बाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बाल लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

गर्मियों में बालों का रख-रखाव

गर्मियों में बाल बेजान हो जाते हैं, रूसी और बाल झड़ने की परेशानी भी बढ़ जाती है। दरअसल गर्मी में तेज धूप से बहुत पसीना बनता है और त्वचा की नमी बढ़ जाती है। त्वचा के छिद्र अधिक खुल जाते हैं, जिनसे पसीना निकलता है, लेकिन इससे त्वचा की जड़ कमज़ोर पड़ जाती है। चूँकि सिर की ऊपरी त्वचा पर नमी रहती है, इसलिए बालों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। नमी के कारण खुजली होती है। बार-बार खुजलाने से समस्या बिगड़ती जाती है और बाल गिरने लगते हैं। 

बेशक बाल गिरने की समस्या गर्मियों में बढ़ती है, पर यह पूरे साल सताने वाली एक आम समस्या है। बालों की समस्या के कई कारण हैं। हालाँकि मुख्यतः दो कारण देखे जाते हैं- आनुवांशिक और खान-पान की समस्या। बाल बढ़ने में भी इन कारणों की खास अहमियत है। बाल गिरने के कुछ अन्य कारण भी हैं, जैसे खाने में अधिक मीठा लेना, हानिकारक रसायन युक्त शैम्पू और कंडिशनर का उपयोग, चिंता, तनाव आदि।

कंघी करते हुए दो-चार बाल हाथ आ जाएँ तो घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है। हर दिन ४५ से ६० बालों का गिरना स्वाभाविक है। इनकी जगह नए बाल उग आते हैं, लेकिन हर दिन औसत ६० से अधिक बाल गिरने लगे तो चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। 

सबसे पहले तो आप बालों को नियमित रूप से धोएँ। बारिश के दिनों में तो बार-बार धोना चाहिए, क्योंकि विलंब करने से सिर की त्वचा तैलीय रह जाती है, बहुत अधिक बाल गिरने लगते हैं, रूसी की समस्या घेर लेती है और बाल रुखे हो जाते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण बात है शैम्पू का चयन, माइल्ड शैंपू का उपयोग करें। बेबी शैम्पू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। यों तो बाल गिरना बुढ़ापे की निशानी है, पर आज युवाओं में भी यह आम समस्या है। कम उम्र में बाल गिरने से कभी-कभी निराशा घेर लेती है। कई लोग बाल गिरने के बाद खुद को यार-दोस्तों के बीच जाने के काबिल नहीं मानते हैं। इससे उनमें इतनी हीन भावना आ जाती है कि वे स्वाभिमान खो बैठते हैं और खुद को कम आँकने लगते हैं। 

बाल गिरने की समस्या के कई स्वरूप हैं। सबसे आम है "एंड्रोजेनिक एलोपेसिया" या मेल पैटर्न बाल्डनेस (पुरुषों में) या फीमेल पैटर्न बाल्डनेस (महिलाओं में)। आम तौर पर यह आनुवांशिक समस्या है। अन्य किस्म की समस्याएँ अस्थायी होती हैं, पर ये त्वचा के संक्रमण, तनाव और अत्यधिक दवाएँ लेने जैसी गंभीर समस्याओं का दुष्प्रभाव हो सकता है। बालों की अहमियत समझना हो तो किसी हेयर ट्रांसप्लांट क्लिनिक के बाहर लोगों की बढ़ती कतार देख लें, जिनके बाल उड़ते जा रहे हैं। 

उपचार पर इन्हें पानी की तरह पैसा बहाते देख बालों की अहमियत आसानी से समझ जाएँगे। यह जानना महत्वपूर्ण है कि बाल स्वाभाविक रूप से गिर रहे हैं या फिर किसी गंभीर समस्या के कारण। लेकिन यह कैसे जाना जाए? इस सवाल पर लोग अक्सर अटक जाते हैं क्योंकि वे यक़ीन से नहीं कह सकते कि उनकी स्थिति गंभीर है या फिर समस्या अस्थायी है और समय के साथ जाएगी। इसका हल जानने के लिए बालों की विकास प्रक्रिया को समझना ज़रूरी है। 

मौसम बदलने के कुछ दुष्प्रभाव होते हैं। चाहे वह बारिश,गर्मी या फिर जाड़े का मौसम हो। इस दौरान त्वचा और बालों की ख़ास देखभाल ज़रूरी होती है। सिर का एक -एक बाल विकास की प्रक्रिया से गुज़रता है जिसे एनाजेन कहते हैं। यह करीब 1000 दिनों की प्रक्रिया है। इसके बाद 10 दिनों का ट्रांजिशनल फेज़ कैटाजेन है। इस फेज़ में बालों का बढ़ना रूक जाता है और उसके बाद अंतिम फेज़ टेलोजेन है जो अगले 100 दिनों का होता है। इसके बाद बाल अंततः फोलिकल से गिर जाते हैं और नए बाल आ जाते हैं। इसके साथ नया चक्र शुरु हो जाता है। कई लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उनके बाल गिरते भी हैं,पर यह सिर्फ ग़लतफ़हमी होती है क्योंकि बालों की विकास प्रक्रिया में ये उगने के साथ ही नियमित रूप से गिरते भी हैं। 

बाल गिरने से परेशान लोगों की गर्मियों में नींद हराम हो जाती है। ख़ासकर इस मौसम में यह समस्या बद से बदतर हो जाती है। इसका एकमात्र कारण है-पसीने और बालों की नमी जो कि तापमान बढ़ने से पैदा होती है। इससे बालों की जड़ें ही कमज़ोर पड़ जाती हैं(डॉ. अरविंद पोसवाल,सेहत,नई दुनिया,मार्च चतुर्थांक 2012)।

आगे चलें...

बुधवार, 7 मार्च 2012

गिरते बालों के लिए हर्बल शैम्पू जो करे कंडीशनिंग भी

बालों की समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में पाई जाती है। बाल झडऩे के कई कारण हो सकते हैं जैसे प्रदूषण, हार्मोनल परिवर्तन, अनियमित दिनचर्या व खान-पान, मौसम आदि। अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान हैं तो एक बार ये हर्बल उपाय जरुर आजमाएं- 

- बालों के झडऩे का एक कारण डेंड्रफ या रूसी की समस्या भी होती है, इसके लिए रात में बालों की जड़ों में भृंगराज या आंवलें के तेल को खूब अच्छी तरह से नियमित गहराई तक लगाएं,अपना तौलिया अलग इस्तेमाल करें,रासायनिक साबुन को बालों में लगाने से बचें, इसके स्थान पर मेडीकेटेड साबुन या शैम्पू का इस्तेमाल करें, अगर हो सके तो एक बार बालों को उतरवा लें यह आपके लिए निश्चित रूप से फायदेमंद होगा। नियमित रूप से अपने भोजन में प्रोटीन की उचित मात्रा का प्रयोग करें, ताकि हेयर फालिकल्स मजबूत हो सकें ,इस हेतु दूध,अंडे और दालों का उचित मात्रा में प्रयोग आवश्यक है,बालों में अनावश्यक रूप से रासायनिक कास्मेटिक उत्पादों के प्रयोग से बचें,निश्चित रूप से बालों का घनत्व बढ़ जाएगा। 

-आरोग्यवर्धिनी वटी दो-दो गोली की मात्रा में सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें ,साथ ही अविपत्तिकर चूर्ण एवं सितोपलादि चूर्ण को सम मात्रा में एक से दो चम्मच लें ,यह आपकी पेट से सम्बंधित परेशानियों को दूर करेगा। भृंगराज एवं आंवले लें के ताजे पत्तों को पीस कर बालों की जड़ों में लगायें ,साथ ही नीम,शिकाकाई ,आंवला,कालातिल,रीठा इन सब को साथ मिलाकर एक पेस्ट बना लें, यह आपके लिए एक हर्बल शैम्पू का काम करेगा जो बालों को कंडिशनिंग के साथ ही जड़ों को मजबूत बनाएगा। पेट साफ रखने के लिए केवल त्रिफला के चूर्ण का प्रयोग करें ,यह आपके बालों के जड़ों को भी मजबूती प्रदान करेगा(दैनिक भास्कर,उज्जैन,1.3.12)। 


होली स्पेशल में आज दोपहर 2 बजे जानिएः 


हर्बल कलर तैयार करने के तरीक़े 

और कल सुबह 7 बजेः 


पक्के रंगों को छुड़ाने के नायाब नुस्ख़े

आगे चलें...

सोमवार, 5 मार्च 2012

हीट स्टाइलिंग आपके बालों का दुश्मन तो नहीं?

हीट स्टाइलिंग से आपके बालों की खूबसूरती भले ही कई गुना बढ़ जाती हो, पर क्या आप जानती हैं कि लगातार कई दिनों तक हीट स्टाइलिंग से आपके बालों की सेहत बिगड़ सकती है? कैसे बालों को संवारें भी और बचाएं भी, आइए जानें.. 

सिर्फ चेहरे की खूबसूरती से काम नहीं चलता, बालों को भी तो चेहरे जितना ही खूबसूरत दिखना होगा। बालों की खूबसूरती बढ़ाने और अपनी पसंद के मुताबिक उसकी स्टाइलिंग करने के लिए हेयर ड्रायर, रोलर्स या फिर फ्लैट आयरन का इस्तेमाल करने से पहले हम दोबारा सोचते भी नहीं। पर क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि लगातार कई दिनों तक बालों की हीट स्टाइलिंग करने से बालों की हालत कितनी खराब हो जाती है। 

पर, बालों की बिगड़ती सेहत के लिए इन हेयर अप्लाइंसेज को पूरी तरह से दोषी ठहराने से पहले यह जांचना भी जरूरी है कि कहीं आप इन हीट अप्लाइंसेज को गलत तरीके से इस्तेमाल तो नहीं कर रहीं? 

क्या गलती कर रही हैं आप 
हेयर ड्रायर बालों को ज्यादा सुखाना: घुंघराले बालों को ज्यादा सुखाने से वे और ज्यादा घुंघराले हो जाते हैं, जबकि लंबे बाल इस वजह से उलझ जाते हैं। 

सबसे ज्यादा तापमान पर बाल सुखाना: आपके हेयर ड्रायर में सबसे ज्यादा तापमान पर बाल सुखाने का विकल्प है। इसका मतलब यह नहीं है कि आप उसका ही इस्तेमाल करें। हमेशा मध्यम तापमान पर बालों को सुखाएं और बालों और हेयर ड्रायर के बीच एक खास दूरी बनाकर रखें। 

एक साथ सारे बालों को सुखाना: अगर आपके बाल ज्यादा हेवी और लंबे हैं, तो सारे बालों को एक साथ सुखाने की कोशिश बिल्कुल न करें। बालों को पहले तीन हिस्सों में बांट लें, फिर उन्हें हेयर ड्रायर से सुखाएं।

कर्लिग आयरन या रोलर्स गीले बालों की स्टाइलिंग: कर्लिग आयरन या रोलर्स का इस्तेमाल करने से पहले बालों को पूरी तरह से सुखाना जरूरी है। कर्लिग आयरन या रोलर्स में जिस तरह के तापमान का इस्तेमाल होता है, वह हेयर ड्रायर में इस्तेमाल होने वाले तापमान से बिल्कुल अलग होता है। अगर आप गीले बालों में कर्लिग आयरन का इस्तेमाल करती हैं, तो वो बिल्कुल बालों को पकाने जैसा होगा।

फ्लैट आयरन
फ्लैट आयरन का घुंघराले बालों पर सीधे इस्तेमाल: घुंघराले बालों पर फ्लैट आयरन का इस्तेमाल करने से पहले बालों को ब्लो ड्राय करके उन्हें सीधा कर लें। इससे आपको कहीं बेहतर परिणाम देखने के लिए मिलेगा।
                                                                                                                                                             एक बार में ज्यादा बालों पर इस्तेमाल करना:

