कोरोना से फ़िलहाल मुक्ति मिल जाए, तो भी उसके लौटने की आशंका लंबे समय तक बनी रहेगी।
वायरसजनित सभी रोग बाहर से आते हैं। बाहर से होने वाला हर संक्रमण हमारी कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमता का परिणाम है।
वायरस कृत्रिम हो कि प्राकृतिक, उपाय एक ही है- अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बढाइए।
प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो तो आप अन्य प्रकार के संक्रमण से भी मुक्त रह सकते हैं।
जो संक्रमण से लड़ सकने में सक्षम है, वही स्वस्थ है।
प्राणमुद्रा इम्यून सिस्टम को तो मज़बूत करती ही है,श्वास रोगों, तन-मन की दुर्बलता और थकान में भी लाभकारी है।
कनिष्ठा, अनामिका और अंगूठे के शीर्ष को मिलाने और शेष दोनों उंगलियों को सीधा रखने से बनती है प्राणमुद्रा। इसका रोज़ाना 45 मिनट का अभ्यास 24 घंटे के लिए आपकी प्रतिरोधक क्षमता को बढा देता है। अधिक कर सकें तो और अच्छा। दोनों हाथों से करें। धीमी, लंबी, गहरी सांस के साथ इसके अभ्यास से लाभ जल्दी होगा।
प्राणायाम और खासकर अनुलोम-विलोम का अभ्यास इसी मुद्रा में करना चाहिए।
प्राण, अपान और ज्ञान मुद्राओं का प्रतिदिन उपयोग संपूर्ण स्वास्थ्यदायी है। ऊर्जावान बने रहने के इच्छुक लोग लॉकडाउन के बाद भी इन्हें जारी रख सकते हैं।
प्रसिद्ध कैंसरविज्ञानी ओशो प्रशांत अमृत प्राणायाम का सुझाव देते हैंः
5 मिनट या 100 बार, एक बार करें या भर दिन में।प्रेम से आराम से धीरे धीरे लंबी सांस लें जो नाभि और नाभि के नीचे हरा चक्र तक जाए।जब सांसे लें तो यह महसूस करें कि यह निकल रहा है नाभी क्षेत्र से।जब सांस छोड़ें तो महसूस करें कि सांस प्रवेश कर रहा है नाभी क्षेत्र से।यह चक्र ,वर्तुल नाभी क्षेत्र से निकलने और प्रवेश का अपने आप होता है। केवल उसे सहयोग दें,उसके प्रति अवेयर रहें। अद्भुत है यह।यह प्राणायाम वैश्विक कोरोना वायरस महामारी से बचने के लिए आवश्यक है।अभी इसका 7दिन तक आनंद लें।
आगे चलें...
