शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

ज़रूरी नहीं कि हर सीने का दर्द दिल का दौरा ही हो

सीने का दर्द कई कारणों से हो सकता है लेकिन इसे हमेशा दिल के दौरे से जोड़ कर देखा जाता है। लोगों में दिल के दौरे का खौफ इस कदर समाया हुआ है कि जरा सा छाती में खिंचाव, दर्द या जलन की शिकायत हुई नहीं कि दौड़ पड़े निकट के डॉक्टर के पास। तुरंत ईसीजी और खून की कई जाँचें तत्काल करा ली जाती हैं पर नतीजा कुछ नहीं निकलता। इसके बाद भी संतोष नहीं हुआ तो पास के किसी नर्सिंग होम या छोटे अस्पताल में जाकर भर्ती हो गए और वहाँ के आईसीयू में चार-पाँच दिन गुजारने के बाद तसल्ली मिली। 

मरीज और उसके परिजन सीने के दर्द हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर ही देखते हैं। कई साधन संपन्न मरीज तो इतनी हाय तौबा मचाते हैं कि अस्पताल वाले एंजियोग्राफी तक करवा लेते हैं। दरअसल इलाज करने वाले चिकित्सक पर मरीज एवं उनके परिजनों को भरोसा करना चाहिए। 

सीने में दर्द को कब अनदेखा न करें? 
अगर आपकी उम्र चालीस वर्ष या उससे ऊपर है और आप डायबिटीज के शिकार है और धूम्रपान या तंबाकू (जर्दा, खैनी, चैनी या जाफरानी पत्ती, गुल) के आदी है और छाती में तेज चलते वक्त या सीढ़ी चढ़ने पर छाती के बायीं तरफ दर्द या हल्का भारीपन उभरता हो या थोड़ा शारीरिक व्यायाम करने पर साँस फफूलने लगे, तो दिल की बीमारी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इन परिस्थितियों में सीने में उठ रहे दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

सीने के दर्द में खास बात यह होती है कि आराम करने से या चलते वक्त रुक जाने पर छाती का हल्का दर्द व भारीपन गायब हो जाता है। दिल का दर्द चलते वक्त बाएँ हाथ, बाई गर्दन व बाएँ जबड़े में भी उभरता है। छाती दर्द की चिंता से मुक्ति होने का एक ही रास्ता होता है, पहले ट्रेडमिल टेस्ट करवा लें। अगर परिणाम संदेहास्पद है तो स्ट्रेस इको करवाकर हार्ट की बीमारी होने के संदेह का निराकरण करें। पूर्णतः निश्चिन्त होने के लिए सबसे उत्तम जाँच मल्टी स्लाइस सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी करवाएँ। इस विशेष एंजियोग्राफी के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है और न ही जाँच के जरिए तार डालने की आवश्यकता होती है।

सीने में दर्द के और क्या कारण हो सकते हैं? 
छाती दर्द का सबसे बड़ा कारण छाती की अंदरूनी दिवारों में सूजन का होना है। होता यह है जब फेफ़डे के ऊपरी सतह पर स्थित झिल्ली में सूजन आ जाती है तो छाती की अंदरूनी दीवार में स्थित सूजी हुई सतह से साँस लेते वक्त हवा रगड़ खाती है तो असहनीय दर्द होता है। इस अवस्था को मेडिकल भाषा में प्ल्यूराइटिस कहते हैं। यह प्ल्यूराइटिस छाती में पानी इकट्ठा होने का शुरूआती संकेत है। देश में प्ल्यूराइटिस का ज्यादातर कारण टीबी का इंफेक्शन होता है। लोग छाती दर्द के लिए दर्द निवारक गोलियों का सेवन करते रहते हैं और सही जाँच व इलाज के अभाव में समस्या को और गंभीर बना देते हैं। अगर प्ल्यूराइटिस की समस्या को सही समय पर नियंत्रित न किया गया तो छाती में फेफ़डे के चारों ओर पानी इकट्ठा हो जाता है। टीबी के अलावा न्यूमोनिया का इंफेक्शन भी इस अवस्था को पैदा कर देता है। इस तरह की समस्या पर किसी थोरेसिक सर्जन यानी चेस्ट सर्जन से परामर्श लें।