हम में से अधिकांश लोग फ्लैट आयरन का इस्तेमाल करते वक्त एक बार में जरूरत से ज्यादा बालों को सीधा करने की कोशिश करते हैं। इससे न सिर्फ बाल टूटते हैं, बल्कि वो पूरी तरह से सीधे भी नहीं हो पाते हैं।

कैसे सुधारें गलतियों को 
हेयर ड्रायर और हेयर स्टाइलिंग के लिए इस्तेमाल में लाने वाले अन्य प्रोडक्ट के कारण बालों को नुकसान तो होता ही है। पर इन तरीकों से आप अपने बालों को जरूरी ऊर्जा दे सकती हैं: 

- बालों को दें पोषण : बालों की देखभाल को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतें। पोषक पदार्थो से युक्त शैंपू का इस्तेमाल करें और बालों में कंडीशनर लगाने के लिए चौड़ी कंघी का इस्तेमाल करें। सप्ताह में एक बार हेयर मास्क भी लगाएं। 

- बालों में डालें जान : हेयर स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करके आपके बालों की हालत अब तक खराब हो चुकी है। अब वक्त है उनमें फिर से जान डालने का। ऐसे हेयर ट्रीटमेंट्स का इस्तेमाल करें, जिसे रात भर लगाकर रखने की जरूरत होती है। आप बालों मे तेल से मसाज भी कर सकती हैं। इसके अलावा हेयर नरिशिंग क्रीम भी बाजार में उपलब्ध हैं। सुबह तक बालों में फर्क आप खुद महसूस करेंगी। 

- ट्रिमिंग करें: नियमित अंतराल पर बालों की ट्रिमिंग करवाएं। ट्रिमिंग से दोमुंहे बाल निकल जाएंगे और आपके बाल हेल्दी दिखेंगे। छह इंच से ज्यादा लंबे बालों तक सिर से बालों को मिलने वाला पोषण नहीं पहुंच पाता है। ऐसी स्थिति में नियमित रूप से बालों की ट्रिमिंग करवाना बेहतर जान पड़ता है(हिंदुस्तान,दिल्ली,23.2.12)।

आगे चलें...

रविवार, 19 फ़रवरी 2012

ताकि बाल रहें रेशमी

शहूर मेकअप आर्टिस्ट नैना अरोड़ा कहती हैं कि किसी भी पार्टी में जितना महत्व ड्रेस का होता है, उतना ही महत्व मेकअप और बालों की स्टाइलिंग का भी होता है। कई बार बिना सही मेकअप और हेयर स्टाइलिंग के आपकी सुंदर से सुंदर ड्रेस भी ग्रेस खो देती है और अब वेलेंटाइन आने वाला है तो लड़कियों ने अपने ड्रेसेज का चुनाव तो कर ही लिया होगा, लेकिन साथ ही बालों के इन ट्रेंड और स्टाइल्स को भी अगर फॉलो करें तो ये उनके वेलेंटाइन के लिए जबरदस्त सरप्राइज होगा। 

हल्के वेवी-कर्ली हेयर सबसे पसंदीदा स्टाइल : 
इन दिनों हल्के वेवी-कर्ली हेयर महिलाएं खासे पसंद कर रही हैं। आयरन रॉड के जरिये आप घर पर ही बालों को हल्का वेवी लुक दे सकती हैं। इस तरह के बालों की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इंडियन हो या वेस्टर्न या फिर फ्यूजन, हर तरह की ड्रेस के साथ ये आसानी से मैच हो जाते हैं। 

सिंगल रेड कलर हेयर स्ट्रीक भी खूब चलन में : 
इन दिनों बालों की कलरिंग में सारे बालों की कलरिंग की बजाय रेड कलर की हेयर स्ट्रीक लड़कियां खूब पसंद कर रही हैं। बालों की सिंगल स्ट्रीक का या नीचे के बालों को लाल करवाना काफी ट्रेंडी है। लेकिन अगर आप कलरिंग नहीं करवाना चाहती हैं तो बाजार में आपको बनी-बनाई सिंगल रेड कलर हेयर स्ट्रीक भी आसानी से मिल जाएगी, क्योंकि सीजन वेलेंटाइन का है और इस दिन लाल रंग का खुमार रहता है। लिहाजा बालों के लिए भी रेड कलर स्ट्रीक ही अच्छा विकल्प है। 

खुले बाल ऑल टाइम फेवरेट : 
खुले बालों का फैशन एवरग्रीन है। बालों की स्ट्रेटिंग और प्रेसिंग तो हमेशा से लगभग हर उम्र की महिलाएं पसंद करती हैं। 

पोनी टेल और फिश टेल भी कम नहीं : 
इन दिनों पोनी, साइड पोनी और फिश टेल प्लैट्स काफी इन ट्रेंड हैं। ये इतना हॉट स्टाइल है कि सेलिब्रिटीज भी इसे फॉलो कर रहे हैं। कुछ दिन पहने हुए एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान गाउन के साथ एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने इसी हेयर स्टाइल को बनाया था। 

फूलों की एक्सेसरीज का जोर : 
बालों को कर्ल करके जूड़ा पिन से कर्ल को सेट किया जाता है। साइड पोनी भी इन दिनों काफी पसंद की जा रही है। इन दोनों ही स्टाइल्स में एंटीक क्लिप भी लगा सकते हैं। आजकल ताजे खूबसूरत फूलों और आर्टिफिशियल फूलों का बखूबी प्रयोग किया जा रहा है। कलर्स के साथ भी कई तरह के एक्सपेरिमेंट्स किए जा रहे हैं। 

पफ पैटर्न भी है पसंद : 
न्यू ईयर जैसी पार्टी नाइट में कर्ली हेयर स्टाइल के साथ पफ वाला रेट्रो लुक भी लड़कियों को खासा लुभा रहा है। 

बालों की एक्सेसरीज का इस्तेमाल : 
रबर बैंड्स, क्लिप, क्लैचर आदि सभी में फूलों और स्टोन की एक्सेसरीज खासी पसंद की जा रही हैं। मिड्डी और ट्यूनिक्स के साथ फंकी एक्सेसरीज भी अच्छा विकल्प है। 

फिर लौटा बुफॉन स्टाइल : रेट्रो लुक के ट्रेंड की पॉपुलैरिटी के चलते बुफॉन हेयरस्टाइल फिर पसंद किया जा रहा है। हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड तक सभी सेलिब्रिटीज इस स्टाइल को फॉलो कर रहे हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,10.2.12)। 


बालों की सेहत पर एक आलेख यहां देखिए।

आगे चलें...

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

ड्रैकुला थेरपी: थम जाएगी उम्र

ब्लड निकालकर उसे वैंपायर्स के लिए कलेक्ट करना तो हम सबने सुना है , लेकिन उसे ब्यूटी के लिए यूज करना थोड़ा नया कॉन्सेप्ट है। कॉस्मेटोलॉजी में अब अपने ही ब्लड को इंजेक्ट करके रिंकल्स को दूर किया जा रहा है। आइए जानते हैं इस ट्रेंड के बारे में-

बोटोक्स और कॉस्मेटिक फिलर्स के बाद अब बारी है , ड्रैकुला थेरपी की। आपके चेहरे पर उम्र का असर न दिखे , इसके लिए आपके ही ब्लड को आपके फेस पर इंजेक्ट किया जाता है। गौरतलब है कि ड्रैकुला थेरपी में बगैर किसी सर्जरी के बेहद यूथफुल लुक मिलता है। बता दें कि इस थेरपी को पहली बार ब्रिटेन में इंट्रोड्यूस किया गया था। लंदन - बेस्ड फ्रेंच कॉस्मेटिक डॉक्टर डेनियल सिस्टर का यह कॉन्सेप्ट अब इंडिया में अपने रिजल्ट की वजह से पॉप्युलर हो रहा है। इस थेरपी के बाद बेबी - सॉफ्ट और नेचरल स्किन मिलती है। दरअसल , इस थेरपी में आपके ही प्लेटलेट रिच प्लाज्मा को इंजेक्ट किया जाता है। इसे इंजेक्ट करने से स्किन रिजेनरेट हो जाती है और साथ में रिजुनेवेट भी। अगर आपको सिंथेटिक प्रॉडक्ट्स से प्रॉब्लम है , तो यह आपके लिए बेहतर है। 

क्या है प्रोसेस 
फोर्टिस हॉस्पिटल के सीनियर कॉस्मेटिक सर्जन डॉ . अजय कश्यप बताते हैं कि इस नॉन - सर्जिकल एज डिफाइंग ट्रीटमेंट में डॉक्टर आपका ब्लड निकालते हैं। फिर उसे उसे रेड ब्लड सेल्स , सीरम और प्लेटलेट्स में सेपरेट कर देते हैं। फिर इसे छोटे सीरिंज नीडल से पेशंट के फेस में इंजेक्ट किया जाता है। इसके बाद नए यंगर सेल्स बनने की प्रोसेस शुरू हो जाती है। चूंकि इस प्रोसेस में कोई फॉरन बॉडी इंजेक्ट नहीं की जाती , इसलिए यह सेफ है। यही नहीं , जरूरत पड़ने पर इसे दोबारा भी करवाया जा सकता है। 

बोटोक्स से अलग 
अगर बोटोक्स की बात करें , तो यह एक नर्व पारालिटिक एजेंट है। यह फेशियल लाइंस के लुक को इंप्रूव तो करता है , लेकिन सेल्स को रिजेनरेट नहीं करता , जबकि ड्रैकुला थेरपी से स्किन की कंडीशनिंग हो जाती है।

हेयर फॉल में भी 
ड्रैकुला थेरपी का यूज बालों की प्रॉब्लम्स में भी किया जाता है। स्किन स्पेशलिस्ट डॉ . रोहित बतरा बताते हैं कि अगर इसे स्कैल्प में इंजेक्ट किया जाता है , तो बहुत अच्छा रिजल्ट मिलता है। इसका रिजल्ट इंस्टैंट नहीं दिखता , लेकिन आपकी स्किन बिल्कुल इंप्रूव हो जाती है। वैसे , इसे स्टिमुलेटेड सेल्फ सीरम स्किन थेरपी भी कहते हैं। चूंकि यह अपना ही ब्लड है , इसलिए कोई एलर्जी भी नहीं होती। हां , इसे कराने के बाद एक हफ्ते तक आप सोशलाइज न करें , तो बेहतर रहता है। 

हिट है दिल्ली में 
दिल्ली में 35 से लेकर 50 की एज ग्रुप की महिलाएं इस थेरपी को पिछले कुछ महीनों से आजमा रही हैं। वैसे , कॉस्मेटिक डर्मेटॉलजिस्ट डॉ . दीप्ति ढिल्लन की मानें , तो दिल्ली में फिलहाल इसे सेलिब्रिटीज ज्यादा करा रहे हैं। हां , इंटरनेट से दिल्ली वालों को इस बारे में जानकारी मिल रही है। वैसे , इस थेरपी के लिए स्किन पर बहुत ज्यादा रिंकल्स आने का इंतजार न करें , बल्कि हल्के रिंकल्स में ही आजमाएं। आपको बेहतर रिजल्ट मिलेंगे। इस बात का खास ध्यान रखें कि आप इसे किसी एक्सपर्ट से ही कराएं। - ट्रेंड कॉस्मेटॉलजिस्ट से ही करवाएं यह थेरपी। - चूंकि थेरपी के बाद स्किन थोड़ी सेंसिटिव हो जाती है , इसलिए हमेशा घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन का यूज जरूर करें। - आप चाहें , तो दो साल बाद इस थेरपी को रिपीट भी कर सकती हैं।

कितना है खर्च 
हालांकि यह टेक्नीक हमारे यहां अभी नई है, लेकिन बहुत तेजी से पॉपुलर हो रही है। इस थेरपी के हर सेशन में आपका 25,000 से लेकर 30,000 रुपये तक का खर्च आ सकता है। 


चूंकि यह आपका अपना ही ब्लड है , इसलिए कोई एलर्जी भी नहीं होती-डॉ.रोहित बतरा। (प्रीतंभरा प्रकाश,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,2.2.12)

आगे चलें...

