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सोमवार, 23 सितंबर 2013

.....ताकि त्वचा रहे खिली-खिली

त्वचा की एलर्जी कई तरह से आपको परेशान कर सकती है। लाल रंग के चकत्ते, रैशेज, काले धब्बे, फुंसियां और दाग, ये सब एलर्जी का ही रूप हैं। अगर सही समय पर एलर्जी पर ध्यान न दिया जाए तो यह विकराल रूप धारण कर लेती है और आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। जानिए,एलर्जी के कारण और इससे बचने के उपायः 

स्किन एलर्जी होने के कई कारण हो सकते हैं। सही खानपान न होने से लेकर प्रदूषण और जीवन-शैली तक आपको एलर्जिक बना सकती है। एलर्जी को पहचानने का सबसे आसान तरीका यह है कि अगर आपकी त्वचा का रंग लाल हो रहा है या फिर उसमें खुजली या रैशेज हो रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप एलर्जी के शिकार होने की कगार पर पहुंच गए हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि शुरुआत में तो एलर्जी कभी-कभी परेशान करती है, लेकिन अगर इस पर ध्यान न दिया जाए तो यह सप्ताह में दो-तीन बार और फिर रोज ही होने लगती है। 

कैसी-कैसी एलर्जी 
कई लोगों को गाय के दूध, मछली या फिर अंडे से एलर्जी हो सकती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जिस खाद्य पदार्थ से आपको एलर्जी हो, उससे जुड़े खाद्य पदार्थ समूह से एलर्जी हो गई हो। ऐसे में उनका सेवन करते ही परेशानी शुरू हो जाती है। पानी में मिले कैमिकल्स आपके चेहरे की झुर्रियों का कारण बन सकते हैं। चूंकि ये शरीर द्वारा सीधे सोख लिए जाते हैं, इसलिए इनसे एलर्जी होने का खतरा भी अधिक होता है। पानी में जब क्लोरीन मिला होता है, तब वह अधिक नुकसानदेह हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि जब भी आप स्विमिंग करें तो उसके बाद साफ पानी से जरूर नहा लें। 

प्रदूषण से बचें 
हवा से भी एलर्जी हो सकती है। पानी के साथ ही प्रदूषण युक्त हवा भी त्वचा को बैक्टीरिया के संपर्क में ले आती है, जिससे एलर्जी होने का खतरा रहता है। टैटू का त्वचा पर बुरा प्रभाव देखा गया है। इस तरह की शिकायतें आजकल आम हैं। युवाओं द्वारा बनवाए जाने वाले अस्थायी टैटू में इस्तेमाल होने वाली खराब स्याही से त्वचा में जलन हो जाती है। 

कपड़ों से भी हो सकती है एलर्जी 
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉं. शेहला अग्रवाल के अनुसार, ‘कपड़ों से भी एलर्जी हो सकती है। कभी-कभी कपड़ों पर इस्तेमाल होने वाला रंग यानी डाई त्वचा में एलर्जी पैदा कर देती है। वाशिंग मशीन में धुले कपड़ों से अगर साबुन ठीक से न निकला हो तो भी इससे त्वचा में खिंचाव आदि की समस्याएं होती हैं। मौसम में बदलाव भी स्किन एलर्जी का कारण हो सकता है। मौसम बदलने से हवा में पोलिन्स की संख्या बढ़ जाती है, जो त्वचा में एलर्जी का मुख्य कारण होती है।’ 

एलर्जी का असर 
एलर्जी से आपको दर्द, खुजली, घाव हो जाना आदि समस्याएं हो सकती हैं। अगर सही समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो आप त्वचा रोग के भी शिकार बन सकते हैं। इसके अलावा कई बार प्लास्टिक की चीजों जैसे नकली आभूषण, बिंदी, परफ्यूम, चश्मे के फ्रेम, साबुन आदि से भी एलर्जी हो जाती है। इस तरह की एलर्जी को कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस कहा जाता है। 

