बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

शिशुओं में आम है पीलिया

त्वचा और आँखों का पीला पड़ना गंभीर समस्या के लक्षण हैं। पीलिया में त्वचा का रंग बदलकर पीला हो जाता है। यह बदलाव सबसे ज़्यादा आँखों में दिखाई देता है, आँखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ जाता है। लिवर में बिलिरुबिन नामक पिगमेंट के शरीर में एकठ्ठा होने से यह पीलापन दिखाई देने लगता है। सामान्य स्थिति में यह लिवर में बनने वाले बाइल के साथ आँत में पहुँचता है और मल के ज़रिए शरीर से बाहर निकल जाता है। रक्त में बिलिरुबिन पिगमेंट का स्तर बढ़ने पर या इसका निकास बाधित होने पर यह पीले रंग का पिगमेंट शरीर में इकठ्ठा होने लगता है, जिससे पीलिया हो जाता है। वयस्क या अधेड़ावस्था में पीलिया लिवर के क्षतिग्रस्त होने जैसी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। 

पीलिया की पुष्टि साधारण ब्लड टेस्ट द्वारा की जा सकती है। पीलिया का मुख्य लक्षण त्वचा और आँखों का पीला पड़ना है, पीलापन नाखूनों में भी देखा जा सकता है। सिर और चेहरे से शुरू होकर यह शरीर में नीचे की ओर भी फैलने लगता है। त्वचा में खुजली भी हो सकती है। छोटे बच्चों को गंभीर पीलिया यानी रक्त में बिलिरुबिन का स्तर बहुत ज़्यादा होने पर मस्तिष्क में क्षति होने लगती है। इससे उनकी भूख कम हो जाती है और उनींदापन बना रहता है। पीलिया विभिन्न कारणों से हो सकता है। मरीज़ में पीलिया के अलावा कुछ अन्य लक्षण भी दिखाई देते हैं, जिनसे पीलिया के कारण का पता लगाया जा सकता है। लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने की सामान्य प्रक्रिया में बिलिरुबिन का निर्माण होता है। यदि ये कोशिकाएँ असामान्य रूप से टूटने लगे तो इससे बिलिरुबिन का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे पीलिया हो जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज़ में पीलिया के लक्षणों के अलावा रक्तअल्पता के लक्षण (थकान, कमज़ोरी आदि) भी दिखाई देते हैं। 

कारण और जोखिम
पीलिया विभिन्ना कारणों से हो सकता है। लाल रक्त कोशिकाओं के अधिक मात्रा में टूटने पर यह हो सकता है। लिवर का ठीक से काम न करना एक कारण हो सकता है। लाल रक्त कोशिकाओं का अपने जीनकाल से पहले टूटना भी एक कारण हो सकता है। इन सभी कारणों से रक्त में बिलिरुबिन का स्तर बढ़ जाता है। वयस्कों में पीलिया अक्सर लिवर के ठीक से काम न करने का संकेत होता है। हिपेटाइटिस जैसे संक्रमण या कुछ विशेष दवाएं लिवर को प्रभावित करती हैं। शराब के कारण भी लिवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यदि बिलिरूबिन का अत्यधिक निर्माम या फिर लिवर के क्षतिग्रस्त होने की समस्या न हो तो इसका निकास न होने से पीलिया हो सकता है। यदि बाइल किसी अवरोध के कारण लिवर में ही इकट्ठा होने लगे,तो बिलिरुबिन रक्त में इकट्ठा होने लगता है और यह पीलिया का कारण बनता है। 

उपचार 
पीलिया का उपचार इसके कारण पर निर्भर करता है। शिशुओं में होने वाला पीलिया अपने आप ठीक हो जाता है। उपचार में लाइट थैरेपी या फोटेथैरेपी दी जा सकती है जिससे शरीर में इकट्ठा बिलिरूबिन पिगमेंट टूटकर कम हानिकारक रूप में बदल जाता है। बिलिरूबिन का स्तर घातक स्तर तक बढ़ने पर ब्लड ट्रांसफ्जूजन की स्थिति बन सकती है। वयस्कों में इसका कारण जानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। 

नवजात में पीलिया 
नवजात शिशुओं में पीलिया आम है। साठ प्रतिशत से ज्यादा इससे प्रभावित होते हैं। जन्म के कुछ दिनों बाद शिशुओं में यह समस्या दिखाई देती है। कई बार शिशुओं के शरीर में जन्म के तुरंत बाद बिलिरूबिन की प्रोसेसिंग सामान्य से धीमी होती है जिससे वे पीलियाग्रस्त हो जाते हैं(डा. अश्मित चौधरी,सेहत,नई दुनिया,फरवरी प्रथमांक 2012)

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  2. यह जानकारी बहुत बड़ी आफ़त से लोगों को सचेत करती है।

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  3. कैसे बचें....या कुछ देसी इलाज की जानकारी भी दें...

    शुक्रिया...

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  4. बहुत अच्छी जानकारी दी है !
    आभार ....

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