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

अनचाहे बालों का सही उपचार है लेज़र

अनचाहे बाल महिलाओं की एक आम समस्या है। महिलाओं के चेहरे पर पुरुषों जैसे बाल आ जाने से बहुत ही दुखद स्थिति बन जाती है। आमतौर पर ठोड़ी और होंठ के ऊपर बाल आते हैं। 

कारण 
हारमोनल समस्याएँ : महिलाओं में हारमोन की अनियमितता के कारण चेहरे पर बाल आने लग जाते हैं। शरीर में टेस्टोस्टेरॉन हारमोन के अधिक सक्रिय होने पर चेहरे, अपर लिप व ठोढ़ी पर बाल आने लगते हैं।

वंशानुगतः चेहरे पर बाल आना एक वंशानुगत समस्याएँ भी हैं। परिवार में यदि माता को बाल आने की समस्या है तो यह समस्या उसकी बेटी को होने की आशंका भी रहती है। 

अनियमित जीवनशैली:भोजन में प्रोटीन, विटामिन और फाइबर जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की कमी से भी अनचाहे बाल विकसित होने लगते हैं।

पॉलिसिक्टिक ओवरी : "पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम" में ओवेरी में छोटी-छोटी गठानें बन जाती हैं जिससे हारमोन की एक्टिविटी पर प्रभाव पड़ता है और चेहरे पर बालों का विकास होता है।

स्टेरॉइड्स : ५-६ महीने तक लगातार स्टेरॉइड्स लेने पर मेटाबोलिक तथा हारमोनल परिवर्तन आने लगते हैं।

रजोनिवृत्ति : इस समय हारमोन के स्तर में बदलाव आते हैं जिससे अनचाहे बाल विकसित होने की आशंका रहती है। 

अनचाहे बालों को लेज़र द्वारा स्थायी रूप से हटाया जा सकता है। लेजर से बालों को हमेशा के लिए जड़ से खत्म किया जाता है। इसमें लगभग ७ से ८ सिटिंग्स लगती हैं। शरीर के अनचाहे बालों को दूर करने के लिए यदि वैक्सिंग, शैविंग, ट्वीज़िंग आदि तरीकों से त्रस्त हो चुके हों तो लेज़र उपचार अच्छा विकल्प हो सकता है। लेज़र द्वारा अनचाहे बालों से स्थायी रूप से छुटकारा पा सकते हैं। लेज़र बीम को फोलिकल पर केंद्रित किया जाता है जिससे बाल नष्ट हो जाते हैं। 

फायदे 
लेज़र बीम को सटीकता से बालों पर केंद्रित किया जाता है जिससे बाल नष्ट हो जाते हैं। साथ ही,उसके आसपास की त्वचा को कोई क्षति नहीं होती है। लेज़र की एक पल्स एक सेकेंड से भी कम समय लेती है जिससे एक साथ कई बालों को नष्ट किया जा सकता है। अपर लिप जैसे छोटे हिस्सों का उपचार एक मिनट से भी कम समय में हो जाता है। पीठ या पैरों जैसे बड़े हिस्सों से बालों को हटाने में 1 घंटे का समय भी लग सकता है। नब्बे प्रतिशत मरीज़ों में 3 से 5 सेशंस के बाद बालों से स्थायी रूप से छुटकारा मिल जाता है।

तैयारी
बालों से निजात पाने के लिए किया जाने वाला लेज़र उपचार आम कॉस्मेटिक प्रक्रिया से भिन्ना मेडिकल प्रोसिजर है जिसे विशेष प्रशिक्षण प्राप्त प्रोफेशनल द्वारा ही किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को कराने से पहले सुनिश्चित कर लें कि चिकित्सक या टेक्नीशियन अपने काम में कुशल हों। लेज़र उपचार का मन बना चुके हों तो प्लकिंग, वैक्सिंग और इलेक्ट्रोलिसिस जैसी प्रक्रियाओं को ६ हफ्तों पहले से बंद करने की सलाह दी जाती है। लेज़र को बालों की जड़ों पर केंद्रित किया जाता है, वैक्सिंग या प्लकिंग जैसी प्रक्रियाओं से बाल अस्थायी रूप से जड़ समेत निकल जाते हैं इसलिए लेज़र उपचार के पहले कम से कम ६ हफ्तों तक यह नहीं कराना चाहिए।  

 -लेज़र उपचार के पहले और बाद में ६ हफ्तों तक धूप से भी बचना चाहिए। त्वचा पर धूप के असर से लेज़र उपचार का प्रभाव कम हो सकता है और प्रोसिजर के बाद जटिलताओं की आशंका भी बढ़ जाती है। 

- प्रक्रिया शुरू करने से पहले लेज़र उपकरण को बालों के रंग, मोटाई और स्थान के अनुसार एड्जस्ट किया जाता है, साथ ही त्वचा के रंग का ध्यान रखना भी ज़रूरी होता है।

-टेक्नीशियन और मरीज़ को लेज़र किरणों से बचने के लिए उपयुक्त आई प्रोटेक्शन गियर पहनने चाहिए। त्वचा की सुरक्षा के लिए जेल लगाया जाता है।

-लेज़र की पहली पल्स देकर कुछ मिनट रुककर उसका प्रभाव देखा जाता है। उपचार के बाद मामूली असुविधा होने पर सूजनरोधी क्रीम एलोवेरा जेल या बर्फ के सेंक की सलाह दी जाती है, फिर अगले सेशन के लिए ४-६ हफ्ते बाद जाना होता है। बालों का विकास पूरी तरह बंद होने तक उपचार को रिपीट किया जाता है।

जटिलता
लेज़र उपकरण को त्वचा या बालों के रंग आदि के अनुरूप सही ढंग से एड्जस्ट नहीं किया जाए तो गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसीलिए लेज़र उपचार करने वाले तकनीशियन का प्रशिक्षित होना बहुत ज़रूरी है। लेज़र उपचार कराने से पहले अपने चिकित्सक और तकनीशियन की क्वालीफिकेशन और कुशलता की पुष्टि आवश्य कर लें। बहुत गहरे या बहुत हल्के रंग के बालों पर लेज़र उपचार उतना प्रभावी नहीं होता(डॉ. अनिल दशोरे,सेहत,नई दुनिया,जनवरी तृतीयांक 2012)।

आगे चलें...

सोमवार, 23 जनवरी 2012

बालों की मेंहदी की भी होती है एक्सपायरी डेट

प्रौढावस्था की शुरुआत से ही बालों में सफेदी आना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इससे पहले यदि बाल सफेद होने लगते हैं तो इसे एक समस्या मानना चाहिए। असमय सफेदी के कई कारण हो सकते हैं - शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी, स्त्रियों में मुख्य रूप से रक्तल्पता, कोई बीमारी जो लंबे समय तक रही हो, कुछ ऐलोपैथी दवाइयाँ भी असमय सफेदी का कारण हो सकती हैं। प्रायः लोग असमय सफेदी की स्थिति में बालों में मेहँदी लगाते हैं। मेहँदी कौन-सी लें एवं इसमें कौन सी जड़ी-बूटियाँ डालें, इस बारे में कोई जानकारी नहीं होती। मेहँदी का मिश्रण यदि संतुलित न हो तो बालों में रुखापन आ सकता है अथवा सफेदी बढ़ भी सकती है। अक्सर लोग विभिन्न जड़ी बूटियाँ उचित मात्रा का ध्यान रखे बिना अंदाज़ से मेंहदी में डाल देते हैं। यह भी याद रखना ज़रूरी है कि जो जड़ी-बूटियां बाज़ार से ली जा रहीहैं,वे अधिक पुरानी न हों। जड़ी बूटियों की भी एक्सपायरी डेट होती है लेकिन अभी हमारे देश में इस दिशा में अधिक शोध नहीं हुए हैं। बाज़ार में किराने की दुकानों में जड़ी-बूटियां कब से हैं,इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती। इसी तरह,घर में भी अधिक समय तक इन्हें नहीं रखा जा सकता(सेहत,नई दुनिया,जनवरी द्वितीयांक 2012)।

आगे चलें...

रविवार, 15 जनवरी 2012

बालों के लिए कंडीशनर घर पर ही बनाएं

बाल धोने के बावजूद यदि उड़े-उड़े रहें और मनचाही शैली में न संवारे जा सकें तो इसका मतलब उन्हें खास देखभाल की जरूरत है, यानी हेयर कंडीशनिंग की। कंडीशनर न केवल बालों में चमक लाता है बल्कि उन्हें मुलायम भी बनाता है जिससे बाल मनचाही शैली में संवारे जा सकें और ज्यादा देर तक सेट रहें। हेयर कंडीशनर बालों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है। बालों को कंडीशन करने के लिए आप कंडीशनर बाजार से भी खरीद सकती हैं और चाहें तो घर पर भी बना सकती हैं। 

बाजार में तो कंडीशनर शैम्पू जैसे तरल रूप में मिलते हैं। बाल धोने के बाद बालों की लम्बाई के हिसाब से एक या दो ढक्कन हथेली पर लेकर इसे बालों में लगाया जाता है। फिर 10-15 मिनट यूं ही रहने देना चाहिए और फिर साफ पानी से धो लेना चाहिए। 

अगर आप बाजार का कंडीशनर न प्रयोग करना चाहें तो अंडे, बीयर, नीबू, सिरका का प्रयोग किया जा सकता है। प्राय: बहुत से परिवारों में अंडा और बीयर जैसी चीज वर्जित होती है। अत: इनका प्रयोग मुश्किल है, पर कोई बात नहीं नीबू या सिरका का प्रयोग भी उतना ही असरकारक है। बाल धोने के बाद करीब दो-तीन मग जितने पानी में आधा नीबू निचोड़ कर बालों को इस पानी से धो लें। इसके बाद साफ पानी डालने की जरूरत नहीं। अगर सिरका प्रयोग करें तो दो-तीन मग पानी में 5-6 बूंद डाल कर इस पानी से बाद आखिरी बाल धोएं। हां आपके पास वक्त हो तो आप कंडीशनर के तौर पर मेहंदी का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे बाल मुलायम और चमकदार तो होंगे ही साथ ही बाल कुछ भूरापन ले लेंगे। मेहंदी कंडीशनर के प्रयोग के लिए सूखी मेहंदी पाउडर लीजिए। 

मेहंदी पाउडर की मात्रा बालों की लम्बाई के हिसाब से लीजिए। अब इसमें थोड़ी-सा दही मिलाकर और शेष पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लीजिए। इसे बालों में लगाने के बाद आधा-पौने घंटे इंतजार कीजिए और फिर धो डालिए। मेहंदी कंडीशनर प्रयोग करते समय एक बात जरूर ध्यान रखें कि मेहंदी पेस्ट को सिर की त्वचा पर न रगड़ें। बल्कि जिस तरह बाल डाई करते हैं उसी तरह सिर्फ बालों पर लगाइये। 

लीजिए, आपके बाल  बन गए मुलायम और चमकदार । इन्हें अगर कोई खास तरीके से सेट करना हो तो बेहतर है कि जब बाल हल्का सा गीलापन लिए हों तो तभी सेट कर लें। इससे बाल सुगमता से सेट होंगे और ज्यादा देर तर सेट रहेंगे(अनीता होलानी,दैनिक ट्रिब्यून,27.12.11)।

आगे चलें...

