एनीमिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
एनीमिया लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 10 सितंबर 2012

एनीमिया का यौगिक उपचार

एनीमिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर में खून की कमी होती है। डॉक्टर इसके लिए अनेक दवाएं खिलाते हैं लेकिन अपनी दिनचर्या में आसन-प्राणायाम को शामिल कर आप इस बीमारी से तो मुक्ति पा ही सकते हैं, शरीर को मजबूत भी बना सकते हैं। 

जब शरीर के रक्त की लाल कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक पदार्थ का स्तर सामान्य से नीचे हो जाता है तो उस अवस्था को एनीमिया के नाम से जाना जाता है। जब हीमोग्लोबिन की मात्र कम हो जाती है तो रक्त की ऑक्सीजन वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे उत्साह में कमी, थकान, बदन दर्द, सिर दर्द, चक्कर आना, अरुचि जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। 

योग के अभ्यास से एनीमिया की समस्या का समाधान सरलता से किया जा सकता है। इस समस्या का मूल कारण मन तथा भावनाओं का असंतुलन है जो अंत में शरीर को कमजोर एवं रोगी बना देता है। योग शरीर, मन एवं भावनाओं को स्वस्थ कर सम्पूर्ण स्वास्थ्य की रक्षा करता है। इसके लिए कुछ यौगिक क्रियाएं हैं जिनका अभ्यास कर आप एनीमिया की समस्या में राहत पा सकते हैं। 

आसन 
एनीमिया के रोगी में कमजोरी तथा उदासी के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं। इसलिए उन्हें कठिन तथा अधिक मात्र में आसनों के अभ्यास की सलाह नहीं दी जाती है। इस स्थिति में प्रारम्भ में सूर्य नमस्कार के एक या दो चक्र, वज्रासन, पवनमुक्तासन, मर्करासन, तितली आसन, गोमुख आसन, मण्डूक आसन आदि का ही अपनी क्षमता के अनुसार अभ्यास करना चाहिए। जैसे-जैसे स्थिति में सुधार होता जाए, अभ्यास में धीरे-धीरे धनुरासन, भुंजगासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन जैसे कठिन आसनों को जोड़ा जा सकता है। 

तितली आसन की अभ्यास विधि 
दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठ जाइए। फिर, दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर इनके तलवों को आपस में सामने की ओर इस प्रकार सटाइए कि एड़ियां जननेन्द्रिय के पास में या नीचे आ जायें। दोनों हाथों से पैरों के पंजों को दृढ़तापूर्वक पकड़कर घुटनों को जमीन से ऊपर उठाइए और नीचे कीजिए। यह क्रिया सुविधानुसार 25 से 50 बार कीजिए। फिर वापस पूर्व स्थिति में आइए।

प्राणायाम 
एनीमिया के रोगी के लिए सरल कपालभाति के साथ नाड़ीशोधन तथा भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास बहुत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अभ्यास से शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मानसिक शांति तथा एकाग्रता भी प्राप्त होती है। 

भ्रामरी प्राणायाम की अभ्यास विधि 
ध्यान के किसी भी आसन में रीढ़, गला व सिर को सीधा कर बैठ जाएं। एक दीर्घ श्वास अंदर लेकर कानों को हाथ के अंगूठे या किसी भी अंगुली से सहजता के साथ बंद कर लें। अब नाक या गले से भौंरे जैसी आवाज निकालें। आवाज निकालते समय प्रश्वास नियंत्रित ढंग से बाहर निकलने दें। यह भ्रामरी प्राणायाम की एक आवृत्ति है। इसकी दस-पन्द्रह आवृत्तियों का अभ्यास करें। 

अन्य उपाय 
रोज सुबह-शाम टहलने जाएं। प्रात:काल नंगे बदन धूप में बैठें। नियमित रूप से सारे शरीर की मालिश करें। ठंडे पानी से स्नान करें और तौलिये से बदन को इस प्रकार रगड़ें कि त्वचा हल्की लाल हो जाए। प्रतिदिन योगनिद्रा एवं ध्यान करें। नींद भी भरपूर और नियंत्रित होकर लें। मानसिक तनाव और चिंता को विवेक द्वारा दूर करें। 

आहार 
गेहूं, चना, मोठ, मूंग को अंकुरित कर नींबू मिलाकर सुबह नाश्ते में खाएं। मूंगफली के दाने गुड़ के साथ चबा-चबा कर खाएं। पालक, सरसों, बथुआ, मटर, मेथी, हरा धनिया, पुदीना तथा टमाटर खाएं। फलों में पपीता, अंगूर, अमरूद, केला, सेब, चीकू, नींबू का सेवन करें। अनाज, दालें, मुनक्का, किसमिस, गाजर तथा पिंड खजूर दूध के साथ लें(कौशल कुमाह,हिंदुस्तान,दिल्ली,6.9.12)।

आगे चलें...

सोमवार, 26 सितंबर 2011

आपकी थकान का कारण एनीमिया तो नहीं?

