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शुक्रवार, 1 जून 2012

पसीने की बदबू से निजात पाने के लिए....

क्या आप मेट्रो में बैठे होते हैं और आपके आसपास खड़े व्यक्ति नाक सिकोड़ रहे होते हैं? तो सावधान हो जाएं। यह आपकी समस्या है जो उनके लिए भी मुश्किल पैदा कर रही है। आपके शरीर से आने वाली बदबू उन्हें परेशान कर रही है और आप भीड़ में भी अकेले पड़ रहे हैं। इस गर्मी में बदबू से मुक्ति के लिए आप क्या कर सकते हैं, बता रही हैं त्वचा विशेषज्ञ डॉ. वंदना चत्रथः 

नताशा कोहली ने हाल ही में एक मल्टी नेशनल कंपनी ज्वाइन की है। जल्द ही वह चर्चा का विषय बन गई। लेकिन इस चर्चा का कारण उनका कोई बड़ा काम नहीं बल्कि उसके शरीर से आने वाली बदबूदार गंध है। ऑफिस में कोई भी उसके पास ज्यादा देर तक रुकना नहीं चाहता। कहीं आपके साथ भी ऐसी स्थिति तो नहीं! अगर हां तो सावधान हो जाएं। इस गर्मी में बदबू से बचाव के लिए उपाय जरूर अपनाएं। इस बदबू का कारण है चिलचिलाती गर्मी। बढ़ते सामाजिक दायरे के साथ ही सफाई और स्वच्छता जरूरी हो जाती है। शरीर की बदबू के साथ-साथ गंदी सांसें और मैले नाखून भी आपके सामाजिक जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। 

पसीने का असर 
गर्मियों में पसीने का असर सबसे बुरा होता है। इससे और कई समस्याएं पैदा होती हैं जिनमें खुजली, जलन आदि प्रमुख हैं। पसीने के साथ ही शरीर की बदबू भी जुड़ी होती है जो आपकी स्वच्छता पर भी प्रश्न चिन्ह लगा देती है। इससे जीवन में असहजता आ जाती है। जब आप गर्म या नमी वाले मौसम में निकलते हैं या जब कसरत या कोई और भारी काम करते हैं तो आपकी त्वचा के स्वेट ग्लांड्स सीमा से अधिक पानी स्नवित करने लगते हैं, जिसे आमतौर पर पसीना कहा जाता है। यह हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलने का भी तरीका होता है। इसलिए यह हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। 

अधिक पसीना है समस्या
डॉक्टरों के मुताबिक अधिक पसीना आना मेडिकल समस्या है, जिसे हाइपर हाइड्रोसिस कहा जाता है। जब पसीने की अधिकता हाथ, पैर और बगल में दिखने लगे तो इसे इमरी या फोकल हाइपर हाइड्रोसिस कहते हैं। यह अनुवांशिक होती है। बहुत अधिक पसीना आना हाइपर हाइड्रोसिस की वह स्थिति है जिसमें थायरॉयड ग्लैंड बहुत अधिक थायरॉयड हार्मोन बनाने लगते हैं। ये बीमारी के शुरुआती लक्षण हैं। इस स्थिति में संभव है कि पसीना किसी स्थान विशेष पर या फिर सारे शरीर में आये। यह तभी संभव है जब व्यक्ति किसी भावनात्मक, तनाव और आघात पहुंचाने वाले हालात से गुजर रहा हो। 

महिलाओं की समस्या
महिलाओं में रजोनिवृति के दौरान भी अत्याधिक पसीना आता है। मेनोपॉज स्वेटिंग सिर्फ बदलाव का सूचक है, जिसका कारण पिट्यूटेरी ग्लैंड और ओवेरियन हार्मोन्स का संबंध होता है। उन दिनों पसीना आना शरीर में ओवेरियन हार्मोन के घटने से होने वाले हार्मोनल असंतुलन का सूचक है। यह बदलाव हर व्यक्ति में अलग तरह के होते हैं, पर अधिकतर महिलाएं मासिक धर्म के दौरान पसीना आने का अनुभव करती हैं। 