ऐसे दूर करें असर 

-फिटकरी के पानी से प्रभावित स्थान को धोकर साफ करें। जिस स्थान पर एलर्जी हो, वहां कपूर और सरसों का तेल लगाएं। आंवले की गुठली जला कर राख कर लें। उसमें एक चुटकी फिटकरी और नारियल का तेल मिला कर पेस्ट बना लें। इसे लगाते रहें। 

-खट्टी चीजों, मिर्च-मसालों से परहेज रखें। रोज सुबह नींबू का पानी पिएं। 

-चंदन, नींबू का रस बराबर मात्रा में मिला कर पेस्ट बना कर लगाएं।

डॉक्टर कहते हैं 

-ताजे फल, सब्जियों का अधिक सेवन करें। 

-एलर्जी होने पर त्वचा को केवल पानी से धोएं। साबुन या फेसवॉश का प्रयोग न करें। 

-कैलेमाइन लोशन अच्छा है। 

-डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवाएं लें। 

-विटामिन बी, सी से युक्त भोजन लें। 

घरेलू उपाय 

-दही में चुटकीभर हल्दी मिला कर लगाएं। सूखने पर धो दें। 

-चंदन पाउडर में नींबू का रस मिलाएं। इसे एलर्जिक त्वचा पर लगाएं। एलर्जिक एरिया को लगातार ठंडे पानी से धोते रहें। 

-जहां एलर्जी हो गई हो वहां पर ऑलिव ऑयल से मसाज करें। इनसे भी होती है एलर्जी परफ्यूम या खुशबू वाले अन्य उत्पाद लगाने से एलर्जी हो सकती है। इसमें आप रूम स्प्रे, क्लीनर्स, डिटर्जेट को भी शामिल कर सकते हैं। 

-हेयर डाई से भी एलर्जी होने का खतरा रहता है। इसमें पीपीडी होता है, जो एलर्जी कर सकता है। 

-कई बार कपड़ों को रिंकल और सिकुड़न से बचाने के लिए उन पर जो कैमिकल लगाया जाता है, वह भी स्किन एलर्जी कर सकता है। इस तरह की एलर्जी से पीडित लोगों में से अधिकतर फॉर्मलडिहाइड के प्रयोग के कारण एलर्जिक हो जाते हैं। इसका प्रयोग अंडरगार्मेट्स के इलास्टिक में भी होता है, इसीलिए लोगों को रैशेज आदि की समस्याएं हो जाती हैं। ऐसी एलर्जी के प्रारंभिक लक्षणों में आंखों में जलन, रैशेज आदि प्रमुख हैं।

-कॉस्मेटिक भी एलर्जी का कारण हो सकते हैं। आंखों में लालपन से लेकर लाल चकत्ते और दाने तक इनके प्रयोग की वजह से संभव हैं।

नवजातों को भी होती है स्किन एलर्जी 
ऐसा नहीं है कि स्किन एलर्जी से केवल वयस्क या बुजुर्ग ही पीडित होते हों। अक्सर देखा जाता है कि नवजातों को भी ऐसी समस्याएं होती हैं। डाइपर्स के कारण होने वाले लाल रैशेज स्किन एलर्जी की ओर ही इशारा करते हैं। इसके अलावा जन्म के कुछ समय बाद लाल रंग के दाने उभर आना भी एलर्जी का ही रूप है, जो कुछ दिन बाद स्वयं ही ठीक हो जाते हैं(आरती मिश्रा,हिंदुस्तान,दिल्ली,20.9.2013)।

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मंगलवार, 14 अगस्त 2012

एलर्जी में सफाई का रखें ख़ास ध्यान

एलर्जी एक ऐसी बीमारी है, जिसका कारण आमतौर पर समझ में नहीं आता। लेकिन कुछ ऐसे लक्षण तो हैं ही, जो ये बता देते हैं कि आप एलर्जी से पीड़ित हैं। इसके बाद एक ब्लड टेस्ट आपकी मुश्किलें आसान कर सकता है। आइए जानें, क्या है एलर्जी, कैसे पाएं राहत।

