"सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है" यह चेतावनी सिगरेट के हर पैकेट पर लिखी होती है लेकिन धूम्रपान करने वाले इस पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन इस सच्चाई को झुठलाया नहीं जा सकता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़े बताते हैं कि धूम्रपान के कारण प्रति वर्ष दुनिया भर में लगभग ५० लाख लोगों की असामयिक मृत्यु हो जाती है। असल में इससे कहीं अधिक लोग धूम्रपान का शिकार बनते हैं।
सिगरेट कई बीमारियों का कारण बनती है या फिर पहले से मौजूद रोग और भी खतरनाक रूप ले लेता है। इस सच्चाई के मद्देनजर यह कहना ग़लत नहीं होगा कि धूम्रपान अप्रत्यक्ष रूप से भी बहुत सारी असामयिक मौतों के लिए ज़िम्मेदार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी मानना है कि स्वास्थ्य पर धूम्रपान के प्रभाव का सही-सही मूल्यांकन अभी तक नहीं किया जा सका है। संगठन इस बारे में आश्वस्त ज़रूर है कि धूम्रपान किसी भी अन्य बीमारी की अपेक्षा अधिक लोगों के मरने या असमर्थ हो जाने के लिए ज़िम्मेदार है।
धूम्रपान की शुरुआत अक्सर ही इस भ्रम के साथ की जाती है कि इसका सेवन करने वाला अपेक्षाकृत अधिक तनावमुक्त महसूस करता है और इसके सहारे तनाव का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकता है, लेकिन यह भ्रम के अलावा कुछ भी नहीं है। ऐसा सोचने या प्रचारित करने वाले यह नहीं जानते कि सिगरेट का निकोटिन तनावों से छुटकारा दिलाने के बजाय मन को उत्तेजित ही करता है। अक्सर युवावस्था में लोग इस लत के शिकार होते हैं और दो-चार सिगरेट पीने के साथ ही इसकी तलब लगनी शुरू हो जाती है। अनगिनत शोध यह बताते हैं कि धूम्रपान शरीर को किस तरह से बर्बाद कर डालता है। ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन के अनुसार धूम्रपान न करने वालों के मुकाबले सिगरेट पीने वालों को ३०-४० साल की उम्र में हृदयाघाघात होने की आशंका पाँच गुना होती है। धूम्रपान से हृदय रोग का खतरा बढ़ता है और इससे हृदय व मस्तिष्क की धमनियों को नुकसान पहुँचने के कारण पक्षाघात का खतरा पैदा हो जाता है। जीवन पर्यंत धूम्रपान करने वालों की मृत्यु का संबंध किसी न किसी रूप में धूम्रपान से होने की आशंका होती है।
इतना ही नहीं,इस तरह मरने वालों में से आधे मध्य आयु के ही होंगे।
धूम्रपान से फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। विशेषतौर पर इसलिए कि ये ऊतक धुएं से निकलने वाले ज़हर के सीधे निशाने पर होते हैं। इसी कारण फेफड़ों के कैंसर का बहुत अधिक खतरा होता है। अमरीका में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि धूम्रपान करने वालों को फेफड़े के कैंसर का खतरा 22 गुना अधिक होता है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में यह ख़तरा 12 गुना होता है। इसके अलावा,धूम्रपान मुख,गर्भाशय,यकृत,गुर्दा,ब्लैडर,पेट,ग्रीवा और ल्यूकीमिया जैसे कैंसरों का कारण भी बनता है। गर्भवती महिला के धूम्रपान करने से गर्भपात का खतरा रहता है और गर्भस्थ शिशु का विकास बाधित होने की आशंका होती है। उसे कई अन्य तरह की बीमारियां भी हो सकती हैं।
माना जाता है कि धूम्रपान कैंसर और हृदयाघात का सबसे बड़ा कारण है। इससे कई अन्य तरह की परेशानियां भी पैदा होती हैं। अध्ययन बताते हैं कि सिगरेट पीने वाले विवाहित जोड़ों को माता-पिता बनने में परेशानी आ सकती है। यह अस्थमा की स्थिति को और भी बदतर बनाता है और अस्थमा की दवाओं को कारगर साबित नहीं होने देता। आंखों की रक्तवाहिकाएं संवेदनशील होती हैं जो धुएं की वजह से आसानी से नष्ट हो सकती हैं। इससे आंखों में ब्लडशॉट नज़र आने लगते हैं और खुजली शुरू हो जाती है। बहुत अधिक सिगरेट का सेवन करने वालों की दृष्टि भी धीरे-धीरे बिगड़ने लगती है। उनकी आंखों में मोतियाबिंद होने का ख़तरा बढ़ जाता है। सिगरेट पीने से दांतों और मसूड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। मसूड़े फूलने लगते हैं,सांसों से बदबू आती है और दांत टूटने लगते हैं जिससे अल्सर का खतरा भी रहता है(डॉ. अमित अग्रवाल,सेहत,नई दुनिया,फरवरी द्वितीयांक 2012)।
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