थोड़ी चिंता है जरूरी
पसीने से उत्पन्न हुई बेचैनी शारीरिक कम, लेकिन मानसिक असर ज्यादा डालती है। यह शायद ही कभी किसी गंभीर मेडिकल हालात या बीमारी से जुड़ी होती है। हालांकि कभी-कभी बहुत अधिक पसीना आना जीवन के लिए खतरे की निशानी होता है जैसे आघात। इसमें हम जो कपड़े पहनते हैं, जो भोजन खाते हैं, वे बहुत महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं। कसैला भोजन जैसे प्याज, लहसुन और शराब बहुत अधिक पसीना आने का कारण बनते हैं। सही हेल्थ डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज से आपके शरीर का सकरुलेशन सुधरता है और आपको शांत बने रहने में सहायता देता है। 

बदबू से बचने के लिए 
- भारी कसरत करने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए, क्योंकि इससे आप गंदे और पसीने वाले हो जाते हैं। स्नान के दौरान नरम साबुन या शरीर पर जैल का उपयोग करें ताकि त्वचा में सूखापन न आए। 

- शरीर की बदबू से निजात पाने का एक और सामान्य उपाय है डिओडरेन्ट या टेलकम पाउडर का प्रयोग। लेकिन ये उपाय तभी कारगर होंगे, जब पसीने की समस्या मध्यम स्तर की हो। 

- बहुत अधिक पसीना आने में बोटॉक्स तकनीक से भी लाभ उठाया जा सकता है। बगलों में बहुत अधिक पसीना आने और प्राइमरी हाइपरहाईडोसिस के उपचार के लिए बोटॉक्स एफडीए से मान्य उपचार है। 

- दवाओं की बात करें तो एंटीकोलिनरेजिक्स दवा से स्वेट ग्लैंड्स की उत्तेजना से बचा जा सकता है। हालांकि यह कुछ मरीजों पर कामयाब रहा है, लेकिन इस दवा पर बहुत अधिक अध्ययन नहीं हुआ है। 

- बीटा-ब्लॉकर्स या बेनजोडियाजेपाइन्स से तनाव-संबंधी पसीने को कम किया जा सकता है। 

- शरीर को साफ और निरोगी रखने के लिए भोजन के साथ-साथ अपना विशेष खयाल रखना चाहिए। हाइपरहाइड्रोसिस को सेल्फ केयर की दैनिक आदतों के साथ ही मेडिकल सहायता की भी जरूरत है। 

