सोमवार, 9 अप्रैल 2012

कहाँ ग़ायब हुआ स्वाद मुँह का?

बुजुर्ग अक्सर शिकायत करते हैं कि उनके मुँह का स्वाद ग़ायब हो गया है। उन्हें अब किसी व्यंजन में स्वाद महसूस नहीं होता। बढ़ती उम्र के साथ कुछ बुजुर्ग मरीज़ों में रसना इंद्रियों के शिथिल होने के साथ घ्राणशक्ति भी क्षीण हो जाती है। इसकी वजह से उनकी भूख भी कम हो जाती है और वज़न घट जाता है। 

मुँह का स्वाद खत्म होने के कई कारण हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अन्य अवयवों की तरह स्वादग्रंथियाँ भी शिथिल होने लगती हैं। जिस तीव्रता के साथ बचपन अथवा युवावस्था में गंध अथवा स्वाद का एहसास होता है, उतनी तीव्रता से बुजुर्गावस्था में नहीं महसूस होता। युवावस्था में स्वादग्रंथियों में आई खराबी को ठीक किया जा सकता है, जबकि बढ़ी उम्र में ऐसा करना मुश्किल होता है। कई बुजुर्ग चाय, कॉफी और नाश्ते के सहारे दिन भर निकाल देते हैं। इसी के चलते जल्दी ही उनका वज़न भी घट जाता है।

शिथिल इंद्रियाँ 
जब किसी बुजुर्ग के मुँह का स्वाद ग़ायब होता है तो उसमें सूँघने की क्षमता में कमी का बड़ा हाथ होता है। सूँघने की क्षमता नाक की अंदरूनी सेहत के प्रभावित होने की वजह से कम हो जाती है। इसके लिए असाध्य स्थिति में पहुँच चुका जुकाम और लंबे समय से चली आ रही नाक की दूसरी बीमारियाँ जिम्मेदार हैं। बहुत कम मामलों में नाक की नाड़ी की ख़राबी से सूंघने की क्षमता घटती है। मरीज़ों में दिमाग़ी पक्षपात के कारण उनकी सूंघने की क्षमता कम हो जाती है,जिसकी वज़ह से मुंहका स्वाद भी खराब हो जाता है। 

मुंह की स्वच्छता तथा दंतरोग 
शरीर में हुई किसी भी बीमारी की वज़ह से यदि मुंह सूखने की समस्या होती है तब भी मुह का स्वाद जाता रहता है। स्वाद महसूस होने के लिए मुंह में थूक अथवा लार का होना निहायत ज़रूरी है। भोजन एवं पेय में उपस्थित रसायनों की वज़ह से स्वाद ग्रंथियों की सक्रियता बनी रहती है। मुंहस सूखा होने पर रसायन क्वाद ग्रंथियों तक नहीं पहुंच पाता है। मुंह में हो रही किसी भी तरह की जलन से स्वाद ग्रंथियां क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। ढीले अथवा खराब फिटिंग वाले कृत्रिम दांतों के साथ सड़े हुए मसूड़े भी स्वाद ग्रंथियों को निष्क्रिय करने में सक्षम होते हैं। धूम्रपान से भी स्वाद ग्रंथियों की संवेदनशीलता ख़त्म हो जाती है(डॉ. अनिल भदौरिया,सेहत,नई दुनिया,मार्च चतुर्थांक 2012)।

6 टिप्‍पणियां:

  1. आज तो सिर्फ मर्ज?????????????
    कोई इलाज नहीं???

    सादर.

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  2. apki post ka charcha aaj Bloggers meet weekly 38 me
    http://www.hbfint.blogspot.in/2012/04/38-human-nature.html

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  3. सारा खेल ही टेस्ट बड्स का है दोश्त.स्मोकिंग से स्वाद ग्रंथियां ही कुंद नहीं होती भूख भी मर जाती है .दांत खोखले होते जाते हैं .स्मोकिंग स्टेंस रंगत ले उड़तें हैं .मुक्तावली की आब चली जाती है .मुंह की सुगंध .द्य्र्गंध सांस डेरा दाल लेती है .

    बढ़िया जानकारी आपने मुहैया करवाई है उम्र से जुडी इन्द्रिय संवेदनों में होने वाले ह्रास की .

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  4. बहुत बढ़िया जानकारी !

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