रश्मि शर्मा आजकल ऑफिस में बड़े आराम से काम करती हैं और समय पर घर भी चली जाती हैं। लेकिन 10-15 दिन पहले तक ऑफिस में आते ही न केवल वह, बल्कि उनके साथी भी उनसे परेशान होने लगे थे। कभी छींक तो कभी नाक पर रुमाल रखना और फिर बार-बार टॉयलेट जाना। उनकी एक सीनियर ने उन्हें सलाह दी कि तुम्हें एलर्जी हो गई है, डॉक्टर से मिल लो। रश्मि को लगा कि भला इसमें डॉक्टर क्या करेगा, जुकाम लगता है, खुद ही ठीक हो जाएगा। लेकिन आखिरकार उसे अपनी सीनियर की बात माननी पड़ी थी और डॉक्टर के पास जाना पड़ा था। डॉक्टर ने एक ब्लड टेस्ट के बाद कुछ दवाएं दीं, जिसके एक सप्ताह सेवन के बाद ही रश्मि की तबियत तेजी से ठीक होने लगी।

प्रशांत को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि उन्हें क्या हुआ। उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी और अक्सर दम फूलने लगता था। उन्होंने तो एक बार डॉक्टर को भी अपनी समस्या दिखा ली थी, लेकिन कोई खास लाभ नहीं हो रहा था। एक दिन उनके घर एक अतिथि आए, जिन्हें उनकी समस्या का कारण उनके घर में धमा-चौकड़ी मचा रहे दो पालतू कुत्ते लगे। प्रशांत अपने अतिथि की बात मानने को तैयार नहीं थे, क्योंकि वे लगभग तीन महीने ही पहले घर लाए उन कुत्तों से काफी प्यार करने लगे थे। फिर जब वे डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि उन्हें कुत्तों की वजह से ही एलर्जी है। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने कुत्तों को घर से बाहर निकाला और देखते-देखते उन्हें तेजी से स्वास्थ्य लाभ होने लगा।

एलर्जी बीमारी ही ऐसी है, जो बीमारी लगती नहीं, लेकिन एक बार लग जाए तो परेशान कर देती है। हर व्यक्ति के शरीर की अपनी क्षमता होती है और उसी के अनुरूप वह बाहरी चीजों के साथ तालमेल बिठा पाता है। लेकिन कुछ तत्व ऐसे होते हैं, जिसके साथ शरीर तालमेल नहीं बिठा पाता। ऐसे तत्वों को एलर्जेट कहते हैं, जो एलर्जी का कारण बनते हैं। अगर आपको खुशबू पसंद नहीं है तो फूल से भी एलर्जी हो सकती है। धूल-मिट्टी पसंद नहीं है तो धूल-मिट्टी भी आपकी एलर्जी का कारण बन सकती है। यहां तक कि आपका पालतू जानवर भी आपको एलर्जी की तकलीफ देकर सता सकता है। लेकिन समय पर इसकी पहचान हो जाए तो आप इससे राहत पा सकते हैं।


जैरथ एलर्जी टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट सेंटर के प्रमुख डॉ. प्रशांत जैरथ कहते हैं, ‘अगर एलर्जी की पहचान समय पर हो जाए तो इसका इलाज संभव है।’ वे कहते हैं कि अब तो इसकी पहचान भी काफी आसान हो गई है। केवल एक ब्लड टेस्ट से यह पता लग जाता है कि एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति को किस कारण एलर्जी है। यह पता लग जाने के बाद इलाज काफी आसान हो जाता है। इस इलाज के तहत पीड़ित व्यक्ति को कुछ समय के लिए दवा खानी पड़ती है, जिससे उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो जाती है और रोगी की एलर्जी की समस्या भी ठीक हो जाती है। डॉ. जैरथ खास सलाह देते हैं कि एलर्जी के रोगी को लापरवाही बिल्कुल नहीं बरतनी चाहिए। 