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

सर्वांगासन से लौट आती है बालों की रंगत

शहरी जीवन में एक उम्र के बाद बालों की सेहत भी बिगड़ने लगती है। कुछ लोगों के बाल सफेद होने लगते हैं तो कुछ लोग बालों के झड़ने की समस्या से परेशान रहने लगते हैं। लेकिन आसन और प्राणायाम की कुछ विधियां अपनाकर आप इस समस्या पर काबू पा सकते हैं। 

बालों का असमय सफेद होना, झड़ना तथा रूसी होना आजकल एक आम समस्या हो गई है। चिंता की बात ये है कि अब यह बच्चों में भी पायी जाने लगी है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इस समस्या के मूल कारण पर गौर न कर इनके सतही कारणों जैसे-बालों का संक्रमण, बालों की उचित देखभाल न करना, पीड़ित व्यक्ति के कंधी, हेयर ब्रश, तौलिये या तकिये का प्रयोग करना, अधिक डाई या शैम्पू का प्रयोग करना आदि का इलाज करने का प्रयास करता है। किन्तु इसका मूल कारण आन्तरिक जैसे-सिर में रक्त संचार की गड़बड़ी, पाचन प्रणाली का गड़बड़ होना, असंतुलित भोजन, व्यायाम की कमी तथा अत्यधिक मानसिक तनाव है। योग उपयुक्त सभी आन्तरिक कारणों का समग्र एवं स्थायी समाधान प्रस्तुत करता है। इसके लिए हम एक खास यौगिक पैकेज दे रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप बालों की समस्या से मुक्ति पा सकते हैं। 

आसन 
आसनों के अभ्यास से सिर में रक्त संचार को बढ़ाने, पाचन प्रणाली को सशक्त करने, व्यायाम की कमी को पूरा करने तथा ग्रंथियों के स्नव को संतुलित करने में मदद मिलती है। इस हेतु प्रमुख आसन है-सर्वागासन, शीर्षासन, विपरीत करणी मुद्रा, हलासन, कर्णपीड़ासन, पादहस्तासन, पर्वतासन, मयूरासन आदि। सामान्य लोगों के लिए सर्वागासन सबसे अच्छा माना जाता है। 

सर्वागासन की विधि 
पीठ के बल जमीन पर सीधा लेट जाएं। अब दोनों पैरों को घुटने से मोड़कर पंजों को धीरे-धीरे जमीन से ऊपर उठाकर पैरों को सीधा करें। एक हल्के झटके के साथ नितम्ब तथा कमर को भी जमीन से यथासंभव ऊपर उठाएं। कमर को हाथों का सहारा देते हुए धड़ तथा पैर को गर्दन से 90 अंश पर रखें। इस अवस्था में आरामदायक अवधि तक झुककर वापस पूर्व स्थिति में आइए। प्रारम्भ 10-15 सेकेंड से करें और धीरे-धीरे इसे 2 से 5 मिनट तक ले जा सकते हैं। सर्वागासन के अभ्यास के पश्चात थोड़ी देर के लिए भुजंगासन या धनुरासन का अभ्यास अवश्य करें। 

सावधानी 
उच्च रक्तचाप, निम्न रक्त चाप, हृदय रोग तथा सर्वाइकल, स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति सर्वागासन का अभ्यास न करें। इन समस्याओं से पीड़ित लोग पाद हस्तासन का अभ्यास कर सकते हैं। 

पाद हस्तासन की विधि 
सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के मध्य लगभग एक फिट का अन्तर कर दोनों हाथों को सिर से सीधा ऊपर उठाएं। तत्पश्चात धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें। अंतिम स्थिति में हथेलियां जमीन पर तथा माथा घुटने को स्पर्श करते हैं। इस स्थिति में आरामदायक अवधि तक रुककर वापस पूर्व स्थिति में आएं। 

प्राणायाम 
पाचन प्रणाली सशक्त करने, रक्त शुद्ध करने तथा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में तीव्र वृद्धि करने हेतु कपालभाति, भस्त्रिका, उज्जयी तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम सर्वोत्तम हैं। 

सावधानी 
उच्च रक्त चाप, हृदय रोग, हाइपर थायराइटिज्म एवं हाइपर एसिडिटी से ग्रस्त व्यक्ति कपालभाति एवं भस्त्रिका का अभ्यास न करें। ऐसे व्यक्ति को उज्जयी एवं नाड़ी शोधन का अभ्यास करना चाहिए। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट तक प्राणायाम का अभ्यास अवश्य करें। 

आहार 
सादा,सुपाच्य तथा पौष्टिक आहार लें। ककड़ी, गाजर, आंवला, पत्तागोभी, चुकंदर तथा पालक का सेवन करें। प्रोटीन युक्त आहार जैसे-दूध, दही, चना, सोयाबीन, राजमा तथा मीठे फल का पर्याप्त सेवन करें। रोज सुबह आधा कप गेहूं के पौधों का रस खाली पेट लेने से काफी फायदा मिलता है(कौशल कुमार,हिंदुस्तान,दिल्ली,21.12.11)।

आगे चलें...

शनिवार, 31 दिसंबर 2011

बालों को कलर कराते समय ज़रूरी हैं कुछ सावधानियां

बालों को कलर कराने का चलन आम है। खूबसूरती में चार चांद लगाने की मजबूरी जो होती है। लेकिन, बालों को कलर कराने में पूरी सावधानी न बरती जाए, तो नुकसान ही नजर आते हैं। अनुराधा गोयल बता रही हैं कि क्या करें, क्या न करें। 

प्रियंका को सब उसके बालों के लिए बधाई देते थे, लेकिन अब नहीं, क्योंकि प्रियंका के बाल अब पहले जैसे सुंदर, सिल्की नहीं रहे। अब उनमें रूखापन आ गया है। अपने बालों को पहले जैसा बनाने के लिए प्रियंका उन्हें कलर कराना चाहती हैं। लेकिन प्रियंका के साथ समस्या है कि वह नहीं जानती, बालों पर कौन-सा कलर ठीक रहेगा। 

प्रियंका जैसी कितनी ही लड़कियां हैं जो अपने बालों को कलर कराना चाहती हैं लेकिन उनके साथ ऐसी ही समस्याएं आती हैं। उन्हें ये पता ही नहीं होता कि बालों को कलर कैसे करें, कौन-सा कलर उन पर जमेगा, बाल कलर करने के लिए क्या करना चाहिए, किन बातों का ध्यान रखें इत्यादि। बाल कलर कराने के क्या-क्या फायदे-नुकसान हैं, इसका भी उन्हें ज्ञान नहीं होता। अगर आपकी भी दुविधा प्रियंका जैसी ही है तो आइए जानते हैं बालों को कैसे कलर कराएं। बालों को कलर कराना आज का स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है। आज युवा अपने बालों पर नए-नए प्रयोग करने से भी नहीं चूकते, लेकिन सावधानी बहुत जरूरी है। जरा-सी लापरवाही से आप अपने अच्छे बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

बालों को कलर करवाने से पहले आपको एलर्जी का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि कई बार कुछ कलर या डाई बालों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में यदि आपको अमोनियायुक्त डाई सूट न करें तो आप प्रोटीनयुक्त डाई का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। इसके लिए आप हेयर एक्सपर्ट या ब्यूटी पार्लर में जाकर परामर्श ले सकती हैं। हेयर कलर करवाने वालों को बाद में त्वचा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे बालों की कोमलता जाने का डर, बाल जल्दी सफेद होना इत्यादि। हेयर कलर में मिला अधिक अमोनिया बालों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हेयर कलर कई तरह के हो सकते हैं जैसे बरगंडी, डार्क ब्राउन, रेड कलर, नेचुरल, गोल्ड, चॉकलेट, चेरी ब्राउन, रेड इत्यादि। कलर का चयन करते समय आप अपने व्यक्तित्व का ध्यान जरूर रखें। बालों को घर पर ही कलर कर रही हैं तो हाथों में दस्तानों का प्रयोग जरूर करें और आंखों का खासतौर पर ध्यान रखें। 

डाई के किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव से बचने के लिए आपको पहली बार किसी अनुभवी व्यक्ति से ही बाल कलर करवाना चाहिए। 

बालों को कलर करने से पहले उन्हें पहले धोकर सुखा लें और बालों को कंघी के एक सिरे से उठाते हुए कलर करें। 

यदि आप खुद बालों को कलर करते हैं तो उसके बाद बालों में शैंपू और कंडीसनर करना न भूलें। हेयर स्पा और सीरम ट्रीटमेंट तो किसी अनुभवी व्यक्ति से ही करवाना चाहिए। 

यदि आप पहली बार घर पर ही बालों को कलर कर रहे/रही हैं तो बालों को डाई करने वाले पैकेट पर लिखे दिशा-निर्देशों को सावधानी से पढ़ लें। 

आमतौर पर हेयर कलर बालों में चमक लाने, नया लुक पाने, सफेद बालों की परेशानी को दूर करने, बालों को पहले से बेहतर बनाने और बालों में जान डालने के लिए किया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि हेयर कलर हमेशा अच्छी क्वलिटी का ही प्रयोग करें। 

यदि आप बालों की पर्मिग या घुंघराले बालों को स्ट्रेट कराना चाहती हैं तो कलर करवाने के 15-20 दिनों के बाद ही ऐसा करवाएं। एक साथ दोनों काम कराने पर बालों पर केमिकल का दबाव अधिक पड़ता है। इससे बाल खराब हो सकते हैं। 

यदि आप व्यस्त दिनचर्या वाले हैं तो आपको हल्के हेयर कलर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह आपके बालों को अधिक नुकसान नहीं पहुंचने देगा। 

जरूरी सावधानियां 
बालों पर कलर करवाने के लिए विश्वस्त तथा गुणवत्तापूर्ण पार्लर को ही चुनें।

यदि आपको किसी तरह की एलर्जी, डैंड्रफ या अन्य तकलीफ है, तो कलर करवाने से बचें। 

सोच-समझकर डाई करवाएं क्योंकि एक बार रंग चढ़ने के बाद उसे उतारने में बालों को नुकसान होता है। इससे बाल टूटते और झड़ते भी हैं। 

डाई किए गए बालों के लिए अलग तरह के शैम्पू इस्तेमाल करें। अन्य सावधानियां-देखभाल भी अपनाएं। 

तेज धूप पड़ने से बालों को बचाएं क्योंकि इससे बाल रुखे और रंग हल्के हो सकते हैं। 

बालों की माह में एक बार डीप कंडीशनिंग करें और प्रत्येक शैम्पू के बाद कंडीशनर का उपयोग करें। 

यदि आपके बाल दोमुंहे हैं तो कलरिंग से पहले बालों की ट्रीमिंग जरुरी है। 

बालों को कलर करवाने के लिए जरूरी है कि आप 4-5 महीने पहले बालों में मेहंदी न लगायें। 

कलरिंग के बाद डैंड्रफ शैंपू के प्रयोग से परहेज करें। दरअसल, डैंड्रफ शैंपू में मौजूद केमिकल्स बालों से कलर उड़ा सकते हैं। 

बाल सुखाने के लिए ड्रायर का प्रयोग नहीं करें। 

हेयर प्रोडक्ट खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें, नहीं तो बालों पर इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,21.12.11)।

आगे चलें...

