शनिवार, 26 नवंबर 2011

ओस्टियोपोरोसिस को साधारण बैक-पेन न समझें

हड्डी में दर्द अब बड़ी समस्या बनता जा रहा है। बदलते लाइफ स्टाइल और खानपान में लापरवाही के कारण कमजोर हो रही हड्डियां एक समय के बाद परेशानी पैदा करने लगती हैं। कई लोगों में यह समस्या हड्डियों में फ्रैक्चर तक पहुंच जाती है, जिसे ओस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि दिल्ली में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। सौरभ सुमन बता रहे हैं कि आप कैसे बच सकते हैं इस समस्या से। 

दक्षिण दिल्ली में रहने वाले नीरज बंसल अक्सर हड्डी संबंधी समस्या से परेशान रहते हैं। डॉक्टर से मिलने के बाद उन्हें बताया गया कि आपके शरीर की हड्डियां काफी कमजोर हो गई हैं और इसमें जब तब फ्रैक्चर होता है। नीरज बंसल को डॉक्टर ने ओस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी से पीड़ित होने की बात कही। दरअसल मेडिकल भाषा में हड्डियों में बार-बार फ्रैक्चर आने की यह समस्या ओस्टियोपोरोसिस कहलाती है। डॉक्टरों की मानें तो दिल्ली वालों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली जैसे महानगर में खराब लाइफ स्टाइल, दौड़ भाग की जिंदगी और असतुंलित खान-पान इसका बड़ा कारण है। यही वजह है कि लोगों के शरीर में हड्डियों के फ्रैक्चर होने की शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों की राय में आने वाले दो सालों में भारत में ओस्टियोपोरोसिस के रोगियों की संख्या लगभग 36 मिलियन हो जाएगी। आम तौर पर 83 प्रतिशत स्पाइनल फ्रैक्चर की वजह ओस्टियोपोरोसिस है। 

क्या है ओस्टियोपोरोसिस 
एक प्रकार की बीमारी है, जिसमें हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर आना शुरू हो जाता है। इसमें हड्डियों में सिकुड़न और अस्थिमजा्जा की मात्र में कमी आ जाती है। यही वजह है कि हड्डियां काफी कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर की समस्या बढ़ जाती है। गौर करने वाली बात है कि इस बीमारी का प्रभाव हिप(नितंब), रीढ़ की हड्डी और कलाई की हड्डियों पर सबसे ज्यादा होता है। 

जीवन को करता है प्रभावित 
-हड्डियों में दर्द की शिकायत 
-शारीरिक तौर पर सक्रियता में कमी आने लगती है, जिससे मरीज डिप्रेशन में भी आ जाता है 
-काम करने की क्षमता में आती है गिरावट 
-देखभाल करने वाले की परेशानी बढ़ जाती है 
-शारीरिक-मनोवैज्ञानिक क्षमता में कमी आती है 

क्या हैं लक्षण 
-अचानक से बैक पेन -बैक पेन में आगे-पीछे मुड़ने में तकलीफ -हड्डियों में हमेशा दर्द रहता हो -शरीर के वजन में कमी आना -लंबाई में कमी आ जाना 

क्या है वजहें 
-शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती है और इसी वजह से हड्डियों में फ्रैक्चर होते हैं। इसलिए भोजन में पर्याप्त मात्र में विटामिन डी और कैल्शियम की मौजूदगी जरूरी है। 
-कम एक्सरसाइज करना और अधिक दिनों तक बेड रेस्ट करने से भी ओस्टियोपोरोसिस हो सकता है। 
-अधिक अल्कोहल का सेवन करना और सिगरेट अधिक पीना हड्डियों में फ्रैक्चर की आशंका बढ़ा देता है। 
-धूप से दूर रहने से भी विटामिन डी की कमी हो सकती है। 

क्या है इलाज 
-विटामिन डी और कैल्शियम युक्त खाना खाएं 
-डॉक्टरों की बताई गई बोनफ्रैंडली एक्सरसाइज नियमित रूप से करें 
 -वर्टिकल फ्रैक्चर में पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करें 
-फिजियोथेरेपी में जो मरीज मेडिकल थेरेपी से बचना चाहते हैं, वो बैलून केफोप्लास्टी जैसी विधि अपना सकते हैं। लेकिन इसमें यह ध्यान रखें कि खासकर स्पाइनल डिसऑर्डर होने पर न्यूरो या स्पाइन के डॉक्टर से ही मिलें। 

खास बातें 
-ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक होती है 
-बढ़ती उम्र के साथ रोग की आशंका बढ़ती है 
-कम लंबी और पतली-दुबली महिलाओं में हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा अधिक होता है 
-परिवार के किसी सदस्य में अगर यह समस्या रही है तो अन्य सदस्यों में भी ओस्टियोपोरोसिस होने की आशंका रहती है 
-कुछ दवाइयां ओस्टियोपोरोसिस को बढ़ा देती हैं, इसलिए डॉक्टरी सलाह के बिना कोई दवा न खाएं 

क्या कहते हैं डॉक्टर 
साधारण बैक पेन न समझो
स्पाइनल फ्रैक्चर्स की वजह से हुए ओस्टियोपोरोसिस को लोग कई बार साधारण बैक पेन या फिर ऑर्थराइटिस की तरह ही लेते हैं और मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं समझते। इसलिए सही समय पर इलाज नहीं हो पाता। डॉ. हर्षवर्धन हेगड़े, सीनियर कंसल्टेंट, फोर्टिस हॉस्पिटल, वसंत कुंज, नई दिल्ली समय पर उपचार और निदान जरूरत आने वाले दिनों में ओस्टियोपोरोसिस फ्रैक्चर्स और उस पर होने वाले खर्च बढ़ने वाले हैं, इसलिए सभी तरह के ओस्टियोपोरोसिस का पूर्व उपचार और निदान हमारा मुख्य लक्ष्य होना चाहिए। इससे रोग का दबाव घटेगा और लोग बेहतर जिंदगी जी सकेंगे। डॉ. पुनीत गिरधर, ऑर्थोपॉडिक्स कंसल्टेंट, बीएलके सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल(हिंदुस्तान,दिल्ली,23.11.11)। 


सुबह सात बजेः 


नाड़ी-शुद्धि में सहायक है पद्मासन

5 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी अच्छी जानकारी मुफ्त में मुहैया करने के लिए आभार जागरूक तो हमको रहना ही पड़ेगा.......

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  2. बहुत बढिया जानकारी दी।

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  3. किसी भी बीमारी से होने वाले नुकसान से बचने के लिए जागरूकता सब से ज्यादा ज़रूरी है और इस जागरूकता को बढ़ाने मे आपकी पोस्ट एक बहुत लाभ दायक है .... आभार

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  4. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती है आपकी हर पोस्ट ..अच्छी जानकारी मिली .

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