एक शोध कहता है कि अपने देश में सबसे अधिक लोग डस्ट एलर्जी से परेशान हैं। यानी उन्हें डस्ट से एलर्जी होती है। आखिर रश्मि के साथ भी ऐसा ही तो था। एलर्जी से परेशान कुल लोगों में ऐसे लोग 80 प्रतिशत हैं। इसके बाद पालतू जानवरों से लोगों को काफी एलर्जी होती है। ऐसे लोग लगभग 15 प्रतिशत बताए जाते हैं। खाने-पीने की चीजों से बच्चों को एलर्जी की समस्या अधिक होती है। फूड एलर्जी से 6 से 8 प्रतिशत बच्चों परेशान रहते हैं। इसके अलावा हेयर डाई से भी एलर्जी होती है। मौसमी एलर्जी भी किसी व्यक्ति को खास मौसम में परेशान कर सकती है। इसलिए आपको एलर्जी हो तो उसके कारणों को पहचानने की कोशिश करें और समय रहते डॉक्टर से मिलें, ताकि आप इस बीमारी से राहत पा सकें। 



इनसे हो सकती है एलर्जी 

- खाद्य पदार्थ : डेयरी उत्पाद, मूंगफली, मक्का, अंडा, मछली, सोयाबीन, नट्स आदि। 

- दवाएं : टेट्रा साइक्लीन, पेंन्सिलीन, डिलानटिन, सल्फोनामाइड्स। 

- पर्यावरणीय कारण : पराग कण, फफूंद, धूल, आर्द्रता आदि। 

- पालतू जानवर : कुत्ते, बिल्ली आदि। 

- रसायन : कोबाल्ट, निकिल, क्रोमियम आदि। 

क्या करें 
- जिन लोगों को धूल से एलर्जी है, वे कार में सफर के समय खिड़कियां बंद रखें और एयर कंडीशन का उपयोग करें। यह हवा को फिल्टर कर ठंडी और सूखी बनाता है। 

- बरसात में घर में और उसके आसपास गंदगी न पनपने दें। 

- ताजा और स्वच्छ भोजन करें। 

- घर में हवा आने दें। 

- अगर एयर कंडीशन का प्रयोग करें तो यह सुनिश्चित करें कि कमरे में आद्र्रता कम हो। फिल्टर थोड़े-थोड़े समय बाद बदलते रहें। 

- सफाई का विशेष ख्याल रखें। घर में कहीं भी धूल इकट्ठी न होने दें। 

- किताबों की आलमारियों की समय-समय पर सफाई करते रहें। 

- घर में लकड़ी का फर्नीचर हो तो उसकी सफाई का विशेष ख्याल रखें। उसमें दीमक न लगने दें। 

- घर में कूड़ा-कचरा न इकट्ठा करें। 

- घर के अंदर नमी न पनपने दें(हिंदुस्तान,दिल्ली,26.7.12)। 

अद्यतनःयह आलेख दैनिक भास्कर भूमि में दिनांक 17.8.12 को प्रकाशित किया गया है जिसे इस लिंक पर देखा जा सकता है।

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शुक्रवार, 16 मार्च 2012

त्वचा एलर्जीःलक्षण,कारण और निवारण

त्वचा आपकी खूबसूरती का आईना है। आकर्षक दिखने के लिए आप जितने भी जतन करती हैं, वे सब कहीं न कहीं त्वचा को जवां और कसावयुक्त बनाने के लिए किए जाते हैं। लेकिन अपनी स्किन को एलर्जी से बचाने के लिए आप क्या करती हैं? क्या आप जानती हैं कि एलर्जी से आपकी त्वचा बेहद खराब और बदसूरत हो सकती है? किन कारणों से होती है त्वचा में एलर्जी और कैसे इनसे बचें, बता रही हैं आरती मिश्रः

डर्मेटोलॉजिस्ट शेहला अग्रवाल के अनुसार, निम्न कारणों से भी हो सकती है एलर्जी- 

-कपड़ों से भी एलर्जी हो सकती है। 

 -कभी-कभी कपड़े पर इस्तेमाल होने वाला रंग यानी डाई, त्वचा में एलर्जी पैदा कर देती है। इससे त्वचा में खिंचाव आदि की समस्याएं होती हैं। 