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

ड्राई हों या ऑयलीःबेशक़ीमती हैं आपके बाल

घर पर कुछ आसान से हेयर पैक बनाकर आप अपने बालों से जुड़ी कई परेशानियों से छुटकारा पा सकती हैं। बालों से जुड़ी कौन-सी समस्या से छुटकारे के लिए लगाएं कौन-सा हेयर पैक, बता रही हैं आरती मिश्रः

बाल बेशकीमती होते हैं। ये आपकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। लेकिन अगर इनकी सही तरीके से देखभाल न की जाए तो ये रूखे हो जाते हैं और टूटने लगते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि रोजमर्रा के कामों से समय निकालकर आप सप्ताह में एक बार बालों को स्पेशल ट्रीटमेंट जरूर दें। बालों की देखभाल करने के लिए कुछ आसान से पैक बनाकर घर में नियमित तौर पर लगाने से आपको काफी फायदा मिल सकता है। 

रूखे बालों की देखभाल 
रूखे बालों के लिए हेयर पैक बनाने के लिए एक केले को मैश करिए। इसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच नीबू का रस मिलाएं। अब इसे ठीक से मिलाएं। इस पेस्ट को अपने बालों पर लगाएं, खासकर जड़ों पर धीरे-धीरे मलें। एक घंटे के बाद बालों को धो लें। अगर बाल ज्यादा रूखे हैं तो इस पेस्ट में उड़द दाल का पाउडर और आधा चम्मच दही मिलाएं। 

टूटते बालों को चाहिए पोषण 
एक कटोरी में दो अंडे का पीला भाग और एक का सफेद भाग मिला लीजिए। इसमें एक चम्मच नीबू और कुछ बूंद शहद मिलाएं। अब इसे अच्छी तरह से मिलाकर बालों में लगाएं। इसे आधे घंटे के लिए छोड़ दें और फिर धो दें। 

ऑयली बालों को ये चाहिए 
एक अंडे का सफेद भाग लीजिए और उसे बालों में अच्छी तरह से लगाएं। इसमें और कुछ भी न मिलाएं। इसे अच्छे तरीके से सूखने दीजिए। जब यह सूख जाए तो बाल धो लीजिए। अंडे के सफेद भाग को सप्ताह में दो बार बालों में लगाएं। दो माह के भीतर ही परिणाम दिखने लगेगा। 

बालों में चमक ऐसे मिलेगी 
मेथी बालों को प्राकृतिक रूप से पोषित कर उनमें चमक लाती है और उन्हें सिल्की बनाती है। इसलिए रात को मेथी के कुछ दानों को भिगोकर रख दीजिए। जब ये बीज मुलायम हो जाएं तो इन्हें पीसकर, पेस्ट बना लीजिए। अब इस पेस्ट में इसकी मात्र के आधे के बराबर दही मिलाएं और इस पैक को बालों में लगाएं। जब यह सूख जाए तो इसे धो डालिए। बालों को हैवी दिखाना है तो- 

सिरके और शहद की समान मात्र लें। इसे आधा कप गर्म पानी में मिलाएं। इसे कुछ देर छोड़ दें और फिर बालों में लगाएं। अब दो या तीन मिनट तक इस मिश्रण को बालों में लगा रहने दें और फिर गुनगुने पानी से सिर धो दें। इसके बाद हल्के हाथों से शैंपू करें और जड़ों को मसाज दें। बाल सूखने पर आप पाएंगी कि बाल काफी हैवी लग रहे हैं(हिंदुस्तान,दिल्ली,22.12.11)।

आगे चलें...

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

बाल प्रत्यारोपणः न करें समझौता

सस्ते में हेयर ट्रांसप्लांट का विज्ञापन देखकर अगर बाल प्रत्यारोपण कराने जा रहे हैं तो हो जाइए सावधान। सस्ते के चक्कर में फंसने से पहले समझ लें कि बाल प्रत्यारोपण एक बड़ा कदम है। इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ हेयर रेस्टोरेशन के सदस्य व जानेमाने बाल प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. अरविंद पोसवाल का आलेखः 

जूते, कपड़े, बेल्ट आदि अगर आपकी उम्मीद के अनुकूल न हों तो आप कभी भी उनकी जगह दूसरे उत्पाद ला सकते हैं। मगर एक बार आपके सिर के बाल खराब हो गए तो उन्हें दोबारा पहले जैसे भी पाना आसान नहीं होगा। बार-बार बाल प्रत्यारोपण करवाने से कई दिक्कतें पेश आ सकती हैं। ना सिर्फ ये आपकी जेब पर भारी पड़ेगा बल्कि इसके कुछ अन्य दुखद परिणाम भी हो सकते हैं। कभी-कभी गलत तरह से किया गया बालों का प्रत्यारोपण ऐसी गंभीर जटिलताएं पैदा कर देता है जिन्हें ठीक कर पाना असंभव हो जाता है। गंजेपन के शिकार कुछ लोगों का मानना है कि बाल प्रत्यारोपण केवल वही लोग कराते हैं जिनके पास काफी पैसा होता है। हो सकता है कि कुछ जगहों पर इस काम के लिए काफी रुपए मांगे जाते हो, लेकिन हर जगह ऐसा नहीं है। थोड़ी कोशिश करने पर आपको सही जगह भी मिल जाएगी जहां यह काम अच्छी तरह किया जाता हो और चार्ज भी उचित तरीके से लिया जाता हो। 

सही विकल्प 
हर कोई इस परेशानी का सही इलाज करा पाने मे सक्षम नहीं हो पाता। बाल प्रत्यारोपण लाखों लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। अकेले अमेरिका में गंजेपन के शिकार 6 करोड़ लोगों में से अधिकतर की पसंद बाल प्रत्यारोपण है। 

तकनीक 
बाल प्रत्यारोपण में जो नवीनतम तकनीकें आई हैं उन्हें फलिक्यूलर यूनिट हेयर ट्रांसप्लांट (एफयूएचटी) और फलिक्यूलर यूनिट सेपरेशन एक्स्ट्रेक्शन (एफयूएसई) कहते हैं। असंभव से दिखने वाले मामलों में भी इन के जरिए सफलता मिली है। इस तकनीक में अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती। 

एफयूएचटी तकनीक में सिर के पिछले हिस्से से बालों की एक पट्टी निकाली जाती है जिसे सिर के उस भाग में प्रत्यारोपित किया जाता हैं जहां गंजापन होता है। पूरी प्रक्रिया को मैग्निफाइंग तकनीक की मदद से किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को तेज चाकू और लोकल एनस्थीसिया के अंतर्गत अंजाम दिया जाता है। सिर में लगा चीरा एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। एफयूएसई में टांका लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें किसी तरह के निशान लगने की भी आशंका कम ही होती है क्योंकि इसमे बालों की पट्टी न निकालकर एक-एक बाल को ही निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 4 से 6 घंटे का समय लगता है। प्रक्रिया के बाद मरीज को बाल प्रत्यारोपण चिकित्सक की सलाह का पालन करना चाहिए। 

याद रखें 
सावधानी के साथ किसी अनुभवी बाल प्रत्यारोपण डॉक्टर को चुनें। बाल प्रत्यारोपण प्रक्रिया के लिए समय लेने से पहले एक ओपन हाउस मे जाएं जहां अन्य पीड़ितों से बात करके आपको सही डॉक्टर ढूंढ़ने और इलाज के बारे मे जानने में मदद मिलेगी(हिंदुस्तान,दिल्ली,21.12.11)।

आगे चलें...

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

कितने स्वस्थ हैं आपके बाल?

आपको बालों का असमय पकना, झड़ना, डैंड्रफ जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तनाव, भागदौड़, अनियमित खान-पान, प्रदूषण आदि कई बार हमारे बालों को एकदम बेजान बना देते हैं। इसका परिणाम न केवल बालों को बल्कि हमारे सिर की त्वचा को भी भुगतना पड़ता है। 

सिर की त्वचा में खुजली की समस्या से आज दुनियाभर में सभी उम्र के लोग परेशान हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ प्रीतम सिंह के अनुसार, ‘मानसिक तनाव, थकान, असंतुलित आहार, पोषक तत्वों की कमी और सबसे अहम संक्रमण व गंदगी सिर की त्वचा में खुजली या बीमारी होने के प्रमुख कारण हैं। आज लगभग सभी लोग प्रदूषण भरे वातावरण में रहने को मजबूर हैं। इस कारण अन्य बीमारियों के साथ बालों और त्वचा के रोगों से शायद ही कोई बच पाता है। वैसे तो बालों संबंधी कई रोगों से लोग परेशान रहते हैं, लेकिन हमारे पास जिस समस्या की शिकायत सबसे ज्यादा आती है वह है डैंड्रफ। बड़ी संख्या में लोग डैंड्रफ या रूसी की समस्या से प्रभावित हैं। इसके अलावा कई अन्य परेशानियां भी हैं जो सिर में खुजली या अन्य रोग उत्पन्न करती हैं।’ 

बालों की समस्या एक ऐसी समस्या है जिससे महिला और पुरुष दोनों ही परेशान हैं। खासकर रूसी या डैंड्रफ की समस्या। आइए जानते हैं बालों की समस्या और उससे निजात पाने के उपाय। 

डैंड्रफ बाल के साथ एक ग्रंथि होती है, जो तेल बनाती है। इसे सीवम कहते हैं। सीवम एक ऐसा तैलीय पदार्थ है जो हमारी त्वचा को मुलायम और चिकना रखता है। जिन लोगों में ये तैलीय ग्रंथियां अधिक सक्रिय हो जाती हैं उनमें तैलीय पदार्थ सफेद मवाद के रूप में त्वचा के ऊपर आकर जम जाते हैं और सूखकर कंधों और कपड़ों पर झड़ने लगते हैं। इस अवस्था को सबोरिया कहा जाता है। 

लक्षण 
डैंड्रफ हमारे सिर की त्वचा में स्थित मृत कोशिकाओं में पैदा होती है। इसकी वजह से सिर में खुजली रहती है और बाल गिरने लगते हैं। 
सिर में फुंसिया हो जाती हैं। सिर में लाल चकत्ते हो जाते हैं। 
डैंड्रफ होने पर सिर की चमड़ी के छोटे-छोटे टुकड़े निकलकर बालों में जमा होने लगते हैं। 
कई बार डैंड्रफ के कारण मुंहासे भी निकल आते हैं। 

कारण 
सिर की त्वचा की देखभाल में कमी मौसम में बदलाव एलर्जी समुचित पोषण की कमी हैवी वर्कआउट प्रदूषण कई तरह की एंटीबॉयोटिक्स के इस्तेमाल कम गुणवत्ता वाले शैम्पू का प्रयोग मानसिक तनाव 

उपचार 
डैंड्रफ से मुक्ति के लिए जरूरी इलाज से पहले ये जानना बेहद जरूरी है कि रूसी का कारण फंगस है या बैक्टीरिया। उसके बाद ही त्वचा रोग विशेषज्ञ इलाज शुरू करते हैं। इलाज के दौरान मरीज को सिर की त्वचा और बालों की देखभाल के लिए टिप्स दी जाती हैं। इलाज में ओटीसी युक्त एंटीडैंड्रफ प्रोडक्ट इस्तेमाल करने का भी सुझाव दिया जाता है। इसके अलावा अपने बालों का शुरू से ही खुद खयाल रखना जरूरी है ताकि बड़ी परेशानी से बच सकें। सेलिनियम सल्फाइड एंटीडैंड्रफ भी डैंड्रफ मिटाने में बेहद कारगर साबित हैं। -कीटाकोनाजोल शैम्पू फंगस संक्रमण पर काफी असरदार होते हैं लेकिन इसका भी सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें। 
-जिंक पायरिथयोन युक्त शैम्पू फंगस और बैक्टीरिया का संक्रमण मिटाने में सहायक होता है। प्रोडक्ट्स में सेलेनियम सल्फाइड, साइलेकिक एसिड, जिंक पाइरिथीन और केटोकोनाजॉल होते हैं, जो डैंड्रफ को हटाने में मदद करते हैं। 

सिर की त्वचा में दाद 
ये त्वचा में होने वाला फंगल संक्रमण है। सिर और बालों की अच्छी तरह सफाई न हो पाने के कारण सिर की त्वचा पर दाद हो जाती है। 

उपचार 
इसके लिए एंटीफंगल टेबलेट कम से कम छह हफ्तों तक खाने को दी जाती है। सिर की सफाई तो जरूरी है ही। 

जुएं 
बालों की एक बहुत बड़ी समस्या है जुएं। जुएं सिर की त्वचा में चिपककर खून चूसती रहती हैं जिससे सिर में खुजली पैदा होती है और ज्यादा खुजाने से सिर की त्वचा कट-फट जाती है। आमतौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों, लंबे बालों वाली महिलाओं और अस्वच्छ बालों में जुओं की समस्या होती है। 

उपचार 
बालों में जुएं पड़ने का मुख्य कारण बालों में गंदगी होना होता है। इसलिए जितना ज्यादा हो, बालों और सिर को साफ रखना चाहिए। जुएं निकालने वाली कंघी का इस्तेमाल करने में न हिचकें। मालथियोन या परमेथ्रीन युक्त लोशन का हफ्ते में एक बार इस्तेमाल करें। किसी अच्छी कंपनी के जुएं मारने वाले शैम्पू का प्रयोग करें(मृदुला,हिंदुस्तान,दिल्ली,30.11.11)। 


टिप्पणीःचिट्ठा चर्चाकार डा. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी ने इस पोस्ट को 6 दिसम्बर,2011 के चर्चामंच पर भी लिया है।

आगे चलें...

