शनिवार, 17 मार्च 2012

गंभीर गुर्दा रोग के लक्षण क्या हैं?

किडनी की बीमारियों के इलाज के लिए शुरुआती अवस्था में ही बीमारी का पता चलना ज़रूरी है। विश्व में ५ प्रतिशत से भी अधिक वयस्कों को किडनी से जुड़ी किसी न किसी तरह की परेशानी होती है। हर साल लाखों लोग गंभीर किडनी रोगों के कारण समय से पहले मर जाते हैं। देश में गंभीर किडनी रोगों से पीड़ित अधिकतर मरीज़ों में बीमारी का शुरुआती अवस्था में निदान ही नहीं हो पाता है। समय रहते इसका पता लग जाने से न केवल बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है बल्कि इससे मरीज़ में हृदय रोगों की आशंका भी कम हो सकती है।  

गंभीर किडनी रोगों के कारण 

-मधुमेह और उच्च रक्तचाप एवं किडनी का संक्रमण।

-नलिकाओं में रुकाव (प्रोस्टेट/पथरी)। 

-आनुवांशिक कारण : पॉलीसिस्टिक किडनी रोग 

भारत में मधुमेह और उच्च रक्तचाप गंभीर किडनी रोगों के सबसे आम कारण हैं। ये दोनों बीमारियाँ हृदय रोगों के लिए भी प्रमुख रूप से ज़िम्मेदार हैं। इसके अलावा यदि मधुमेह के रोगी की किडनी भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तो उसे हृदय रोग होने का जोखिम आम लागों के मुकाबले १७ गुना अधिक होता है।  

किडनी रोग का निदान न होने के खतरे
समय पर बीमारी का पता न लगने से गंभीरता बढ़ती चली जाती है। किडनी रोगों के मामले में किडनी के फेल हो जाने का खतरा होता है जिसके उपचार के लिए डायलिसिस व किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।

किडनी रोगों के साथ अन्य जटिलताएँ भी उत्पन्न होने लगती हैं जैसे हृदय रोग या हार्ट अटैक, जिससे मरीज़ की असामयिक मृत्यु भी हो सकती है।शरीर में विषैले पदार्थों का जमावड़ा, हाथ-पैरों में छाले और दिमाग़ को क्षति पहुँचने की आशंका भी होती है। 

समस्या
चिकित्सकीय : मरीज़ के जीवनकाल की गुणवत्ता और अवधि कम हो जाती है।

आर्थिक : इलाज का खर्च बहुत अधिक होता है। डायलिसिस शुरू होने के बाद इलाज का मासिक खर्च रुपए १२ हज़ार से भी अधिक होता है।

सामाजिक : परिवार भावनात्मक और आर्थिक रूप से प्रभावित होता है। इलाज के लिए किडनी प्रत्यारोपण की ज़रूरत होती है, किडनी दान करने के लिए परिवार के किसी सदस्य की आवश्यकता होती है।  

इलाज 
प्रभावी इलाज के लिए शुरूआती अवस्था में ही किडनी रोग का निदान होना ज़रूरी है। किडनी रोगों का निदान शुरुआत में ही किया जा सकता है। इसके लिए लक्षणों को पहचानना आवश्यक है।

 लक्षण
-रात के समय बार-बार पेशाब आना
-मासिक धर्म का अनियमित होना।  
 - शारीरिक क्षमता घट जाना
-पैरों में पानी जमा हो जाने के कारण सूजन आना।
-भूख कम हो जाना

जाँचें
खून : रक्त में क्रिएटिनिन के स्तर का पता लगाने के लिए साधारण-सी जांच की जाती है। इससे किडनी की कार्यक्षमता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। 

पेशाबः पेशाब में क्रएटिनिन और एलब्यूमिन के लिए जांच की जाती है। 

स्क्रीनिंगः जो लोग किडनी रोगों के उच्चतम जोखिम पर हैं,उन्हें स्क्रीनिंग ज़रूर कराना चाहिए। 

-मधुमेह और उच्चरक्तचाप के मरीज़ 

-वे लोग जो मोटापे से पीड़ित और धूम्रपान के आदी हैं। 

-50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग। 

-वे लोग जिनके परिवार में किडनी रोगों,मधुमेह या उच्च रक्तचाप की हिस्ट्री रही हो(डॉ. राजेश भराणी,सेहत,नई दुनिया,मार्च प्रथमांक 2012)।

7 टिप्‍पणियां:

  1. पोस्ट पढ़कर डर लगने लगा है।
    डॉक्टर के पास जाने से डर जो लगता है।

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  2. पर आपने लोगों के सचेत करने का काम बखूबी अंजाम दिया है।

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  3. अच्छी जानकारी...आभार!

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  4. bahut hi achchhi prastuti sadar aabhar ......yadi gurde me dard rahata ho aur serum cretinine normal ho to kya use mana jaye ki vh gurda rog se peedit hai ?

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