सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

मसूड़े रहें दमदार,तभी मुस्कान होगी सवा लाख की

मसूड़े स्वस्थ हैं तो दांत भी स्वस्थ रहेंगे। लेकिन हम इस बात को समय रहते नहीं समझ पाते। नतीजतन मसूड़ों की समस्या पैदा हो जाती है और दांतों में भी तकलीफ होने लगती है। दांतों और मसूड़ों की इस तकलीफ से बचने के लिए शुरू से ही सावधानी बरतनी चाहिए और अगर तकलीफ शुरू हो ही जाए तो इलाज कराने में लापरवाही बिल्कुल भी न बरतें। 

दांत और मसूड़ों का स्वास्थ्य एक-दूसरे पर निर्भर करता है। अगर मसूड़े स्वस्थ नहीं होंगे तो दांत भी स्वस्थ नहीं रह पाएंगे। इसलिए स्वस्थ दांतों के लिए स्वस्थ मसूड़े बहुत जरूरी हैं। मसूड़ों के स्वास्थ्य की देखभाल बच्चों के दांत निकलने के पहले ही शुरू कर देनी चाहिए। फीडिंग कराने के बाद मसूड़ों को गीले कपड़े से साफ करना चाहिए ताकि मसूड़ों में बैक्टीरिया न पनपें। बच्चे के दांत निकलने के बाद से ही दांतों की सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि उनके मसूड़े स्वस्थ रहें। 

क्यों होती है यह समस्या 
मसूड़ों की बीमारी का सबसे प्रमुख खारण प्लॉक होता है। इसके अलावा कई बीमारियां जैसे कैंसर, एड्स और डायबिटीज महिलाओं में किशोरावस्था, गर्भावस्था, मोनोपॉज और पीरियड्स के समय होने वाला हार्मोन परिवर्तन भी मसूड़ों पर संक्रमण की आशंका बढ़ा देते हैं। धूम्रपान भी मसूड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। वैसे मुंह की साफ-सफाई का ख्याल न रखना मसूड़ों की समस्याओं का सबसे प्रमुख कारण है। 

मसूड़ों की बीमारियां 
मसूड़ों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। पर हाल के कई अध्ययनों में यह बात उभरकर आई है कि 35 वर्ष की उम्र के बाद मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस उम्र में हर चार में से तीन लोग मसूड़ों की किसी-न-किसी बीमारी से पीड़ित होते हैं। 

सबसे आम है जिन्जीवाइटिस 
यह मसूड़ों की सबसे आम समस्या है। इसमें मसूड़े सूखकर लाल हो जाते हैं और कमजोर पड़ जाते हैं। कई लोगों में दांतों के बीच में उभरा हुआ तिकोना क्षेत्र बन जाता है जिसे पेपीले कहते हैं। इसका मुख्य कारण सफेद रक्त कोशिकाओं का जमाव, बैक्टीरिया का संक्रमण और प्लॉक हो सकता है। जिन्जीवाइटिस से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की साफ-सफाई का खास ख्याल रखा जाए। प्रतिदिन 1,000 मिलीग्राम विटामिन सी का सेवन इस रोग में बहुत लाभदायक है। विटामिन सी के लिए प्राकृतिक स्नोतों पर ही निर्भर रहना बेहतर होगा। 

पायरिया 
अगर ब्रश करने या खाना खाने के बाद मसूड़ों से खून बहता है तो यह पायरिया के लक्षण हैं। इसमें मसूड़ों के ऊतक सड़कर पीले पड़ने लगते हैं। इसका मुख्य कारण दांतों की ठीक से सफाई न करना है। गंदगी की वजह से दांतों के आसपास और मसूड़ों में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। पायरिया से बचने के लिए जरूरी है कि मुंह की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। कुछ भी खाने के बाद ब्रश करने की आदत डाल लें। 

पीरियोडोंटिस 
यदि समय रहते जिन्जीवाइटिस का उपचार नहीं किया जाता है तो यह गंभीर रूप लेकर पीरियोडोंटिस में बदल जाती है। पीरियोडोंटिस से पीड़ित व्यक्ति में मसूड़ों की अंदरूनी सतह और हड्डियां दांतों से दूर हो जाती हैं और पॉकेट बन जाते हैं। दांतों और मसूड़ों के बीच स्थित इस छोटी-सी जगह में गंदगी इकट्ठी होने लगती है और मसूड़ों और दांतों में संक्रमण फैल जाता है। यदि ठीक से उपचार न किया जाए तो दांतों के चारों ओर मौजूद ऊतक नष्ट होने लगते हैं। इससे दांत गिरने लगते हैं। 

मसूड़ों का रखें ख्याल 
दिन में दो बार ब्रश करें। कुछ भी खाने के बाद कुल्ला जरूर करें। अधिक गर्म चीजें न खाएं। ज्यादा कड़क ब्रिसल वाले ब्रश से दांत साफ न करें। विटामिन ‘सी’ का सेवन अधिक करें। इसके लिए फलों और सब्जियों का सेवन करें। इससे मसूड़े स्वस्थ रहते हैं। काबरेनेटेड और अन्य पेय पदार्थों का सेवन कम करें। 

डायबिटीज भी बड़ा कारण 
दांत और मसूड़ों की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों में इसकी आशंका अधिक रहती है। ऐसे मरीजों में ब्लड ग्लूकोज का स्तर अधिक होता है। इससे दांतों पर जमे प्लॉक में बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं। इससे मसूड़े कमजोर हो जाते हैं। ब्लड ग्लूकोज का स्तर यदि हमेशा ज्यादा बना रहता है तो दांतों के गिरने की आशंका भी बढ़ जाती है। अगर 45 वर्ष से अधिक उम्र के डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति धूम्रपान करते हैं तो उनका दांत और मसूड़ों की बीमारी से बचना लगभग असंभव हो जाता है(शमीम खान,हिंदुस्तान,दिल्ली,25.1.12)।

6 टिप्‍पणियां:

  1. यह समस्या तो बहुतों के साथ होती है...

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  3. बहुत अच्छी जानकारी है !
    आभार .....

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  4. रोज सुबह शाम ब्रश और खाने के बाद कुल्ला करना आवश्यक है । अक्सर कुल्ला करने को लोग असभ्य मानते हैं ।

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  5. डयबिटिज़ का इस बीमारी से स्म्बंध मेरे लिए नई जानकारी है।
    सतर्क रहना होगा।

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