शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

आई ठंडःभोजन कम,हो प्यास बड़ी

जैसे स्कूटर में ट्रेन का फ्यूल नहीं डाला जा सकता, वैसे ही हम अपने शरीर की लिमिट से ज्यादा या कम लें तो नुकसान ही होगा। ये कहना है न्यूट्रिशन कंसल्टेंट विनोद सक्सेना का। उनके अनुसार ठंड में मेटाबॉलिज्म की प्रक्रिया तेज़ हो जाने के कारण लोग सामान्य डायट से ज्यादा खाने लगते हैं। इससे भी नुकसानदायक है पानी पीने के लिए प्यास लगने का इंतज़ार करना। कुछ साधारण से नियम फॉलो करने पर ठंड से बचाव नहीं, बल्कि एंजॉय किया जा सकता है। ठंड का मौसम यानी वक्त है सालभर के लिए एनर्जी जुटाने का। अगले चार महीने तक हम जैसा खाएंगे और जितना व्यायाम करेंगे, वही बाकी के आठ महीने में खर्च होगा। लेकिन यह सब हमें अपनी शरीर की प्रकृति के अनुसार ही करना चाहिए। इस समय शरीर को टोन-अप किया जा सकता है ताकि आने वाले एक्सट्रीम मौसम से लड़ने में शरीर को परेशानी न हो। पेश हैं कुछ आसान लेकिन बेहद कारगर टिप्स- 

प्यास हो बड़ीः 
गर्मियों में तो फिर भी लोग पानी पी लेते हैं लेकिन सर्दियां मुश्किल हो जाती हैं क्योंकि अधिकतर लोग प्यास लगने पर ही पानी पीते हैं। यहां यह समझना ज़रूरी है कि सर्दियों में भी शरीर को पानी की उतनी ही ज़रूरत होती है और पानी की कमी भी होती है। इस दौरान भी एक व्यस्क को लगभग ४ लीटर पानी पीना चाहिए। अगर दिन बीतते-बीतते याद आ जाए कि पानी पीना है तो भी एक बार में बहुत सा पानी पीना फायदेमंद नहीं है, इसलिए दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी पिएं। 

जितनी भूख, उतना खानाः 
ठंड में चयापचय की प्रक्रिया तेज़ होने के कारण हम ज्यादा खाना पचा पाते हैं लेकिन इस वजह से भूख से ज्यादा और गरिष्ठ खाना अवॉइड करें। प्रॉापर डायट प्लान करें, जिसमें विटामिन सी से भरपूर मौसमी फल, फाइबर और जूस शामिल करें। हर सुबह नाश्ते में ड्राय फ्रूट्स भी हो। ओवरवेट लोग कम कोलेस्ट्रॉल-युक्त चीजें जैसे अखरोट आदि शामिल कर सकते हैं। खाने में किसी न किसी रूप में आंवला शामिल करें।

अंतर हो खाने में:
नाश्ते से खाने के बीच चार से छह घंटे का अंतर रखना चाहिए ताकि खाना ठीक से पच सके और अगले मील के लिए शरीर तैयार हो जाए। हर काम का वक्त निधार्रित करें और ये शिड्यूल कम से कम एक मौसम फॉलो करें ताकि असर स्वयं जज कर सकें।सूरज से करें दोस्तीः आमतौर पर लोग इन दिनों सुबह देर तक सोते हैं और सूरज सिर पर चढ़ने पर या खाली वक्त में धूप सेंकते हैं। इस धूप से शरीर में हानिकारक विकिरण भी प्रवेश कर जाते हैं इसलिए सुबह की गुनगुनी धूप से लेकर दोपहर होने से पहले तक की धूप सन-बाथ का प्रापर तरीका है। रोज २० मिनट सनबाथ प्रि-विटामिन डी देता है जो शरीर के भीतर एक्टिव विटामिन में बदल जाता है। 

योग मिटाए रोगः 
ठंड में खूब एक्टिव रहें। सुबह के वक्त योग या कोई एक वक्त तय करते व्यायाम, दौड़ना शरीर को स्वस्थ रखता है। पूरा फायदा उठाने के लिए वर्क-आउट के नियम फॉलो करना न भूलें। स्नान से लगभग एक घंटे पहले गुनगुने तेल से शरीर की मालिश भी एक तरह का व्यायाम है।कान ढांककर रखें : ठंड का मज़ा लेने के साथ एक्सट्रीम ठंड से बचाव करना भी आवश्यक है। कानों को हमेशा ढंककर रखें क्योंकि ठंड के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील यही होता है। साथ ही कोई इंफेक्शन होने पर चिकित्सकीय परार्मश लिए बिना कोई दवा न लें। 

सूरज से करें दोस्तीः 
आमतौर पर लोग इन दिनों सुबह देर तक सोते हैं और सूरज सिर पर चढ़ने पर या खाली वक्त में धूप सेंकते हैं। इस धूप से शरीर में हानिकारक विकिरण भी प्रवेश कर जाते हैं इसलिए सुबह की गुनगुनी धूप से लेकर दोपहर होने से पहले तक की धूप सन-बाथ का प्रापर तरीका है। रोज २० मिनट सनबाथ प्रि-विटामिन डी देता है जो शरीर के भीतर एक्टिव विटामिन में बदल जाता है(सेहत,नई दुनिया,नवम्बर द्वितीयांक,2012)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी सावधानियाँ बताईं -धन्यवाद !

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  2. सचेत करती प्रस्तुति ||

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  3. अच्छी जानकारी !
    छोटे बच्चों के कान व कमर दोनों ही अच्छे से ढँककर रखना चाहिए ! उन्हें वहीं से ज़्यादातर ठंड पकड़ती है...
    धन्यवाद !
    ~सादर !

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  4. ठण्ड में सेहत के प्रति सचेत करती पोस्ट,,,अच्छी जानकारी,,,

    recent post : प्यार न भूले,,,

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  5. आपका इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (24-11-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  6. सुंदर और उपयोगी जानकारी । मै खुद भी पानी कम पीती हूँ पर अब पीऊंगी चाहे गरम ही क्यूं न हो ।

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  7. बहुत उपयोगी जानकारी है
    आभार !

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  8. आभार अच्ची जानकारी है

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