शुक्रवार, 16 मार्च 2012

विदेशी भी आ रहे हैं मातृत्व सुख के लिए भारत

मातृत्व को किसी सीमा में नहीं बांधा जा सकता है । भारत की टेस्ट ट्यूब प्रयोगशालाओं में जन्मे विदेशी बच्चे इस बात को बखूबी साबित भी कर रहे हैं। भले ही ये बच्चे अभी यहां से दूर अपने-अपने देशों में खेल कूद रहे होंगे लेकिन उन्हें इस बात का एहसास भी है कि उनकी "मांएं" भारत में भी हैं । वे मदर्स डे में अपने-अपने आईवीएफ विशेषज्ञों को मां के संबोधन के साथ थैंक्यू कार्ड भेजना नहीं भूलते । यहां आईवीएफ का अंतर्राष्ट्रीय स्तर तो है ही, इसके बेहद सस्ता होने एवं सरोगेट मदर (किराए की कोख) मिलना आसान होने की वजह से भारत मातृत्व का भी दुनिया का सबसे बड़ा हब बनने की राह पर है । यहां अफगानिस्तान एवं मध्य-पूर्व के देशों से ही नहीं बल्कि अमेरिका एवं यूरोपीय देशों के निस्संतान दंपति भी संतान सुख पाने भारी संख्या में यहां आ रहे हैं । विदेशों के कई आंगन भारत की वजह से रोशन हो रहे हैं । 

कैलाश कॉलोनी स्थित आईसिस प्रजनन केंद्र की प्रमुख एवं जानी-मानी प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. शिवानी सचदेव ने दावा किया कि अभी तक उनके यहां १,००० से अधिक टेस्ट ट्यूब बेबी जन्म ले चुके हैं । इनमें करीब ४०० विदेशी दंपतियों के हैं । उन्होंने बताया कि यहां आईवीएफ के एक चक्र की कीमत अगर डेढ़ लाख रुपए है तो अमेरिका में उसकी कीमत ७ लाख रुपए की होगी । डॉ. शिवानी सचदेव ने दावा किया कि उनके यहां हर रोज कम से कम एक विदेशी निस्संतान दंपति जरूर आते हैं । इन विदेशी दंपतियों में अफगानिस्तान एवं खाड़ी देशों सहित आस्ट्रेलिया, अमेरिका, यूके, जर्मनी एवं अन्य यूरोपीय देशों के दंपति भी होते हैं । 

राजौरी गार्डन स्थित नर्चर प्रजनन केंद्र की प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज ने दावा किया कि लंबे समय तक युद्धग्रस्त रहने की वजह से अफगानिस्तान में बांझपन बहुत ज्यादा है । यहां मर्दों में स्पर्म की कमी दंपतियों के निस्संतान होने का बड़ा कारण बन रहा है । उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान से उनके पास हर महीने कम से कम ५० निस्संतान दंपति टेस्ट ट्यूब बेबी की चाह में आते हैं । नर्चर अफगानिस्तान के निस्संतान दंपतियों के लिए मातृत्व की खुशी का सबसे बड़ा निर्यातक साबित हो रहा है । टेस्ट ट्यूब बेबी का एक उदाहरण तो मर्म छूने वाला है । 

अफगानिस्तान की एक महिला को भारत की प्रयोगशाला में गर्भ ठहरा और उसने बच्चे को जन्म दिया पाकिस्तान में। डॉ. अर्चना धवन बजबजाज ने बताया कि पिछले साल एक अफगानी दंपत्ति 25 वर्षीय सूफिया और 33 वर्षीय हामिद नर्चर क्लिनिक आए। यह दम्पत्ति लम्बे समय से संतान के लिए भटक रहा था। इस साल पाकिस्तान में सूफिया को बच्चा हुआ है। डॉ. बजाज कहती हैं कि प्यार और स्नेह के बंधन में मातृत्व ही इन तीनों देशों को बंधन में बांध सकता है। कूटनीति के स्तर पर इस तरह के प्रेम त्रिकोण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। 

टेस्ट ट्यूब बेबी सहित प्रजनन संबंधी तमाम स्पेशियैलिटी की विदेशी मांग को देखते हुए,देश के महानगरों के सभी अस्पतालों ने अपने यहां अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित कर रखी है। पूसा रोड स्थित बी.एल. कपूर सुपरस्पैशिएलिटी अस्पताल की प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. संदीप तलवार ने कहा कि विदेशी क्लाइंट को ध्यान में रखकर ही इस अस्पताल ने अत्याधुनिक आईवी प्रयोगशाला की स्थापना कराई है। लीलावती अस्पताल के जाने-माने डाक्टर डॉ. ऋषिकेश पई ने कहा कि इस देश में टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक का स्तर अब दुनिया में किसी भी देश से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके पास भी भारी संख्या में विदेशी मरीज़ आ रहे हैं। 

वैशाली(गाजियाबाद) स्थित पुष्पांजलि क्रॉसले ने हाल ही में टेस्ट ट्यूब बेबी के देश के सबसे बड़े केंद्र केरल के सिमार(सीआईएमएआर) के जाने-माने प्रजनन विशेषज्ञ डाक्टर के.के. गोपीनाथन की देखरेख में आईवीएफ स्पैशियलिटी शुरू की है। उन्होंने कहा कि आसान सरोगेसी तो विदेशियों के यहां आने का कारण है ही,सस्तेदर में हम अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सेवा मुहैया कराने में भी सफल हो रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म में आईवीएफ का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान बनता जा रहा है(धनंजय,संडे नई दुनिया,11 मार्च,2012)

3 टिप्‍पणियां:

  1. भारतीय यह सभ्यता, ऐसे जाय विदेश ।
    बच्चा नि:संतान को, डालर पाये देश ।

    डालर पाए देश, नया यह धंधा आया।
    स्पर्म होंय नि:शेष, रास्ता नया दिखाया ।

    परखनली संतान, मर्म को छू लेता है ।
    सबसे बढ़िया दान, आय वी ऍफ़ देता है ।।

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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