सोमवार, 6 सितंबर 2010

आ गया मां और बच्चे की सेहत का गारंटी कार्ड!

देखने में यह भले ही एक और सरकारी दस्तावेज लगे, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय इसे मां और बच्चे की सेहत का गारंटी कार्ड बता रहा है। जच्चा-बच्चा रक्षा कार्ड नाम का यह दस्तावेज ही अब बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र भी होगा और मां व बच्चे का टीकाकरण कार्ड भी। साथ ही गर्भवती मां और तीन साल तक के बच्चे को सेहत संबंधी सभी जरूरी सुविधाएं दिलाने का जरिया भी यही बनेगा। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर दिए जाने वाले मौजूदा जच्चा-बच्चा कार्ड के मुकाबले इसे बहुत बड़ी पहल बताते हुए स्वास्थ्य सचिव सुजाता के. राव कहती हैं, यह जननी और नवजात का अधिकार पत्र है। गर्भवती महिला के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने का इंतजार करने की बजाय इसे हर जच्चा तक खुद पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए देश भर में 10,79,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 7,31,000 आशा कार्यकर्ताओं का सहारा लिया जाएगा। इसे स्वास्थ्य अधिकार पत्र कहने के पीछे उनका तर्क है कि चाहे जांच हों या दूसरी सुविधाएं, जब एक बार सरकारी दस्तावेज में उन्हें इनके बारे में बताया जा रहा है तो निश्चित तौर पर वे इन पर दावा कर सकेंगी। फिर चाहे गर्भवती महिला सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे या फिर प्राइवेट अस्पताल। इससे स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करवाने वालों को भी आसानी होगी क्योंकि इसमें मां और बच्चे की सेहत का संपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज होगा। यह जच्चा-बच्चा को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं का एक तरह से मानकीकरण है। टीकाकरण की सारी तारीखें तो इसमें होंगी ही, अब हर महिला को पता होगा कि रक्तचाप, मधुमेह, हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप और वजन की कितनी बार जांच होनी चाहिए। आयरन और फोलिक एसिड की सौ दिन की गोलियां जरूर मिलनी चाहिए। यह एक तरह से स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी और क्वालिटी गारंटी के लिए हर नागरिक को निगरानी के लिए प्रेरित करेगा। हिंदी, अंग्रेजी सहित सभी भारतीय भाषाओं में तैयार किए गए इस कार्ड में बच्चे के जन्म के सभी जरूरी ब्योरों के साथ ही जन्म पंजीकरण संख्या भी शामिल की गई है। यह बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र का काम भी करेगा। इसी तरह इसमें चित्र के जरिए बच्चे के विकास की हर अवस्था को विस्तार से समझाया गया है। उस दौरान मां क्या कर सकती है और बच्चे में क्या-क्या बदलाव और विकास दिखाई देने चाहिए, इसकी जानकारी दी गई है। इसमें बच्चे के तीन साल तक के विकास का एक ग्राफ है, जिसमें हर महीने बच्चे के सेहत संबंधी आंकड़े डाल कर लगातार यह समझा जा सकता है कि उसका पर्याप्त विकास हो रहा है या नहीं(मुकेश केजरीवाल,दैनिक जागरण,दिल्ली,6.9.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अब ये योजना जल्द लागू हो औऱ बेहतर तरीके से....जनता को जागरुक होना होगा....

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