शरीर में रक्त की कमी होने वाला रोग एनीमिया ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसकी अधिकांश महिलाएं शिकार हो जाती हैं। आंखों के नीचे घेरे, थकान आदि इसके लक्षण हैं।

हमारे शरीर को हेल्दी व फिट रहने के लिए अन्य पोषक तत्वों के साथ काफी मात्र में आयरन की जरूरत होती है, क्योंकि आयरन ही हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिकाओं) का निर्माण करता है। ये कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है। इसलिए आयरन की कमी का अर्थ है शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी और हीमोग्लोबिन की कमी का अर्थ है शरीर में ऑक्सीजन की कमी। ऑक्सीजन की कमी की वजह से कमजोरी और थकान महसूस होती है और इसी स्थिति को एनीमिया कहते हैं। 

एक स्वस्थ महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन का सामान्य स्तर 11 ग्राम माना गया है। अगर स्तर 9 से 7 ग्राम हो तो यह माइल्ड एनीमिया होता है, जो डाइट में बदलाव लाने से ठीक हो जाता है। यह स्तर 6 से 4 ग्राम हो तो उसे सीवियर एनीमिया कहा जाता है। 

क्या हैं कारण 
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की कुल आबादी का छठा हिस्सा एनीमिया से ग्रस्त है। अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि साठ प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार होती हैं, जबकि प्रेगनेंसी के दौरान 80 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार होती हैं। महिलाओं में यह समस्या इसलिए ज्यादा पाई जाती है, क्योंकि पर्याप्त पोषण न मिलने की वजह से वे कमजोर हो जाती हैं। वजन कम करने के लिए डाइटिंग कर रही लड़कियां भी इसकी शिकार हो जाती हैं। इसके अलावा पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने पर, युट्रस में ट्यूमर, आंतों का अल्सर या पाइल्स हो, तो इनके कारण भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग करवाने वाली महिलाओं को भी एनीमिया होने का खतरा रहता है। 

कैसे बचें एनीमिया से 
 संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें। एनीमिया को ठीक होने में कम से कम छह महीने का समय लग जाता है। डाइटीशियन डॉ. रूपाली दत्ता के अनुसार, ‘अगर नॉनवेज खाती हैं तो डाइट में मटन, चिकन और अंडा शामिल करें। इनमें प्रचुर मात्र में आयरन होता है। अगर आप शाकाहारी हैं तो हरी पत्तेदार सब्जियां, सेब, केला, तरबूज, खरबूजा और खजूर अवश्य खाएं। आयरन युक्त डाइट तभी फायदेमंद होती है, जब उसके साथ विटामिन सी का भी सेवन किया जाए। विटामिन सी के लिए अमरूद, आंवला और संतरे का जूस लें।- आयरन सप्लीमेंट्स और प्रोटीनयुक्त डाइट लेने की सलाह भी एनीमिया की शिकार महिलाओं को दी जाती है(सुमन बाजपेयी,हिंदुस्तान,दिल्ली,16.9.11)।

आगे चलें...

गुरुवार, 13 मई 2010

राजस्थान को एनीमिया-मुक्त करने का अभियान शुरू

राजस्थान को एनीमिया-मुक्त करने की कवायद शुरू हो चुकी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे ने यूनीसेफ और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से 11 से 19 साल तक की किशोरियों को एनीमिया की टेबलेट्स मुफ्त उपलब्ध कराने का कार्य प्रारम्भ कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में उप-स्वास्थ्य केंद्रों की एएनएम को हीमोग्लोबिन टेस्ट करने के उपकरण उपलब्ध करा दिए गए हैं। योजनान्तर्गत,प्रत्येक सप्ताह प्रत्येक किशोरी को एक आयरन फोलिक एसिड की टेबलेट दी जाएगी। एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्कूली छात्राओं और पढ़ाई छोड़ने वाली किशोरियों को घरों पर टेबलेट उपलब्ध कराएंगी। इसी प्रकार, गर्भवती महिला को 100 दिन के लिए 100 आयरन टेबलेट मुहैया कराई जाएंगी। बच्चों को पेट में होने वाले कीड़ों को खत्म करने की दवा दी जाएगी। आमतौर पर कीड़े होने से बच्चों में खून की कमी हो जाती है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य दिवस के मौके पर कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी महिला व किशोरियों को यह टेबलेट उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए यूनीसेफ टेबलेट उपलब्ध कराएगा।
ना हो खून की कमी
हमारे देश मे 60 प्रतिशत लोगो में रक्त की कमी है । इस रोग से 40 प्रतिशत लडकियां प्रभावित हैं जबकि महिलाओ का प्रतिशत तो 80 तक है । 65 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया (Anemia) की शिकार होती हैं । एनीमिया महिलाओं मे इसलिए भी ज्यादा है कि महिलाओं मे मासिकधर्म के दौरान भारी मात्रा मे रक्त स्राव होता है । एनीमिया के चलते व्यक्ति की कार्यक्षमता पर विपरीत असर पड़ता है। इसका नुकसान राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए प्रदेश में लोगों को आयरन फोलिक एसिड की टेबलेट उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया है। भारतीय समाज मे लडकियों का परवरिश पर उचित ध्यान न दिए जाने के कारण उनका पोषण अपर्याप्त रह्ता है । 13 से 15 वर्ष की लडकियों को 1620 केलोरी वाला भोजन ही मिलता है जबकि ज़रूरत होती है 2050 कैलोरी वाले भोजन की। इसलिए,किशोरियों को आयरन टेबलेट्स देने के साथ ही स्वास्थ्य-शिक्षा भी दी जाएगी। इसमें उन्हें स्वस्थ रहने और विभिन्न बीमारियों से बचाव की जानकारी दी जाएगी। इस कार्य में चिकित्साकर्मी सहयोग करेंगे। थकान, उठते-बैठते और खडे होते समय चक्कर आना, काम के प्रति अनिच्छा, शरीर मे तापमान की कमी, त्वचा मे पीला पड़ना, दिल मे असामान्य धड़कन, सांस लेने मे तकलीफ, सीने मे दर्द, तलवों और हथेलियों मे ठंडापन और लगातार सिरदर्द एनीमिया के प्रमुख लक्षण हैं। डाक्टर कहते हैं कि एनीमिया के शिकार लोगों को खाने के तुरन्त बाद चाय,काफी और कैल्शियम नहीं लेनी चाहिए क्योंकि ये आयरन के अवशोषण में बाधक हैं।

आगे चलें...