गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

क्या आप जागरूक हैं मिलावट के खिलाफ?

खाद्य पदार्थ के मूल रूप के अतिरिक्त किसी भी अन्य पदार्थ की उपस्थिति जो उस खाद्य की गुणवत्ता, रचना व प्रकार का स्तर कम कर दे साथ ही व्यक्ति के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाले ऐसे खाद्य पदार्थों को मिलावटयुक्त खाद्य पदार्थ कहा जाता है। 

खाद्य सामग्रियों में मिलावट रोजमर्रा की बात है जैसे कालीमिर्च में पपीते के बीज, धनिए में लक़डी का बुरादा या घोड़े की लीद, लालमिर्च में ईंट का चूरा, यहाँ तक की दवाइयों में भी मिलावट होने के कारण ये प्राणरक्षक की बजाय प्राणघातक भी हो सकती हैं। ताजे विश्लेषण के अनुसार बाजार में बिकने वाले २४.३ प्रतिशत गुड़, शकर व शहद, ४५ प्रतिशत दूध व दूध से बने खाद्य पदार्थों, २० प्रतिशत खाने के तेल, ३२ प्रतिशत दाल और चावल, ३४ प्रतिशत हल्दी, हींग और मसाले, ५२ प्रतिशत पेय पदार्थ व १० प्रतिशत चाय की पत्तियों में मिलावट होती है ।

खाद्य पदार्थों में मिलावटें

चाय : चाय की पत्ती में काजू का जला छिलका व चने के छिलके में कोलतार मिलाकर मिलाया जाता है। 

हींग : स्टार्च, रेत, खडिया व बरोजा मिलाया जाता है।

केसर : भुट्टे के बाल, सूर्यमुखी, फूल के रेशे को अम्लीय कोलतार रंगों में रंगकर केसर जैसा रूप दे दिया जाता है।

मद्यपान : मदिरा में मेथिल एल्कोहल तथा क्लोरल हाइड्रेट की मिलावट की जाती है। मेथिल अल्कोहल के १५ मिली लीटर डोस से मनुष्य की आँखों की ज्योति खो जाती है और इसके अधिक पीने पर मृत्यु हो सकती है।

रंग : रंग का उपयोग मिठाइयों, आइस्क्रीम, पेय पदार्थ, आइसकेंडी, मुरब्बे, चाकलेट व कस्टर्ड आदि में किया जाता है। रंगों के उपयोग का मुख्य उद्देश्य खाद्य वस्तुओं के दानों को छिपाकर उन्हें अधिक आकर्षक दिखा रहे।  

खाद्य पदार्थों में आमतौर पर दो प्रकार के रंगों का उपयोग किया जाता है। प्राकृतिक और कोलतार। कोलतार रंग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। अम्लीय और क्षारीय। केवल १० अम्लीय कोलतार रंगों को ही खाद्य पदार्थ में मिलाया जा सकता है। इनमें 5 लाल,2 पीले,1 नीला और 2 हरे रंगों को खाद्य वस्तुओं में मिलाना पूर्णतः निषिद्ध है क्योंकि वे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिप्रद हैं। 

मिलावट रोकने के प्रयास 
1954 में,मिलावट निरोधक अधिनियम बना जिसे पीएफआईए भी कहा जाता है। जो भी खाद्य पदार्थ पीएफए के द्वारा बनाए गए न्यूनतम स्तर के अंतर्गत नहीं आता,उसे मिलावटी माना जाता है। इस नियम के अनुसार,कोई भी नागरिक खाद्य सामग्री के नमूने को पब्लिक हेल्थ लैब में ले जाकर जांच करवा सकता है। यदि रिपोर्ट में मिलावट सिद्ध होती है तो व्यापारी को कानूनी सज़ा व ज़ुर्माना दोनों का भुगतान करना पड़ता है। अतः,जहां तक हो सके,कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उसका अच्छी तरह निरीक्षण कर लें व लेबल देखें(डॉ. संगीता मालू,सेहत,नई दुनिया,दिसम्बर प्रथमांक 2011)।

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रविष्टि.। मेरे नए पोस्ट 'आरसी प्रसाद. सिंह" पर आकर मुझे प्रोत्साहित करें ।.बधाई ।

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  2. बहुत अच्छी बड़ी काम की जानकारी है !
    जागरूक करती पोस्ट आभार !

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  3. बड़े ज़ालिम लोग होते हैं मिलावट करने वाले । इन्हें तो जेल में डाल देना चाहिए ।

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