बुधवार, 16 मई 2012

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज का अध्ययनःमोबाइल से बहरेपन का ख़तरा

मोबाइल फोन खासकर इयर फोन का ज्यादा इस्तेमाल आपको या आपके बच्चों को बहरा कर सकता है। रोज 6 से 7 घंटे मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले तो बहरेपन की गिरफ्त में हैं ही। इन 6 से 7 घंटों में बात करने के साथ ही इयरफोन से गाने सुनना भी शामिल है। वहीं जो लोग मोबाइल का कम यूज करने वालों में भी सामान्य लोगों की अपेक्षा सुनने की क्षमता 15 पर्सेंट कम हो रही है। ऐसे लोगों की संख्या 70 फीसदी है। अध्ययन में शामिल लोगों को तीन वर्ग में बांटा गया, जिसमें 13 से 19 साल, 20 से 45 साल और 46 से 65 साल के लोग थे। बच्चों में यह समस्या अन्य की तुलना में ज्यादा पाई गई है। गौरतलब है कि इन दिनों राजधानी में ज्यादातर बच्चे और युवा कानों में इयरफोन लगाए मिल जाएंगे। इनमें से ज्यादातर को सुनने की क्षमता बढ़ाने के लिए मशीन लगाने की जरूरत है। 

यह जहां 13 साल तक के बच्चों के लिए खतरनाक है, वहीं 65 साल के बुजुर्ग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के ईएनटी डिपार्टमेंट ने यह स्टडी की है, जिसमें 13 साल से 65 साल तक के करीब 400 लोगों को शामिल किया गया। 

अस्पताल के डीन और ईएनटी विभाग के हेड डॉ. अरूण अग्रवाल का कहना है कि कान में करीब 15 हजार स्पेशल हेयर सेल्स होते हैं। इसके बाद नर्व्स होते हैं। ये जब खराब होने लगते हैं तो सुनने की क्षमता कम होने लगती है। एक बार सेल्स खराब हो गए तो इनका दोबारा बनना मुश्किल होता है। सुनने की क्षमता में कमी आने का शुरू में पता नहीं चलता है। जब तक पता चलता है करीब 30 फीसदी सेल्स खराब हो चुकी होती हैं। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ और ज्यादा दवाइयां भी इसका कारण हैं, लेकिन मोबाइल फोन की भूमिका इसमें बहुत ज्यादा हो गई है। अगर हम आईपॉड को एक घंटे के लिए सिर्फ 60 वॉल्यूम पर सुनें या थोड़ी थोड़ी देर में ब्रेक लें तो इसमें शुरू से ही कुछ कंट्रोल हो सकता है(सुशील कुमार त्रिपाठी,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,15.5.12)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. ाच्छी जानकारी। धन्यवाद।

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  2. ek din mobile use na kero to ajjeb lagat hai
    waise ye khatre pahle bhi bataye ja chuke hai

    http://blondmedia.blogspot.in/

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  3. कान में इयर फोन लगाकर तो वैसे भी कहाँ सुनाई देता है . इसलिए कभी कभी दुर्घटना भी हो जाती है .

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  4. सार्थक सचेत कराती पोस्ट,......

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  5. फोन तो घातक साबित हो रहा है पिछले वर्ष मे रेलवे कालोनीयो के पास कई व्‍‍यक्ति इस बजह से मारे गये की वे रेवले पटरी पर इयर फोने से बात करते जा रहे थे और रेल आने का उन्‍है पता ही नही चला था

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  6. आखिर असली जरुरतमंद कौन है
    भगवन जो खा नही सकते या वो जिनके पास खाने को नही है
    एक नज़र हमारे ब्लॉग पर भी
    http://blondmedia.blogspot.in/2012/05/blog-post_16.html

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  7. अच्छी पोस्ट है ......

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