मंगलवार, 15 मई 2012

जब खरीदें धूप का चश्मा...

गर्मियां शुरू होते ही अधिकांश व्यक्तियों को धूप के चश्मे की जरूरत महसूस होने लगती है। चिलचिलाती धूप में आंखों पर बिना चश्मा चढ़ाये बाहर जाने पर आंखों में जलने, पानी गिरना, सिर चकराना, जी मिचलाना जैसी शिकायतें होने लगती हैं। धूप का चश्मा खरीदते समय कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। कभी भी सस्ते व घटिया किस्म के लैंसों वाले चश्मे न खरीदें। सस्ते चश्मों में लैंस के स्थान पर वही शीशे लगा दिये जाते हैं जो खिड़कियों आदि में इस्तेमाल किये जाते हैं। यही नहीं, ऐसे चश्मों में शीशे के अलावा प्लास्टिक का भी प्रयोग होता है और वह भी बहुत घटिया किस्म का होता है। इस तरह के घटिया शीशे या प्लास्टिक के लैंस सूर्य की किरणों के साथ आने वाली पराबैंगनी किरणों का शोषण नहीं कर पाते और लैंस के माध्यम से आरपार होकर आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। 

लैंस के रंग का चयन करते समय भी सावधानी बरतनी चाहिए। लैंस ऐसे रंग का हो जो आंखों को कोमलता का अहसास दिलाये। लैंस हमेशा हरे, हल्के काले, गहरे नीले, कत्थई या भूरे रंग का ही खरीदें। अच्छी किस्म और उचित रंगों के लैंस सूर्य की किरणों और प्रकाश को परावर्ती करके वापस लौटा देते हैं। फलस्वरूप लैंस गर्म नहीं होते और आंखों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाते। 

चश्मे में फ्रेम भी ठीक होना चाहिए। आजकल चश्मे की दुकानों पर विभिन्न प्रकार के फ्रेम मिलते हैं। जैसे : धातु फ्रेम, प्लास्टिक का फ्रेम, सेल्यूलोज नाईट्रेट फ्रेम आदि। लगातार अनावश्यक स्थानों पर व अनुपयुक्त समय पर धूप का चश्मा लगाते रहने से प्रकाशांतक (फोटोफोबिया) नामक रोग भी हो सकता है। अत: इसका उपयोग केवल आवश्यकता होने पर ही करना चाहिए(अनिल कुमार,दैनिक ट्रिब्यून,13.5.12)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  2. शायद पोस्‍ट करने मे देरी कर दी गर्मीयो के चस्‍मा तो खरीद लिये गये है पर जिन्‍होने नही खरीदे है उनको अच्‍छी जानकारी है

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  3. उपयोगी आलेख...
    सादर आभार।

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  4. अच्छी जानकारी.......................
    अकसर लोग जो चेहरे पर अच्छा लगता है वही खरीद लेते हैं....कम से कम चश्मा खरीदें तो ब्रांडेड ही लें....

    पिछली पोस्ट से हमारी टिप्पणी कहाँ गयी सर??

    सादर.

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    1. आपके ध्यानाकर्षण के कारण चार टिप्पणियां स्पैम से मिलीं। इस ब्लॉग पर मॉडरेशन लागू नहीं है। तमाम असहमतियों का स्वागत है।

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  5. आँखों का मामला है , एहतियात ज़रूरी है ।

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  6. ठीक बात कही आपने ,पता नहीं क्यों लोग जहां ज़रूरत नहीं वहाँ भी धूप का चश्मा लगाये रखते हैं !

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  7. अच्छी उपयोगी जानकारी आभार !

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