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

सर्दियों में बालों और त्वचा की देखभाल

सर्द मौसम में हम गर्म कपड़ों पर तो सबसे अधिक ध्यान देते हैं, लेकिन बालों और त्वचा का बिल्कुल भी खयाल नहीं रख पाते। अच्छी जैकेट, स्वेटर, जीन्स, शूज आदि पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन बालों और त्वचा का खयाल रखना भी जरूरी होता है, जो मौसम का हमेशा सामना करते हैं। तो थोड़ा-सा ध्यान देकर हम क्यों न अपने बालों और त्वचा को इतनी ताकत दें कि वे इस मौसम का सामना कर सकें और उनकी कुदरती खूबसूरती बरकरार रह सके। 

सबसे पहले सुरक्षित स्नान 
त्वचा के रखरखाव में सबसे पहला कदम सफाई का होता है। शीत ऋतु में स्नान उतना आनंददायक नहीं होता, जितना कि किसी अन्य मौसम में, लेकिन स्नान और रूखी त्वचा का परोक्ष संबंध है। पहले, पानी का तापमान कम करिए। शीत ऋतु में देर तक गुनगुने पानी से स्नान करने में मजा आता है, परन्तु यदि पानी बहुत गरम हो तो यह आपकी त्वचा को रूखा और बालों को बेजान बना सकता है। 

बचाव के लिए स्नान करने के समय को ध्यान में रखिए, गर्म पानी का तापमान कम रखिए, स्नान करने का समय कम करिए और मॉइस्चराइजिंग उत्पादों का प्रयोग करिए। साबुन की जगह शावर जेल का इस्तेमाल करिए, जो आपकी प्राकृतिक नमी को बरकरार रखे। धुल जाने वाले कंडीशनर की जगह, नहीं धुलने वाला उत्पाद इस्तेमाल करिए। शावर जेल का तेल शरीर से धुली हुई प्राकृतिक नमी को बरकरार रखता है, और नहीं धुलने वाला कंडीशनर बालों को पूरे दिन मॉइस्चराइज रखता है। अपने चेहरे के रखरखाव के लिए क्रीम क्लींजर का इस्तेमाल करिए। ये क्लींजर सौम्य होते हैं और आपकी त्वचा की प्राकृतिक नमी को बरकरार रखते हैं। 

मॉइस्चराइजिंग करते रहिए 
स्नान करने के बाद अपने शरीर को साफ करके तुरंत ही मॉइस्चराइजिंग लोशन लगाएं। रूखी त्वचा के लिए बेहतर क्रीम और लोशन वही है, जो एसपीएफ से युक्त हो। शीत ऋतु में धूप भले ही तीखी ना लगे, लेकिन यूवी किरणों फिर भी असुरक्षित त्वचा को नुकसान पहुंचा सकती हैं। चेहरे के कुछ भागों पर मौसमी असर कुछ ज्यादा ही होता है, खास तौर पर आंखों के नीचे का क्षेत्र। 
दिन और रात दोनों समय इस नाजुक त्वचा के आसपास आंख के लिए विशेष क्रीम जरूर लगाएं। ऐसे बॉडी लोशन का चुनाव करें, जो बहुत देर तक टिकी रहती हो। आपकी त्वचा पैंट और बाजुओं से ढकी रहेगी, इसलिए आपको बार-बार मॉइस्चराइजर लगाने का अवसर नहीं मिलेगा। कुछ भाग में जैसे कि आपके हाथ, कुहनी, घुटने और पैरों को बेहतर रखने के लिए कुछ ज्यादा मॉइस्चराइजर लगाने की जरूरत होती है। मॉइस्चराइजिंग के लिए कुछ अनोखे प्रयोग जैसे कि बेबी ऑयल और बॉडी बटर लगाने से बिल्कुल न हिचकिए। शीत ऋतु कठोर होती है, इसलिए आपको अपनी त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए कुछ मजबूत उपाय चाहिए ही। 

अपना बचाव करिए 
अब आप घर से बाहर जाने के लिए तैयार हैं, उचित पोशाक का चुनाव करें। शीत ऋतु की कठोर हवा से बचने के लिए बड़े सन ग्लास और गर्दन, ठुड्डी और नाक को ढकने के लिए स्कार्फ का प्रयोग बेहतर होता है। अपने बालों को स्कार्फ में लपेट कर, ढीली पोनी टेल बना कर या ढीला हैट पहन कर बचाएं। बालों के कई सैलून कुछ लोशन और सीरम का इस्तेमाल करते हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बालों को पूरे दिन चमकदार, व्यवस्थित और नियंत्रित रख सकते हैं। शीत ऋतु में लिप बाम अत्यंत आवश्यक है। इनकी कई सारी महक और किस्में उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ अपने साथ हमेशा रखने चाहिए। लेकिन अपने बालों और त्वचा को मॉइस्चराइज रखने के लिए सबसे सस्ता, आसान और प्राकृतिक तरीका है कि आप पर्याप्त मात्र में पानी पीते रहिए। यहां तक कि गरम पेय, जैसे ग्रीन टी, आपके तंत्रिका तंत्र को बहुत सारी नमी प्रदान करते हैं, जरूर पीजिए! 

अपनी सुरक्षा खुद कीजिए 
हफ्ते में एक बार अपने बालों को डीप कंडीशनिंग कीजिए। यह शक्तिशाली पोषक खुराक एक हफ्ते में अंदर खोई हुई बालों की नमी को वापस कर देगी। हफ्ते में 2 या 3 बार अपने चेहरे और शरीर की त्वचा को सौम्य स्क्रब से साफ करिए, जिससे कि मृत और झुर्रीदार दिखती त्वचा साफ हो जाए। बाजार में बहुत सारे उपलब्ध उत्पादों में आप अपनी त्वचा के लिए बेहतर आकर्षक विकल्प तलाश लें। 
हफ्ते में एक या दो बार चेहरे पर मॉइस्चराइजर लगाने से वैसा ही परिणाम मिलेगा, जैसा बालों पर कंडीशनर लगाने से मिलता है। अगर आपके पैर या हाथ ज्यादा रूखे हो गए हों तो उनमें क्रीम की अच्छी परत लगा कर सूती दस्ताने या मोजे पहन कर सो जाइए। इससे रूखी त्वचा को पोषण मिलेगा और उसमें नमी भी बरकरार रहेगी। नाक या किसी अन्य स्थान पर रूखी परतदार त्वचा के इलाज के लिए क्रीम लगाएं। त्वचा और बालों के रखरखाव के लिए बाजार में उपलब्ध हजारों उत्पादों में से अपनी जरूरतों के हिसाब से बेहतर उत्पाद चुनने में आप सक्षम हो ही जाएंगे। (दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के डरमेटोलॉजिस्ट डॉ. रोहित बत्र से अनुजा भट्ट की बातचीत पर आधारित यह आलेख हिंदुस्तान,दिल्ली में 23.11.11 को प्रकाशित है।)

आगे चलें...

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

सिर की त्वचा को रखें नम;समझें शैम्पू और कंडिशनर के फ़र्क़ को

शरीर के सभी अवयवों की तरह सिर की त्वचा को भी नमी की जरूरत होती है। सिर की त्वचा की नमी का खयाल इसलिए नहीं हो पाता क्योंकि वह खुद को दिखाई नहीं देती। सिर की त्वचा को भी नमी पहुँचाई जा सकती है। इससे आप न सिर्फ डैंड्रफ जैसी शर्मनाक स्थिति से उबर आएँगे बल्कि आपके बाल भी चमकीले और स्वस्थ बने रहेंगे। बाल मजबूत बनेंगे और लंबे समय तक आपका साथ देंगे। 

सिर की त्वचा आसानी से नहीं दिखती क्योंकि यह बालों से ढँकी होती है, शायद इसीलिए त्वचा की देखभाल के दौरान इस हिस्से की त्वचा को मॉश्चराइज़ करना भूल जाते हैं। समय-समय पर शैंपू और कंडिशनर का उपयोग बालों के लिए भले ही पर्याप्त हो लेकिन सिर की त्वचा को नमी पहुँचाने के लिए कुछ अन्य उपायों की ज़रूरत होती है। सिर की त्वचा को मॉइश्चराइज़ करने से बाल भी मज़बूत बनते हैं और डैंड्रफ की आशंका भी कम होती है। अगर आपकी त्वचा रुखी है तो सिर की त्वचा भी इसी प्रकृति की होगी रुखी त्वचा वालों को सिर की त्वचा का सोराइसिस (स्कैल्प सोराइसिस) हो सकता है। इस समस्या में रुखी त्वचा के छोटे-छोटे टुकड़े खिरने लगते हैं जो डैंड्रफ जैसे ही दिखाई देते हैं। इसके विपरीत तैलीय त्वचा वालों को एक अन्य परेशानी होने की संभावना रहती है जिसमें सिर की त्वचा पर चिपचिपे चकत्ते बनने लगते हैं। इसके अलावा जो सबसे आम समस्या होती है वह है डैंड्रफ। डैंड्रफ का कारण चाहे जो हो सिर की त्चचा को समय-समय पर मॉइश्चराइज़ करते रहें तो इस समस्या से बचा जा सकता है। इसके अलावा बालों की स्टाइलिंग के लिए कम से कम उत्पादों का उपयोग करें तो अच्छा रहेगा। बालों की देखभाल के लिए क्रीम आदि के बजाय तेल बेहतर होते हैं।  

त्वचा को नर्म रखने के लिए तेल 
त्वचा के नीचे स्थित तैलीय ग्रंथि से सीबम या तेल बनता है। हालाँकि कई बार यह ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में सीबम का उत्पादन नहीं करती, जिससे त्वचा रुखी हो जाती है। ऐसी त्वचा पर तेल लगाना फायदेमंद होता है। किसी मॉश्चराइज़िंग क्रीम या लोशन के मुकाबले तेल गहराई से और ज़्यादा समय तक असर करता है, इसीलिए इसका उपयोग बेहतर है। सिर की त्वचा के लिए कई तरह के तेलों का उपयोग किया जा सकता है,जैसे जोजोबा का तेल। मॉश्चराइज़ेशन इसके विभिन्ना फायदों में से एक है। मिनरल ऑयल, कॉड लिवर ऑयल और नारियल तेल का प्रयोग सिर की त्वचा को मॉश्चराइज़ करने के लिए किया जाता है। सिर की त्वचा स्वस्थ रहेगी तो बाल भी बेहतर बनेंगे। 