-टैटू का त्वचा पर बुरा प्रभाव देखा गया है। इस तरह की शिकायतें आजकल आम हैं। दरअसल, अगर टैटू में इस्तेमाल होने वाली स्याही की क्वॉलिटी खराब हो तो इससे त्वचा में जलन होने लगती है। 

-मौसम में बदलाव भी एलर्जी का कारण हो सकता है। मौसम बदलने से हवा में पोलिन्स की संख्या बढ़ जाती है, जो त्वचा में एलर्जी का मुख्य कारण होती है। 

-अगर हेयर कलर में पीपीडी की मात्र ज्यादा हो तो उससे भी एलर्जी की संभावना बढ़ जाती है। 

कैसा होता है एलर्जी का असर 
एलर्जी से कुछ लोगों को कोई परेशानी नहीं होती, जबकि कुछ को उस स्थान पर दर्द, खुजली, छाले पड़ना, छाले फूटकर पानी निकलना, घाव हो जाना आदि समस्याएं हो जाती हैं। अगर सही समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए तो त्वचा रोग भी बन सकते हैं। इसके अलावा कई बार प्लास्टिक की चीजों जैसे नकली आभूषण, बिंदी, परफ्यूम, चश्मे के फ्रेम, साबुन आदि से भी एलर्जी हो जाती है। इस तरह की एलर्जी को कॉन्टेक्ट डर्मेटाइटिस कहा जाता है। 

ऐसे बच सकती हैं एलर्जी से 
-घर से बाहर निकलें तो चेहरे और बाजुओं को ढकें। सन्सक्रीन जरूर लगाएं। 

-चेहरे को दिन में कई बार पानी से धोएं। इससे चेहरे पर लगी धूल-मिट्टी हट जाएगी। 

-ऐलोवेरा जेल या ऐलोवेरा से बनी क्रीम आदि का ही प्रयोग करें। 

-अगर कामकाजी हैं तो शाम को भी स्नान करें। इससे धूल आदि से होने वाली एलर्जी नहीं होगी। 

-फिल्टर्ड पानी का ही प्रयोग करें। 

अगर आपकी त्वचा का रंग लाल हो रहा है या फिर उसमें खुजली या रैशेज हो रहे हैं तो यह सब एलर्जी होने के लक्षण हैं। त्वचा में एलर्जी किसी को भी हो सकती है। एलर्जी का मुख्य कारण हमारी जीवनशैली और दिनचर्या है। साथ ही प्रदूषण जैसे कारक भी एलर्जी का कारण बन सकते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि खाने से, हवा से, पानी से, प्रदूषण से त्वचा एलर्जी का शिकार हो जाती है। चलिए, पहले ये जान लेते हैं कि एलर्जी होने के प्रमुख कारण कौन-कौन से हैं- 

हवा से होती है एलर्जी 
आप ऑफिस जाती हैं, बाजार या फिर बच्चों को स्कूल छोड़ने-लाने के लिए जब भी घर से बाहर निकलती हैं तो सीधे तौर पर हवा के संपर्क में आती हैं। प्रदूषण युक्त हवा आपकी त्वचा को बैक्टीरिया के संपर्क में ले आती है, जिससे एलर्जी होने का खतरा रहता है। इसके अलावा जिन घरों में अधिक धूम्रपान किया जाता है, वहां के लोगों को स्किन एलर्जी और एस्थमा जैसी बीमारियां होने का खतरा कई गुना अधिक रहता है। 

भोजन से भी होती है एलर्जी 
कई लोगों को किसी खास खाद्य पदार्थ के कारण एलर्जी होती है। जैसे कई बार बच्चों को गाय के दूध, मछली या फिर अंडे से एलर्जी हो जाती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको किस चीज से एलर्जी हो रही है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि जिस खाद्य पदार्थ से आपको एलर्जी हो, उससे जुड़े खाद्य पदार्थ समूह से एलर्जी हो। 

