रविवार, 27 नवंबर 2011

पद्मासन से शुद्ध होती हैं नाड़ियां

बैठकर किए जाने वाले आसनों में पद्मासन को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इससे योगी लंबे समय तक ध्यानमग्न रह सकता है। पद्मासन सिद्ध करने वालों को मानसिक और शारीरिक लाभ दोनों हासिल हो जाते हैं। पाचन शक्ति ठीक होती है और नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं। 

ध्यान लगाने के लिए एक घड़ी तक निश्चल बैठना जरूरी होता है। एक अनुमान है कि एक घड़ी ४५ मिनट की होती है। ४५ मिनट तक निश्चल बैठना तभी संभव है जब पैरों से लेकर नितंब तक कोई रक्त नलिका में रक्त प्रवाह बाधित न हो। पद्मासन इसके लिए उपयुक्त आसन है। 

कैसे करें 
दाहिना पाँव बाईं जंघा पर और बायाँ पाँव दाहिनी जंघा पर रखिए। दोनों पाँव दोनों जंघाओं पर ठीक प्रकार आ जाएँ फिर बाएँ घुटने पर बाया और दायाँ हाथ दाएँ घुटने पर रखिए। पीठ, कमर, गला, सिर, पृष्ठवंश सीधा समरेखा में रखिए, चाहे अपनी दृष्टि भूमध्य पर अथवा नासिकाग्र पर रखिए, किंवा किसी बाह्य बिंदु पर भी रख सकते हैं। इस आसन को पद्मासन या कमलासन भी कहते हैं। 

अर्ध पद्मासन 
कइयों की जंघाएँ इतनी मोटी होती हैं कि उनके दोनों पाँव दोनों जंघाओं पर किसी भी तरह नहीं आ पाते हैं। शुरू में वे इस आसन को नहीं कर सकते। इन्हें शुरू में "अर्ध पद्मासन" लगाना चाहिए और फिर पद्मासन लगाने का प्रयत्न करना चाहिए। एक ही पाँव दूसरे पाँव की जंघा पर रखने से अर्ध पद्मासन होता है। पाँवों के हेर-फेर से दोनों ओर के आसन इसप्रकार ही बन सकते हैं। पूर्ण पद्मासन से पाँवों की नस-नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं, और ध्यानादि के लिए एक ही आसन पर अधिक देर तक बैठना सुगम होता है। पद्मासन में बैठकर पेट की पसलियों को ऊपर खींचने से कुछ देर वहाँ ऊपर ही रखने से पाचन-शक्ति बढ़ जाती है और पेट की आम-वायु दूर होती है। 

पद्मासन में बैठकर कंठमूल में ठोड़ी लगाने से और पृष्ठवंश सीधा रखने से मस्तिष्क का मज्जा-प्रवाह बढ़ता है, इसी कारण इससे विचार-शक्तिबढ़ती है। कई लोग इस पद्मासन को करने के समय हाथ बीच में रखते हैं, बहुत-से अपने हाथों को ऊपर करके सिर के ऊपर हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं, और हाथ वैसे ही वहाँ रखते हैं। इसको "पर्वतासन" कहते हैं। इससे पेट और छाती के स्नायुओं में अच्छी प्रकार ऊपर का खिंचाव आता है, और उक्त स्नायुओं को लाभ पहुँचता है। इसको पर्वतासन इसलिए कहते हैं कि इसकी शक्ल पर्वत जैसी बनती है। दो-चार मिनट इस आसन में बैठ जाने से छाती और पेट के स्नायुओं में अच्छी तरह खिंचाव होता है। कई लोग पद्मासन में बैठकर हाथों से "ताड़ासन" करते हैं। 

