जल्द सामान्य हो जाता है और आसपास की हड्डियों में होने वाले खतरे भी कम हो जाएगी। करेंट कंसेप्ट इन ऑर्थोप्लास्टी विषय पर एम्स में चल रहे दो-दिवसीय सेमिनार में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डा. राजेश मल्होत्रा ने बताया कि अब तक घुटने रिप्लेसमेंट करने के लिए फुल साइज का ज्वाइंट मंगाया जाता है और ऑपरेशन थिएटर में ही सर्जरी के वक्त उसे काट -छांट कर मरीज के साइज का बनाकर लगाया जाता है। ऐसे में ऑपरेशन में कई घंटे लग जाते हैं और ज्वाइंट का साइज परफेक्ट नहीं होने से आसपास की हड्डियों को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे दोबारा रिप्लेसमेंट की नौबत आने तक आसपास की हड्डियां काफी ज्यादा घिस चुकी होती हैं और ऑपरेशन के लिए डोनेटेड बोन की ज्यादा जरूरत होती है। मगर नई तकनीक ने ये सारी दिक्कतें दूर कर दी हैं। डाक्टर का कहना है कि कस्टम मेड जिग्स घुटने के लिए उम्मीद की नई किरण है। इसमें मरीज के घुटने का एमआरआई स्कैन करके अमेरिका भेजा जाता है और उसके आधार पर नायलॉन की कटिंग करके ब्लॉक तैयार किया जाता है। यह इस्तेमाल के लिए पूरी तरह से तैयार होता है और सीधा इसे अलाइनमेंट के साथ फिट कर दिया जाता है। इसमें सर्जरी का खर्च 20-25 हजार रुपये बढ़ जाने की उम्मीद है। इस मौके पर इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डा. वीएम कटोच ने बताया कि हड्डियों की बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जल्द ही नेशनल बोन डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। इसके लिए आईसीएमआर ने प्रपोजल तैयार कर लिया है। हड्डियों की बीमारियों के बारे में ज्यादा रिसर्च करने और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट की नई-नई तकनीक वाले मैटीरियल बनाने के लिए भारतीय कंपनियों को प्रमोट करने की भी जरूरत है। मगर ज्यादातर डाक्टरों की यह मानसिकता बन चुकी है कि यहां के प्रोडक्ट की गुणवत्ता अच्छी नहीं है(दैनिक जागरण,दिल्ली,23.8.2010)।आगे चलें...
शनिवार, 21 अगस्त 2010
गोरखपुर और बस्ती में 70 लाख बच्चों को लगेंगे जेई के टीके
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शुक्रवार, 20 अगस्त 2010
बिहारःअगले महीने से अधिकतर टेस्ट फ्री
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