मवाद से भी होता है सीने में दर्द 
छाती में मवाद यानी पस जमा हो जाने की घटना बहुत आम है। न्यूमोनिया या अन्य फेफ़डे का इंफेक्शन जब पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो पाता है, तो फेफ़डे के चारों ओर विशेषतः निचले हिस्से में इंफेक्शन वाला पानी या मवाद (पस) इकट्ठा हो जाता है।

सरवाईकल स्पोन्डिलाइटिस 
व्यायाम के अभाव में रीढ़ की हड्डियों के जोड़ काफी सख्त हो जाते हैं और उनमें लचीलापन खत्म हो जाता है। जिसके परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी से हाथ, कंधे और छाती के हिस्से में जाने वाली नसों पर दबाव पड़ने लगता है। जिसके फलस्वरूप छाती और हाथ में दर्द उभरने लगता है और लोग इसे दिल का रोग व संभावित हार्ट अटैक गलती से मान बैठते हैं और अंजानें में अप्रत्याशित हार्ट अटैक की संभावना के मद्देनजर अपनी दिनचर्या में अनावश्यक आमूलचूल परिवर्तन करते हैं। इसकी वजह से उनमें आत्मविश्वास व कार्यक्षमता दोनों में ही भारी कमी आती है।

पसलियों की कमजोरी  
अक्सर युवा सीने में दर्द की शिकायत करती हैं। यह दर्द सामने की ओर ज्यादा होता है। यह दर्द पसलियों का होता है जो छींक या खाँसी आने पर और बढ़ जाता है। अगर पसलियों के ऊपर झटका लगा तो ऐसा लगता है कि जान निकल गई। आजकल देखा गया है कि खून में विटामिन "डी" की मात्रा कम होने से भी पसलियों की बीमारी व छाती दर्द होता है। अगर आप प्रोटीन युक्त संतुलित भोजन व विटामिन से भरपूर सलाद (न्यूनतम तीन सौ ग्राम प्रतिदिन) व फल(300 ग्राम रोज़ाना) और बिना मलाई वाले दूध का सेवन प्रतिदिन करते हैं तो पसलियो की इस बीमारी और छाती दर्द से कोसों दूर रहेंगे। कुछ लोगों को कढ़ी रायता,आइसक्रीम व दही-बड़े के सेवन करने से छाती में दर्द उभर आता है। इसका कारण छाती की मांसपेशियों का ठंडी चीज़ों के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता है(डॉ. के.के.पांडेय,सेहत,नई दुनिया,सितम्बर प्रथमांक 2012)। 

हर चार मिनट में एक जान लेता है दिल का दौरा 
४० साल की शिखा शर्मा एक विज्ञापन एजेंसी में उच्च पद पर कार्यरत थी। यूँ तो वे नियमित रूप से प्राइवेट जिम जाती थी, खानपान पर भी समुचित ध्यान देती थीं। उसकी प्रोफेशनल लाइफ इतनी व्यस्त थी कि वह कभी जिम नहीं जा पाती थी और जंकफूड खाने से बच पाती थी। एक शाम वे लौट रही थीं कि अचानक उनके पैर लड़खड़ाने लगे, बाईं ओर छाती में तेज चमक सी उठी, हाथों में से मानों किसी ने रक्त ही निकाल लिया हो, वे पसीना-पसीना हो गईं। उन्हें लगा कि निश्चित ही कुछ गंभीर समस्या है। वे तुरंत नजदीकी अस्पताल में पहुँचीं। डॉक्टर ने उन्हें सघन चिकित्सा केंद्र (आईसीसीयू) में इलाज के लिए दाखिल किया। उनका ईसीजी बता रहा था कि उन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है। दिल की धमनियों में खून का थक्का जम गया है। कोई विश्वास नहीं कर पा रहा था कि इतनी मेहनत करने वाली लड़की को भी दिल की दरअसल, शिखा के परिवार में हृदय रोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा था। उसके पिता, चाचा, फूफी, चाचा का लड़का भी पिछले दस साल के भीतर के दौरे के शिकार हो चुके थे। शिखा जैसे बेशुमार लोग आज इस कड़वे सच से परिचित नहीं हैं कि हम भारतीय आनुवांशिक तौर पर हृदय रोग के जोखिम पर हैं। 

