शनिवार, 17 दिसंबर 2011

अर्टिकेरिया (शीतपित्त) है शीतऋतु का रोग

अर्टिकेरिया त्वचागत रोगों के सर्वाधिक हठीला तथा दुःसाध्य रोग है, जिसकी उत्पत्ति दूषित आहार-विहार, खानपान, अत्यधिक तेल, चटपटे, मसालेदार खाद्य पदार्थ तथा तेज नमक-मिर्च, अचार, सर्द-गर्म भोजन से यह एलर्जी का रूप लेकर शीतपित्त या अर्टिकेरिया की उत्पत्ति करता है। ठंडी हवा के संपर्क से वात एवं कफ दूषित होकर पित्त के साथ मिलकर त्वचा पर लाल चकत्ते की उत्पत्ति करता है। इसे हम पित्ती, शीतपित्ती तथा एलर्जी के कारण उत्पन्ना रोग को अर्टिकेरिया कहते हैं। जिसमें सारे शरीर में स्थान-स्थान पर लाल सुर्ख चकत्ते उत्पन्ना होकर जोरों की खुजली उत्पन्ना करते हैं। जिसमें यह खुजलाने से या रगड़ने से और अधिक खुजली उठती है। आधुनिक मतानुसार यह एक प्रकार का एलर्जिक रोग है, जिसमें हिस्टामीन नामक एक टाक्सिस त्वचा में प्रवेश कर खुजली के साथ चकत्ते पैदा कर इसकी उत्पत्ति करता है। जिसमें ततैया या किसी कीड़े के काटने के समान सूजन के साथ लालमोटी पर्त उभरकर आती है।

अर्टिकेरिया (शीतपित्त)  के कारण 
यह रोग प्रकृति विरुद्ध आहार, स्वेद ग्रंथियों की क्रिया का अभाव, त्वचा में खुश्की आदि के साथ सीमेंट, लोहा, नमक, चीनी, पेंट आदि के कारखानों में काम करने वाले व्यक्तियों में धूल तथा फूल के साथ डीजल, पेट्रोल की गंध आदि से एक विशेष प्रकार का स्फुरण त्वचा में पैदा कर इस रोग की उत्पत्ति करता है। इसके अलावा संयोग विरुद्ध भोजन जैसे दूध के साथ नमक का प्रयोग, दही के साथ मछली, दूध के साथ शराब, सर्दियों में कोल्डड्रिंक, बर्फयुक्त पानी, लस्सी तथा कफवर्धक पदार्थों का सेवन, व्यायाम या थकावट, परिश्रम के बाद ठंडे जल से स्नान, आइसक्रीम के बाद कॉफी या गर्म पदार्थों के बाद ठंडे पदार्थों का सेवन, उच्चशक्ति की एन्टीबायोटिक औषधि का दुष्प्रभाव, जैसे कारण अर्टिकेरिया रोग की उत्पत्ति करते हैं। 

खानपान...
भोजन में नमक , तेल, मिर्च, अचार, दही तथा जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी हो उसका सेवन न करें। दूध, दलिया, हरी सब्जियाँ, ऋतु के अनुकूल फल, चीकू, अनार, पपीता, आदि का प्रयोग करें।

एसी तथा कूलर से एकाएक बाहर गर्म वातावरण में न जाएँ।

सर्दियों में ठंडी हवा से बचने हेतु गर्म कपड़ों का प्रयोग करें। सिर तथा पैरों को ढँककर रखें। धूल तथा एलर्जीजन्य कारणों से दूर रहें।

व्यायाम के बाद पसीना पोंछकर कुछ समय बाद स्नान करें।

प्राकृतिक उपचार... 
 गोले के तेल में कपूर मिलाकर शरीर में लगाएँ। रात्रि में सोने के पूर्व २ ग्राम हल्दी, ३ ग्राम सौंठ पाउडर दूध में उबालकर लें। खुजली होने पर कालीमिर्च पीसकर गोले के तेल में मिलाकर शरीर पर लगाएँ।

चिकित्सा की दृष्टि से... 
 कुशल आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में शीत पित्त भजन रस, रस माणिम्मगंधक रसायन, अमृता सत्व आदि के साथ आरोग्यवर्धनी कैशोर गुगल आदि का प्रयोग उपयोगी है। (वैद्य अच्युत कुमार त्रिपाठी,सेहत,दिसम्बर द्वितीयांक,2011,नई दुनिया)

14 टिप्‍पणियां:

  1. सर्दी के मौसम में आपके टिप्स काफी उपयोगी साबित होंगे ....आभार

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  2. विषम भोजन की अच्छी जानकारी मिली ... सार्थक पोस्ट

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  3. ऐसा होता तो रहत है। इसका वैज्ञानिक कारण नहीं पता था। आज जान गए।
    उपचार भी जाना।
    पहले की ही पद्धति ही सही थी, जब हम रोज़ स्नान के पहले सरसों का तेल मल-मल कर लगाते थे।

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  4. Dr AK Tripathi ji apna mob no dene ki kripa kare

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  5. Dr AK Tripathi ji apna mob no dene ki kripa kare

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  6. मैं 1985से शीत पित्त (अर्टिकेरिया,अस्थमा,जुकाम)से पीडित हूँ।एलोपैथी में इसका पक्का ईलाज नहीं है।मैंने कई वर्षों तक एविल तथा डेक्सोना की 20-20 गोलियांप्रति दिन खाई है।बाद में एलर्जी टेस्ट के उपरांत कुछ निश्चित दवाओं पर निर्भर हूँ।आयुर्वेद इसमें काफी सहायक है।

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  7. मगर अब मेरी स्मरण शक्ति काफी कमजोर हो गई है।

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  8. Iska alopathi me koi ilaz hai hi Nahi isko sirf aayurved hi thik kar sakti hai please muje bhi koi suggestions do Mai bhi 6 month se pereshan hu

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  9. मैं तीन साल से इस परेशानी से ग्रस्त हु और अब होम्योपैथी पर हु तोड़ा आराम है मगर मेरी स्मरण शक्ति कमजोर हो गयी है । this disease like a hell . M too frustrated .

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  10. Mai ek saal se bahut pareshan hu. Aap please upay batae .

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  11. Meri beti 3 sal ki h meri beti ko ye kabhi b ho jati h m kya kru qki meri beti ko is karan tej bukhar b ajata h or pair me b dard hota h vo chal nhi pati hai? M kya karu kripya sujhav de filhal mne child specialist ko dikhaya h ab 5th bar hui h use ye allergy kindly suggest me

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  12. Mujhe bhi ye bimari ho gyi...kuch pata nhi tha aj SE pehle iske bare me...aj ye padhke pata chla ki actually mujhe ye hi bimari hai...kya karu kaise sahi hoga

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