शैंपू करते समय सावधानियाँ 
बाल धोने के लिए शैंपू और फिर कंडिशनर का उपयोग कई लोग करते हैं। इन उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए ताकि बालों को इनसे फायदे के बजाय नुकसान न पहुँचे। इसके लिए यह समझना ज़रूरी हबाल धोने के लिए शैंपू और फिर कंडिशनर का उपयोग कई लोग करते हैं। इन उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए ताकि बालों को इनसे फायदे के बजाय नुकसान न पहुँचे। इसके लिए यह समझना ज़रूरी है कि शैंपू और कंडिश्नर कैसे काम करते हैं। 

शैंपू करने पर बालों के क्यूटिकल्स (रोम-कूप) खुल जाते हैं। वहींबाल धोने के लिए शैंपू और फिर कंडिशनर का उपयोग कई लोग करते हैं। इन उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए ताकि बालों को इनसे फायदे के बजाय नुकसान न पहुँचे। इसके लिए यह समझना ज़रूरी है कि शैंपू और कंडिश्नर कैसे काम करते हैं। -शैम्पू करने पर बालों के क्यूटिकल्स(रोम-कूप) खुल जाते हैं। वहीं कंडिशनर लगाने से ये क्यूटिकल्स बंद हो जाते हैं। -कंडिशनर का उपयोग करते समय विशेष ध्यान रखें कि गलती से भी बालों की जड़ों यानी कि त्वचा पर न लगे। -ऐसे उत्पादों का उपयोग बिल्कुल न करें जिनमें शैम्पू और कंडिशनर दोनों एक साथ मिलाए गए हों। -शैम्पू करते हुए कुनकुने पानी का उपयोग करना चाहिए क्योंकि इससे क्यूटिकल्स खुल जाते हैं और कंडिशनर का उपयोग करते हुए ठंडे पानी का उपयोग करना बेहतर होता है क्योंकि उसके इस्तेमाल से क्यूटिकल्स बंद हो जात हैं। 

डैंड्रफ से जुड़े तथ्य 
-बालों को शैंपू करना डैंड्रफ से छुटकारा पाने का आसान तरीका है, इससे सिर की त्वचा में जमी गंदगी, अतिरिक्त तेल और डैंड्रफ साफ हो जाते हैं। 

-हर बार बाल धोने के लिए एंटी डेंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करना ग़लत है। हर बार एंटी डैंड्रफ शैंपू के उपयोग से समस्या बढ़ सकती है। एंटी डैंड्रफ शैंपू के इस्तेमाल से कोई फायदा न हो रहा हो तो शैंपू को बदलकर देखें। 

-दो-तीन प्रकार के एंटी डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करके आप जान जाएँगे कि आपके लिए कौनसा सबसे अच्छा है। 

-ज़िंक पायरिथियोन फंगस घटाता है। सेलिसिलिक एसिड त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाता है। कीटोकोनाज़ोल फंगस पर असरकारी होता है। 

-डैंड्रफ के कारण सिर में खुजली होती है और यदि खुजलाने की वजह से सिर में घाव हो गए हों तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सिर की सफाई और भी ज़रूरी हो जाती है। इसके लिए साधारण शैंपू के बजाय बेबी शैंपू का इस्तेमाल करें(डॉ. अप्रतिम गोयल,सेहत,नई दुनिया,नवम्बर तृतीयांक 2011) । 


 कल सुबह सात बजे जानिए 


 क्या है प्रोस्टेट ग्रंथि और उसका इलाज़

आगे चलें...

सोमवार, 29 अगस्त 2011

बारिश में डैंड्रफ-फ्री बाल के लिए......

बारिश के दिनों में बालों में डैंड्रफ की समस्या आम है। अगर आपके बालों में डैंड्रफ हो गया है, तो फिर थोडी सी देखभाल से आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं।बरसात के मौसम में बालों को अन्य दिनों के मुकाबले ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। वातावरण में उमस ज्यादा होने के कारण बाल चिपचिपे हो जाते हैं। सिर की त्वचा की ठीक से सफाई न हो पाने के कारण बालों में डैंड्रफ भी हो जाता है। इस समय सिर में गीला डैंड्रफ होता है, जिसकी वजह से सिर में हमेशा खुजली-सी होती रहती है। तेजी से खुजलाने पर सिर की त्वचा में घाव भी हो जाते हैं। इसके अलावा मानसून सीजन में बाल बेजान और कमजोर हो जाते हैं। डैंड्रफ की वजह से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। इसी से बाल अन्य दिनों के मुकाबले इस समय ज्यादा झड़ते हैं। मानसून सीजन में बालों में किसी भी किस्म का हेयर जेल और कंडीशनर लगाने से बचना चाहिए। इस समय बालों में मेहंदी लगाना उपयुक्त रहता है। इससे सिर की त्वचा में विद्यमान अतिरिक्त तेल निकल जाने की वजह से त्वचा साफ हो जाती है। क्या करें जब हो जाए डैंड्रफ डैंड्रफ की वजह से बालों में खुजली होती है, लेकिन इससे बचने के लिए बालों में तेजी से ब्रश या कंघी न करें। बाल धोने से पहले सिर की त्वचा पर और बालों में धीरे-धीरे कंघी करें। बारिश के दिनों में बाल चिपचिपे हो जाते हैं, जिसकी वजह से उनमें डैंड्रफ हो जाता है, इस वजह से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और वे झड़ने लगते हैं। इससे बचने के लिए सप्ताह में तीन बार बालों को शैंपू करें। बारिश के दिनों में बाहर जाते समय छतरी लेकर जाएं, जिससे सिर गीला न हो। स्ट्रेस से बचें। 

नियमित योगा और मेडिटेशन करें। बारिश के दिनों में हेयर स्टाइलिंग और हेयर एक्सेसरीज से बचें। इस समय अपने बालों में जेल, हेयर स्प्रे और हार्श कलर आदि का इस्तेमाल न करें। अगर आपके बालों में डैंड्रफ है, तो उसे ऐसे ही धोने की बजाय अपने सिर पर दही से मालिश करें और दही को कुछ देर लगा रहने दें। इसके बाद एंटी डैंड्रफ शैम्पू से बालों को धो लें। बारिश के मौसम में सिर धोने से पहले सिर की त्वचा की मालिश करने के बाद हॉट टॉवेल थेरेपी लेना फायदेमंद रहता है। बालों में तेल अच्छी तरह मिलाने के लिए धीरे-धीरे कंघी करना ठीक रहता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन तेज होता है और सिर की त्वचा क्लीन होती है। इसका एक लाभ यह होता है कि डैंड्रफ की समस्या दूर होती है। अगर डैंड्रफ की वजह से सिर में खुजली हो रही हो, तो नीम का तेल लगाना चाहिए। इससे इस सीजन में होने वाला फंगल इंफेक्शन भी ठीक होता है। बाल धोने के लिए अच्छी किस्म के हर्बल एंटी डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल हफ्ते में दो-तीन दिन करें। बाल रफ हैं तो शैंपू के बाद बाल में कंडीशनर लगाएं। कंघी करने से पहले उसे तौलिए से सुखा लें। इस मौसम में बालों की स्ट्रेटनिंग और कलरिंग न कराएं, क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाले कैमिकल से बाल रूखे और बेजान तो होंगे ही, इसमें डैंड्रफ भी होगा। 

हेल्दी डाइट लें। अपने आहार में अधिक घी, मसाले, मीठे और ऑयली फूड का इस्तेमाल न करें। संतुलित और पौष्टिक आहार लें। अपने आहार में विटामिन ई, प्रोटीन और कैल्शियम युक्त चीजों का इस्तेमाल करें। अपनी प्रतिदिन की डाइट में दूध, दही और स्प्राउट्स का इस्तेमाल करें। इससे बाल मजबूत और स्वस्थ रहेंगे। डैंड्रफ के कारण सिर की त्वचा की देखभाल में कमी धूल, स्मोकिंग और किसी खास शैंपू से एलर्जी हार्मोनल असंतुलन समुचित पोषण की कमी हेयर कलर और कलर में इस्तेमाल होने वाले कैमिकल हार्श शैंपू का प्रयोग मौसम में होने वाला बदलाव मानसिक तनाव इन्हें भी आजमाएं ऑलिव ऑयल बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह बेजान हो चुके डिहाइड्रेटेड और डैमेज्ड बालों को मॉइश्चराइज्ड करके चमकीला बनाता है। स्कैल्प ट्रीटमेंट के लिए भी यह उपयोगी है। यह बालों से डैंड्रफ भगाता है। इसमें मौजूद ओमेगा फैटी एसिड बेजान बालों में नयी जान फूंकता है, इसलिए खाने में इसका प्रयोग जरूर करें। बालों में गुनगुने ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करना लाभदायक होता है। 

बालों के लिए शहद बेहद लाभदायक है। इसमें विटामिन के अलावा कॉपर, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भी पाए जाते हैं। इसमें एंटी बैक्टीरियल और एंटी एलर्जिक गुण भी होते हैं। यह डैंड्रफ दूर करता है। आधा कप शहद में छोटा चम्मच एक्स्ट्रा वर्जन ऑलिव ऑयल मिलाएं। इस मिक्सचर को अपने बालों में लगाएं। इसे आधे घंटे तक तौलिए से ढक कर रखें। इसके बाद बालों को शैंपू करें। यह डैंड्रफ के लिए बेहद कारगर है। (आदिनाथ रिसर्च केयर की डॉ. स्मिता से बातचीत पर आधारित आलेख राजलक्ष्मी त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत,हिंदुस्तान,दिल्ली,24.8.11)

आगे चलें...