हाथ ऊपर, नीचे, बीच में और तिरछा करके सीधा बाहर खींचते हैं। एक ही समय में विभिन्ना आसनों के भागों को मिलाने से बड़े लाभ होते हैं। ताड़ासन के हाथों का खिंचाव दोनों का तथा एक-एक का भी हो सकता है। पद्मासन में बैठकर दायाँ हाथ बाएँ घुटने पर रखिए और अपना घड़ बाईं ओर घुमाइए, चाहे बायाँ हाथ ज़मीन पर सहारे के लिए रखकर अपनी छाती जितनी पीठ की ओर जा सकती है, उतनी घुमाइए। ऐसा करने से कमर और पेट के स्नायुओं पर अच्छी तरह खिंचाव आ जाएगा। छाती जितनी पीछे की ओर जाना संभव है, उतनी जाने के बाद वहाँ ही ठहर जाइए। 

ध्यान रखिए कि पद्मासन के पाँव जहाँ थे वहाँ ही स्थिर रहने चाहिए और कमर के ऊपर का ही भाग घूमाना चाहिए। इसी प्रकार दूसरी ओर भी घुमा सकते हैं। गर्दन भी पीठ की ओर जितनी अधिक घुमाई जा सकती है उतनी अधिक घुमानी चाहिए। पेट को ठीक करने के लिए यह आसन अत्यंत सुगम है और अति लाभदायक है। धड़ घुमाने अर्थात्‌ धड़ का भ्रमण करने के लिए इसको "भ्रमरासन" कहते हैं। इसके करने से पेट के कई दोष दूर होते हैं। यद्यपि यह आसन सुगम है तथापि इसका अत्यंत महत्व है और यह अत्यंत लाभदायक भी है। इस आसन में ठोड़ी कंठमूल में डटकर लगाने से बहुत आरोग्य मिलता है। इससे स्त्री-पुरुष अपना आरोग्य बढ़ा सकते हैं। (श्रीपाद दामोदर सातवलेकर की पुस्तक "योग के आसन" के अंश) 

पद्मासन के लाभ -
पद्मासन लगाने से रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है। इसका नियमित अभ्यास करने से रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने की आदत बनती है यानी पॉश्चर सुधरता है। -शरीर में विषैले पदार्थों का जमावड़ा कई बीमारियों का कारण बनता है। कुछ देर पद्मासन में बैठने के बाद आसन खोलने पर जोड़ों में रक्त का प्रवाह तेज़ हो जाता है।जमा विषैले पदार्थ और संक्रमण खून के तेज़ प्रवाह के साथ बह जाते हैं जिससे बीमारियों का ख़तरा कम हो जाता है। -माहवारी की तकलीफों को दूर करने में सहायक है। -यह आसन लगाने से रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर जो प्रभाव पड़ता है,वह पूरे तंत्रिका तंत्र के लिए आरामदायक होता है। -पद्मासन से एकाग्रता बढ़ती है। इस आसन पर हुए शोध अध्ययनों से मालूम हुआ है कि इससे ब्रह्मचर्य साधने में आसानी होती है(नई दुनिया,नवम्बर तृतीयांक 2011)। 


शाम सात बजे पढ़िएः 


छुहारे में हैं बड़े-बड़े गुण

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर सहमत हूँ ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. ... अब तो इस आसन को करने में टांगें साथ ही नहीं देतीं।

    उत्तर देंहटाएं
  3. निःसंदेह पद्मासन लाभकारी है लेकिन लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि योगदर्शन में यह आसन नहीं पाया। यह क्या सूर्य नमस्कार आदि आसन भी उसमें नहीं पाए जाते। उसमें तो मात्र सुखासन का ही ज़िक्र है।
    आशा है कि आपके पाठकों के लिए यह जानकारी नई होगी।

    उत्तर देंहटाएं
  4. कल 28/11/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  6. बढिया जानकारी दी आपने , बचपन से करते चले आ रहे हैं ये आसन ।धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  7. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. योग के विषय में,विस्तृत जानकारी के लिया धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  9. योग से जीवन सच में खूबसूरत हो जाती है आपकी इतनी अच्छी जानकारी का हम स्वागत करते हैं | शुक्रिया |

    उत्तर देंहटाएं
  10. “योग भगाये रोग”
    बढ़िया प्रस्तुति....
    सादर...

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।