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मंगलवार, 7 अप्रैल 2020

विश्व स्वास्थ्य दिवस विशेषःवायरस को न करने दें इम्यून सिस्टम का लॉकडाउन


आज #World_Health_Day है और पूरी दुनिया गहरे स्वास्थ्य संकट से गुज़र रही है। 

कोरोना से फ़िलहाल मुक्ति मिल जाए, तो भी उसके लौटने की आशंका लंबे समय तक बनी रहेगी। 

वायरसजनित सभी रोग बाहर से आते हैं। बाहर से होने वाला हर संक्रमण हमारी कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता का परिणाम है। 

वायरस कृत्रिम हो कि प्राकृतिक, उपाय एक ही है- अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढाइए। प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो तो आप अन्य प्रकार के संक्रमण से भी मुक्त रह सकते हैं। जो संक्रमण से लड़ सकने में सक्षम है, वही स्वस्थ है। 

प्राणमुद्रा इम्यून सिस्टम को तो मज़बूत करती ही है,श्वास रोगों, तन-मन की दुर्बलता और थकान में भी लाभकारी है। 

कनिष्ठा, अनामिका और अंगूठे के शीर्ष को मिलाने और शेष दोनों उंगलियों को सीधा रखने से बनती है प्राणमुद्रा। इसका रोज़ाना 45 मिनट का अभ्यास 24 घंटे के लिए आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढा देता है। अधिक कर सकें तो और अच्छा। दोनों हाथों से करें। धीमी, लंबी, गहरी सांस के साथ इसके अभ्यास से लाभ जल्दी होगा। 

प्राणायाम और खासकर अनुलोम-विलोम का अभ्यास इसी मुद्रा में करना चाहिए। 

प्राण, अपान और ज्ञान मुद्राओं का प्रतिदिन उपयोग संपूर्ण स्वास्थ्यदायी है। ऊर्जावान बने रहने के इच्छुक लोग लॉकडाउन के बाद भी इन्हें जारी रख सकते हैं। 

प्रसिद्ध कैंसरविज्ञानी ओशो प्रशांत अमृत प्राणायाम का सुझाव देते हैंः 

5 मिनट या 100 बार, एक बार करें या भर दिन में।प्रेम से आराम से धीरे धीरे लंबी सांस लें जो नाभि और नाभि के नीचे हरा चक्र तक जाए।जब सांसे लें तो यह महसूस करें कि यह निकल रहा है नाभी क्षेत्र से।जब सांस छोड़ें तो महसूस करें कि सांस प्रवेश कर रहा है नाभी क्षेत्र से।यह चक्र ,वर्तुल नाभी क्षेत्र से निकलने और प्रवेश का अपने आप होता है। केवल उसे सहयोग दें,उसके प्रति अवेयर रहें। अद्भुत है यह।यह प्राणायाम वैश्विक कोरोना वायरस महामारी से बचने के लिए आवश्यक है।अभी इसका 7दिन तक आनंद लें।

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गुरुवार, 12 मई 2016

थकान हो दूर,करे ताज़ा भरपूर

आज World Chronic Fatigue Syndrome Awareness Day है। 

इन दिनों थकान का ज़्यादा होना एक सामान्य अनुभव है। जानिए,बगैर ग्लूकोज लिए थकान मिटाने के नुस्खेः
 
1. वज्र मुद्राः हमें चाय-कॉफी या ऐसे किसी अन्य उत्तेजक पदार्थ से थकान में जो राहत मिलती है,इस मुद्रा से वही लाभ मिलता है क्योंकि शरीर में सबसे मज़बूत नाड़ी वज्र नाड़ी ही होती है और वज्र मुद्रा वज्र नाड़ी को ऊर्जा प्रदान करती है। 

कैसे लगाएं: कनिष्ठा,अनामिका और मध्यमा को इस प्रकार मिलाएं कि तीनों उंगलियों के नाखून एक सीध में रहें। अब अंगूठे के शीर्ष भाग को मध्यमा के शीर्ष भाग के किनारे पर इस तरह रखें कि अंगूठे का अग्रभाग मध्यमा के नाखून के कोने को छूता हुआ हो। तर्जनी उंगली सीधी रहे। 

कितनी देरःपांच-पांच मिनट तीन बार। 

2. शिवलिंग मुद्राः खासकर अवसाद और निराशा से हुए थकान को दूर करने में यह मुद्रा बहुत उपयोगी है। इस मुद्रा से एक प्रकार की मस्ती अथवा स्वीकार-भाव पैदा होता है। 

कैसे करें: बांयी हथेली को अपने पेट के पास लाकर उस पर दांयी हथेली से इस प्रकार मुट्ठी बनाकर रखें कि दांया अंगूठी सीधा ऊपर की ओर रहे। बांये हाथ की सभी उंगलियां मिली रहें और दोनों कोहनियां भी एकदम सीधी रहें। 

 
कितनी देरः पांच-पांच मिनट दो बार। 





3. शक्ति मुद्राः अहंकार,क्रोध,द्वेष,ईर्ष्या,लोभ और मोह हमें शक्तिहीन बनाते हैं। खासकर क्रोध से शक्ति बहुत जल्दी क्षीण हो जाती है। शक्ति मुद्रा ऐसी स्थिति में बहुत कारगर है। जो अत्यधिक शारीरिक श्रम के कारण थक जाते हैं,उन्हें भी इस मुद्रा से काफी लाभ होगा। 
 
कैसे करें: दोनों हाथों के अंगूठों को मुट्ठियों में बंद कर लें। वज्रासन में बैठकर अथवा लेटकर शक्ति मुद्रा बनाकर अपनी हथेलियों को नाभि के नीचे हल्के से रखें। मुट्ठियों की उंगलियां नीचे की ओर न होकर,आमने-सामने सीधी हों। दोनों मुट्टियों के बीच लगभग दो इंच का अंतर रहे। 

कितनी देरः आधा घंटा। 

 4. प्राण मुद्राः इससे रक्तप्रवाह बढ़ता है और पूरे शरीर को ऊर्जा मिलती है। कैसे करें: दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें और हाथ खोलकर अपनी छाती के सामने रखें। 

कितनी बारः दो से तीन बार,जितनी देर तक सहज हो। 

पुनश्चः प्राण मुद्रा के साथ होम्योपैथिक दवा फास्फोरस 200 का सेवन करने से दुर्बलता बहुत जल्दी दूर हो जाती है।

जो मुद्रा चिकित्सा की बारीकियां सीखना चाहें,ओशोधारा का त्रिदिवसीय कार्यक्रम उनके लिए अनूठा अवसर हैः http://oshodhara.org.in/Schedule.php#

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