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

हेयर ट्रांसप्लांट दिलाता है गंजेपन से छुटकारा

सौरव गांगुली, हर्षा भोगले और शेन वार्न में क्या समानता है? ज़ाहिर है तीनों क्रिकेट से जुड़े हैं! लेकिन इसके अलावा सभी बाल की समस्या से परेशान रहे हैं और मज़े की बात यह कि इन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट से अपनी खोई खूबसूरती वापस पा ली हैं। ट्रांसप्लांट से पहले और बाद के उनके बालों में फर्क करना कठिन है। उनके बाल पहले की तरह घने और सुंदर हो गए हैं। हेयर ट्रांसप्लांट का चलन नया नहीं है। इसमें सिर के अन्य हिस्सों (डोनर साइट) जैसे कि सिर के पीछे और बगल के हिस्सों से हेयर फॉलिकल्स लेकर गंजे हिस्सों में लगाया जाता है। परंतु ट्रांसप्लांट की आधुनिक तकनीक पुरानी तकनीक से परिणाम के दृष्टिकोण से बहुत प्रभावी है। इसमें बेहद आधुनिकता के साथ उपचार होता है और मरीज़ के लिए संतोषप्रद परिणाम साफ नज़र आते हैं। ये हैं तकनीकें फॉलिक्युलर यूनिट हेयर ट्रांसप्लांटेशन (एफयूएचटी), फॉलिक्युलर यूनिट से परेशान एक्सट्रैक्शन (एफयूएएई) और बॉडी यूनिट हेयर ट्रांसप्लांटेशन (बीएचटी)। एफयूएचटी एक शल्य प्रक्रिया है। इसमें स्थायी डोनर एरिया से सिर की बाल वाली पट्टी निकाल ली जाती है। पट्टी का जख़्म भरने के लिए सर्जिकल स्टेपल इस्तेमाल किए जाते हैं, जो बाद में खुद घुल जाते हैं। इसके बाद बड़ी की गई पट्टी से एक-एक फॉलिक्युलर यूनिट ग्राफ्ट को विभाजित (डायसेक्ट) कर दिया जाता है। इस बीच सिर के गंजे हिस्से पर बारीक चीरे लगाए जाते हैं जिनमें निकाले गए फॉलिकल्स को लगा (ग्राफ्ट कर) दिया जाता है। चूँकि काम उस्तरे से होता है इसलिए लोकल एनेस्थेसिया दिया जाता है। चीरे भरने में करीब एक सप्ताह लग जाता है और ट्रांसप्लांट की गई हेयर फॉलिक्युलर यूनिट को उनके नए स्थान पर अच्छी तरह "लॉक" कर दिया जाता है। ट्रांसप्लांटेशन की इस तकनीक के शानदार नतीजे दिखते हैं। उगने वाले नए बाल बुढ़ापे तक साथ देते हैं। नए बाल प्राकृतिक हैं लिहाजा सधे हुए हेयर स्टाइलिस्ट भी कोई फर्क नहीं कर पाते हैं। दूसरा उपचार है एफयूएसई। इसमें टाँके नहीं लगते और बहुत कम शल्य प्रक्रिया की ज़रूरत पड़ती है। यह सुरक्षित है और इसमें एक-एक हेयर फॉलिक्युलर यूनिट को निकाले जाने का भय नहीं है। इसमें ग्राफ्ट वाली त्वचा को एक स्तर तक सूक्ष्म लेकिन तेज़ माइक्रो पंचेज से अलग किया जाता है। इसके बाद एक-एक फॉलिक्युलर यूनिट को अलग किया जाता है। अंत में,फॉलिक्युलर यूनिट को ग्राहक बाल्ड एरिया में बड़ी नर्मी से लगा दिया जाता है। आधुनिक तकनीकों द्वारा उपचार के कारण भर्ती नहीं होना पड़ता है। मरीज़ उपचार के दिन ही वापस घर जा सकता है। कुछ मामलों में मरीज़ के सिर पर इतने बाल नहीं होते कि ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सके पर उनके शरीर पर पर्याप्त बाल होते हैं। इन मामलों में हेयर ट्रांसप्लांट की दूसरी तकनीक-बीएचटी कामयाब है। इसमें सिर के अलावा अन्य डोनर साइट जैसे कि छाती,दाढ़ी,कांख,टांग आदि से हेयर फॉलिकल्स लेकर सिर के गंजे हिस्से पर लगा दिए जाते हैं। इस उपचार से पुनः भरपूर घने बाल उगने के प्रमाण हैं। किसी सर्जरी की तरह ट्रांसप्लांट के बाद कुछ काम करने और कुछ खास नहीं करने की ख़ास हिदायतें दी जाती हैं। ट्रांसप्लांट के बाद कई दिनों तक बहुत आराम से बालों और सिर को धोने की हिदायत दी जाती है। यह काम हल्के या बेबी शैम्पू से किया जाना चाहिए। इस बीच,नियमित रूप से चिकित्सक से मिलते रहना भी ज़रूरी है। ये तकनीकें बहुत आधुनिक हैं और अच्छे हेयर क्लिनिक में उपलब्ध हैं। आजकल कई झोलाछाप डॉक्टर भी बेहद कम दाम पर यह उपचार कर रहे हैं लेकिन ये संदिग्ध हैं। इनसे बाल उगने की बात तो दूर,मरीज़ों को ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है। इसलिए,मरीज़ों के लिए यही उपयुक्त होगा कि वे केवल प्रशिक्षित हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन के हाथों किसी विश्वस्त क्लिनिक में यह उपचार करवाएं जो आधुनिक हों और जहां स्वास्थ्यकर परिवेश में ट्रांसप्लांट किया जाए। हम सभी घने बालों की अहमियत समझते हैं। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। लोगों पर आपका अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसलिए,यदि आप सौरभ गांगुली या शेन वार्न की तरह मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं या किसी अन्य प्रोफेशन में हैं तो आप हेयर ट्रांसप्लांट की इन कारगर तकनीकों से अपने गंजेपन से छुटकारा पा सकते हैं(डॉ. अरविंद पोसवाल,सेहत,नई दुनिया,अगस्त प्रथमांक 2011)।

आगे चलें...

शुक्रवार, 1 जुलाई 2011

बरसात में सामान्य से अधिक झड़ते हैं बाल

गर्मी इतनी है कि मन करता है गंजे हो जाएं। इस मौसम में चिपचिप पसीने और उलझे रूखे बालों की वजह से कई बार यही डायलॉग जबान पर आता है। गर्मी और बारिश के जॉइंट वेंचर इस मौसम में हम आपको बता रहे हैं कि अपनी रेशमी या रूखी, जैसी भी हों जुल्फें,उन्हें कैसे लुक में ढालें, उनकी देखभाल कैसे करें।

कहीं भी रहें कूल
क्लीयोपेट्रा सलून की एक्सपर्ट हरलीन कथूरिया की सलाह है कि इस मौसम में गर्ल्स तीन ऑप्शन ट्राई कर सकती हैं। ये कैजुअल, प्रफेशनल और पार्टी, तीनों कैटिगरी के लिए फिट हैं।खास बात ये है कि एक ही तरह के हेयर कट से ये तीनों स्टाइल अपनाई जा सकती हैं।

फ्रैश फ्लावर वीविंग
साइड बन बनाकर इसमें फूलों को सजाया जाता है। इसके अलावा खुले बालों को एक साइड बांधकर उसमें फूल फिक्स कर सकते हैं। 

पार्टी या आउटडोर इवेंट के लिए फ्रेश ऑप्शन
स्कैल्प ऑयली हो तो
स्ट्रैंड्स के हेयर स्टाइलिस्ट राजेंद्र कुमार ने बताई ऑयली स्कैल्प वालों के लिए टिप्स। उनके मुताबिक ऐसा होने पर बाल बांधने के कुछ ही देर बाद बहुत नमी सी महसूस होने लगती है। इसकी वजह से अनईजी भी फील करने लगते हैं। इससे बचने के लिए विद इमो कट हेयरस्टाइल अपनाना चाहिए। इसमें वॉल्यूम नहीं होता और गर्मी नहीं लगती। एक और बात, आजकल यह स्टाइल ट्रेंड में भी है।

फ्रेंच स्टाइल
हेडमास्टर्स के हेयर स्टाइलिस्ट नीरज कुमार के मुताबिक इस सीजन में हाई पफ के साथ हाई पोनी तो ज्यादातर गर्ल्स बना रही हैं। लेकिन काफी देर बालों को कसकर बांधने से उनकी जड़ें कमजोर हो सकती हैं। ऐसे में टाइट हेयर के बजाय इमो कट या फ्रेंचिस कट लें। उसके साथ एक साइड से बालों की फ्रेंच या सिंपल चोटी बना सकते हैं।

डिजाइनर टाई
प्रोफेशनल दुनिया के लिए बेस्ट चॉइस। बालों को ऊपर की तरफ पुश करते हुए टाइट ढंग से बांधें। ड्रेस की बैक साइड और चेहरा, दोनों पर ही बाल नहीं गिरते।इस स्टाइल में फॉर्मल लुक भी आता है।

कैजुअल हेयर स्टाइल
इसे ईवनिंग फॉर्मल हेयर स्टाइल भी कहा जाता है। इसे कर्ली और स्ट्रेट दोनों तरह के पैटर्न के साथ अपनाया जा सकता है। बालों को लूज ढंग से टाई किया जाता है। बाल कर्ली करवाएं तो ज्यादा बेहतर क्योंकि इसमें गर्मी कम लगेगी।

रफ इज राइट
बाल संवारना कई लोगों को फुरसत का काम लगता है। मगर जिनके पास टाइम नहीं या जिन्हें सिंपल हेयर स्टाइल पसंद है, उनका क्या? लॉ रियल सलून के हेयर स्टाइलिस्ट के मुताबिक समर्स में अगर आप घर पर जूड़ा बनाकर रहती हैं, तो बाहर जाने पर ऐसा क्यों नहीं कर सकतीं। शॉर्ट या लॉन्ग हर तरह के हेयर में ये स्टाइल अच्छी लग सकती है और कुछ बिखरे सुलझे बाल बन को क्रिएटिव लुक देते हैं(पूजा परमार,दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,29.6.11)।
नोटःसंलग्न आलेख सेहत,नई दुनिया,जून 2011 चतुर्थांक से।

आगे चलें...

शनिवार, 11 जून 2011

मंगलवार, 3 मई 2011

प्रसव के बाद बालों का झड़ना

आदिकाल से यह कहा जाता रहा है कि बच्चे को जन्म देना एक स्त्री का नया जन्म होता है। बच्चे के पैदाइश की पूरी प्रक्रिया में स्त्री के शरीर में कई प्रकार के परिवर्तन होते हैं। प्रायः विवाह के पश्चात ससुराल वालों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का एक मनोवैज्ञानिक दबाव महिलाओं पर होता है। साथ ही नई दिनचर्या में स्वयं को ढालना भी एक बड़ा काम होता है। इस समय स्त्री अपने स्वास्थ्य और सौंदर्य का ठीक से ध्यान नहीं रख पाती, परंतु प्रायः जब वह गर्भवती होती है तो परिवार के सभी सदस्य उसका अधिक ध्यान रखने लगते हैं। पहले तीन महीने फोलिक एसिड की गोली एवं उसके बाद आयरन एवं कैल्शियम की गोलियाँ डॉक्टर की सलाह पर गर्भावस्था में ली जानी चाहिए। इससे शिशु के साथ ही बालों के स्वास्थ्य पर भी अनुकूल प्रभाव पड़ता है। साथ ही गर्भावस्था के समय स्त्रावित होने वाले हार्मोन के कारण भी बालों का स्वास्थ्य सुधरता है। उपरोक्त कारणों से गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को प्रायः बालों की समस्या नहीं होती। प्रसव के पश्चात प्रसूता स्त्री एवं परिवार के अन्य सदस्य प्रायः नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने लगते हैं।
कई बार प्रसूता नौकरी-पेशा हो तो समस्या और भी गंभीर हो जाती है। वह बच्चे की देखरेख और नौकरी की व्यस्तता में अपने स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रख पाती। ऐसी स्थिति में प्रसव के पश्चात अत्यधिक बाल झड़ने लगते हैं, जिसका प्रमुख कारण आयरन, कैल्शियम आदि पोषक तत्वों का अभाव एवं उचित आराम का न मिल पाना है। ऐसी समस्या से निपटने हेतु सबसे पहले इस बात का ध्यान रखें कि प्रसव के समय आपके हिमोग्लोबिन का स्तर साढ़े बारह ग्राम (१२.५ ग्राम) से कम न हो। प्रसव के पश्चात भी दूध का सेवन सुबह-शाम अवश्य करें। हरी सब्जियाँ प्रचुर मात्रा में लें। गुड़ का एक छोटा टुकड़ा रोज खाएँ। नीबू-पानी रोज पीएँ। जब तक गर्भाशय पूर्व की स्थिति में नहीं आ जाता, तब तक अपना विशेष ध्यान रखें। सप्ताह में दो से तीन बार उचित आयुर्वेदिक तेल बालों की जड़ों में लगाएँ। आवश्यक हो तो आयरन की गोली प्रसव के बाद भी लें।
इस संबंध में एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कई परिवारों में बेटी को जन्म देने वाली माता की प्रसव के पश्चात् उपेक्षा की जाती है जिससे नव-प्रसूता में बहुत अधिक दुर्बलता आ जाती है। उन्हें चाहिए कि नवजात बेटे और बेटी में फर्क न करते हुए नवजात एवं नवप्रसूता-दोनों के स्वास्थ्य की उचित देखभाल करें और परिवार में प्रेम तथा सौहार्द का वातावरण बनाए रखें(डॉ. प्रीति सिंह,सेहत,नई दुनिया,अप्रैल 2011 पंचमांक)।

आगे चलें...