- बहुत अधिक पसीना आने पर मेडिकल सहायता लेनी चाहिए(हिंदुस्तान,दिल्ली,30.5.12)।

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गुरुवार, 27 मई 2010

पसीने की बदबू से बचने के लिए

टीवी पर वह विज्ञापन आपने ज़रूर देखा होगा। पार्क में बेंच पर एक महिला और एक पुरुष बैठे हैं। पुरुष जैसे ही अपनी बांह उठाता है,उसके आर्मपिट की दुर्गंध से महिला कुपित होकर कहती है,"उफ, कुछ तो शरम करो!" दरअसल, इस भीषण गर्मी में आप चाहे जितना नहा लें या कपड़े बदल लें मगर बॉडी से पसीने की बदबू आती ही है। पसीने आना शरीर के लिए कूलिंग सिस्टम की तरह होता है। उमस से पैदा शुष्कता के कारण, शरीर की नमी बनाए रखने के लिए पसीना आता है मगर इस पसीने में मौजूद जीवाणु के कारण बदबू पैदा होती है। पसीने में खुद में कोई बदबू नहीं होती, लेकिन त्वचा पर मौजूद जीवाणु पसीने को ऎरोमैटिक फैटी एसिड में बदलते हैं जिससे विशेष प्रकार की दुर्गंध पैदा होती है। पसीना शरीर और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है मगर इससे पैदा बदबू की समस्या आपकी बगल में खड़े व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बन जाता है।पसीना सूखने पर त्वचा पर यूरिया व नमक जैसे तत्व रह जाते हैं,जो रोगाणुओं को बुलावा देते हैं और दुर्गंध का कारण बनते हैं। पसीना किसी को कम आता है,किसी को ज्यादा। हर किसी की बॉडी केमिस्ट्री अलग होती है, इसलिए उनके शऱीर से पैदा पसीने की गंध भी अलग-अलग होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जिसे ज्यादा पसीना आता हो,उसका पसीना बदबूदार न हो और जिसे कम पसीना आता हो उसके पसीने की बदबू से उबकाई आती हो।
पसीने में बदबू के कई कारण हैं, जैसे नियमित रूप से न नहाना,ठीक से न नहाना,खान-पान में तीखे और खट्टे तत्वों की प्रचुरता, ज्यादा तनाव , विटामिन और खनिज तत्वों का कम होना, थायराइड में असंतुलन और सिंथेटिक कपड़े ज्यादा पहनना आदि। थायरॉइड, कार्सिनोइड सिन्ड्रोम आदि में पसीना अधिक आता है एवं दुर्गंध बढ़ती है। डायबिटीज मरीज में-नेलपॉलिश रिमूवर जैसी गंध आती है। लीवर के रोगियों में- अमोनिया जैसी गंध आती है। अगर आपकी बॉडी से पसीने की बहुत स्मैल आती है, तो लोग आपके आसपास आने से हिचकिचाते हैं। शऱीर के कुछ हिस्सों जैसे बगल और जांघ के पास ज्यादा पसीना आता है। यहां मौजूद ग्रंथियों में प्रोटीन और तेल ज्यादा निकलता है, जिससे यहां बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि गर्मी में आपकी बॉडी से स्मैल न आए, तो आप अपनी खानपान की आदतें बदलें। फाइबर, अनाज, सोयाबीन और हरी पत्तेदार सब्जियों का इस्तेमाल ज्यादा करें। इसके अलावा प्रसंस्कृत फूड खाने से बचें। रोजाना बहुत सारा पानी पीएं। इससे आपकी बॉडी में विषैले पदार्थ पसीने व यूरिन के जरिए निकल जाएंगे और आपकी बॉडी से स्मैल भी कम आने लगेगी।
हल्के रंगों वाले,सूती के और ढीले कपड़े पहनें क्योंकि सूती कपड़ा शरीर से पसीना सोखने में उपयोगी होता है। बाथ साल्ट पानी में डालकर स्नान करना फायदेमंद होता है। पानी में फिटकरी और मिंट मिलाकर नहाएं। डेटॉल, यूडीकोलोन, खस या गुलाबजल कोई भी एक चीज की कुछ बूँदें डालकर स्नान करना भी बेहद प्रभावकारी विकल्प है। बेकिंग सोडा को नीबू में मिला कर अंडरआर्म्स में लगाने से और सिरके का कम सांद्रता का रस लगाने भी बैक्टीरिया नष्ट होते हैं(इसे तुरंत शेव किए हुए स्थान पर न लगाएं)। पैर और बगल को रोजाना ठीक से साफ करें और वहां एंटीफंगल तथा सुगंधित पाउडर लगाएं। बगल, जांघ, गर्दन व स्तन के आसपास की ज्यादा पसीने वाली जगह को रोजाना अच्छी तरह धोएं। इन दिनों खुले सैंडल अधिक उपयोगी होंगे।
नहाने के बाद किसी अच्छी कम्पनी का बॉडी स्प्रे प्रयोग करें। डीयोड्रेंट और एन्टीपर्सिपिरेंट [पसीना रोकने वाले] सोल्यूशंस काम में लिए जा सकते हैं। इनमें मौजूद एल्यूमिनियम जिंक पसीने को कम तो करते हैं मगर ध्यान रहे, इन्हें लगाने से पसीने की बदबू पर केवल कुछ समय के लिए नियंत्रण पाया जा सकता है।
वैसे,पसीने की स्मैल का स्थायी समाधान कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट ही है। ज्यादा पसीने वाली जगह पर लेजर से अनचाहे बाल हटवा सकते हैं। पसीने से ज्यादा परेशान लोगों के लिए बोटोक्स इंजेक्शन भी आता है।जिसका असर लगभग 8 महीने तक रहता है। एक अन्य विधि आइनटोफोरेसिस से शऱीर में लो - करंट डालने की है जिससे बॉडी में पसीना कम आता है।सुपरफेशियल लिपोक्यूशन भी इसका एक अन्य विकल्प है।

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