पानी से एलर्जी 
पानी को यूं तो जीवन कहा जाता है, पर अगर यह साफ नहीं है तो कई बीमारियों का जनक बन जाता है। इसमें मिले केमिकल्स आपके चेहरे की झुर्रियों का कारण बन सकते हैं। चूंकि ये शरीर द्वारा सीधे सोख लिए जाते हैं, इसलिए इनसे एलर्जी होने का खतरा भी अधिक होता है। पानी में जब क्लोरीन मिला होता है, तब वह अधिक नुकसानदेह हो जाता है। इसलिए कहा जाता है कि जब भी आप तैराकी करें तो उसके बाद साफ पानी से जरूर नहा लें। 

प्रदूषण से एलर्जी 
वातावरण में बढ़ता प्रदूषण एलर्जी होने के मुख्य कारणों में गिना जाता है। यह समस्या शहरों में अधिक है, क्योंकि यहां वायु प्रदूषण अधिक होता है, जिसके आप सीधे संपर्क में रहती हैं। इसके अलावा जल प्रदूषण भी एलर्जी का कारण बनता है। खराब जल का प्रयोग करने से यह शरीर को काफी नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें त्वचा में जलन, लाल चकत्ते पड़ना और फुंसियों जैसे दाने होना आम बात है। कुछ लोगों की त्वचा बेहद सेंसिटिव होती है। उन्हें किसी विशेष चीज के संपर्क में आने पर खुजली, जलन, दाने हो जाते हैं। 

अगर एलर्जी है तो ये मत करिए.. 
-त्वचा में खुजली न करें। 

-जिस साबुन का आप नियमित रूप से इस्तेमाल कर रही हैं, उसका इस्तेमाल करना बंद कर दें। साबुन के कारण त्वचा रूखी हो जाती है और खुजली बढ़ जाती है। 

-रोज नहाएं। डॉक्टर की सलाह से साबुन का इस्तेमाल करें। 

-शरीर को खुली हवा लगने दें। 

-सबसे महत्वपूर्ण बात, अगर आपको पता चल गया है कि किस चीज से आपको एलर्जी होती है तो उससे दूर रहें। 

-एलर्जी होने पर इन घरेलू उपायों को अपनाएं।

-फिटकरी के पानी से प्रभावित स्थान को धोकर साफ करें। -कपूर और सरसों का तेल लगाती रहें। 

-आंवले की गुठली जलाकर राख कर लें। उसमें एक चुटकी फिटकरी और नारियल का तेल मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे लगाती रहें। 

-खट्टी चीजों, मिर्च-मसालों से परहेज बनाए रखें। 

-रोज सुबह नीबू का पानी पिएं। 

-चंदन, नीबू का रस बराबर मात्र में मिलाकर पेस्ट बनाकर लगाएं। 

डॉक्टर की राय अपनाएं, एलर्जी भगाएं.. 
-फल-सब्जियों का खूब सेवन करें। रोज 1 खजूर लें। सलाद खाएं। 

-एलर्जी होने पर त्वचा को केवल पानी से धोएं। साबुन या फेसवॉश का प्रयोग न करें। 

-कैलेमाइन लोशन फायदेमंद रहता है। 

-डॉक्टर की सलाह से एंटी-एलर्जिक दवाएं लें। अगर हाथों में एलर्जी हो गई है तो नाखूनों को छोटा रखें और बर्तन साफ करने या कपड़े धोने से पहले कॉटन के दस्ताने पहनें। 

एलर्जी के लक्षण 
-त्वचा का रंग बदलना, जैसे लाल धब्बे पड़ना। 

-खुजली होना। -फुंसी जैसे दाने हो जाना। 

-रैशेज या क्रैक पड़ना। 

 -जलन होना। 

 -त्वचा में खिंचाव पैदा होना -छाले पड़ना(हिंदुस्तान,दिल्ली,15.3.12)

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