क्यों जमता है थक्का 
रक्त संचार के मुख्य मार्गों को अवरोध मुक्त रखने के लिए हृदय और उसकी संचालन प्रणाली को रोजाना लगातार संघर्ष करना पड़ता है। इसमें मुख्य बाधक है कोलेस्ट्रॉल, जो लीवर में बनता है। बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल कोलेस्ट्रॉल) धमनियों में एक मोटी और कड़क परत का निर्माण करता है। यह क़डक परत करता है। यह क़डक परत धमनियों का रास्ता ब्लॉक कर देती है। इसे ही हम आर्टरी ब्लॉक कहते हैं, जिसे दूर करने के लिए बाईपास सर्जरी की जरूरत होती है। 

चिकित्सा विज्ञानियों को संदेह है कि कोलेस्ट्रोल हमारी नलिकाओं के भीतर रक्त को थक्के और फिर गाढ़े चकत्तों में बदल देता है। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल से बना थक्का रक्त प्रवाह को खतरनाक स्तर तक कम कर देता है। इससे हृदय पेशियों को ऑक्सीजन की खुराक नहीं मिलती। फिर अमूमन रक्त नलिकाओं के फैलाव में मदद करने वाली इन्सुलिन भ्रम में उल्टा काम करने लगती है। 

जब कोशिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुँचता है, तो इंसुलिन मांसपेशी को मोटा करती है, जिससे धमनियाँ और संकरी हो जाती हैं। रक्त और ऑक्सीजन को रास्ता तय करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है(डॉ. पवन कुमार,सेहत,नई दुनिया,सितम्बर प्रथमांक 2012)।

17 टिप्‍पणियां:

  1. बात सही है.
    पोस्ट अच्छी है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. उपयोगी जानकारी के लिए एक बार फिर आपका ह्रदय से धन्यवाद .मल्टी स्लाइस सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी की बजाय हमेशा वायर डालकर की जाने वाली एंजियोग्राफी को तरजीह दी जाती है क्या इनके परिणामों की सटीकता में अंतर के कारण ?

    उत्तर देंहटाएं
  3. सही कहा . लेकिन यह बात डॉक्टर को ही बताने दें . :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. धन्यवाद , बहुत सारे भ्रमों का निराकरण भी हुआ ,मसलन स्पोंडीलाईटिस व्यायाम के अभाव में होती है...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बेहतरीन लेख को साझा किया....ऐसे ही दर्द के बाद में डाकटर के पास गया..उन्होंने कई सिस्मट के बारे पूछा फिर कहा जाओ खेलो कूदो....मजा आ गया सूनकर। सही एडवाइस एक डाक्टर ही दे सकता है....बशर्ते की वो पैसे का पूजारी न हो.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत उत्तम और उपयोगी जानकारी ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अच्छा किया आपने यह सब! बता दिया -सबके लिये लाभकारी!

    उत्तर देंहटाएं
  8. काफी उपयोगी जानकारी है !

    उत्तर देंहटाएं
  9. आपके ब्लॉग की ताजा पोस्ट पढ़ी। जानकारियां अच्छी और ज्ञानवर्धक हैं। विजिट करें:
    http://consumerfighter.com/

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत लाभदायक पोस्‍ट क्‍यो की मे भी कई साल पहले मात्र् इसी भ्रम वश हजारो रूपये व्‍यर्थ मे बहा चुका हू जबकी मे पूर्ण रूप से स्‍वस्‍थ था बहुत जी लाभदायक जानकारी तथा बहुत दिनो बाद ब्‍लाग पर आने के लिये क्षमा

    उत्तर देंहटाएं
  11. मेरी छाती में रोज सुबह बिसतर से उठते समय बहुत जयादा दर्द होता है और फिर धीर धीर कम होना सुरु हो जाता है मुझे बताए कि किस कारण होता है

    उत्तर देंहटाएं
  12. मेरी उम्र 27 साल है बाया हाथ सीने जलन होती क्या करण है और गैस बहुत बनती

    उत्तर देंहटाएं
  13. मेरी उम्र 27 साल है बाया हाथ सीने जलन होती क्या करण है और गैस बहुत बनती

    उत्तर देंहटाएं
  14. भाई मेरे को भी सेम प्रॉबल्म है कही दवाई ले ली ठीक नहीं होती है

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।