मंगलवार, 22 नवंबर 2011

ठंड के महीनों में दिल को चाहिए ज़्यादा हिफ़ाज़त

हदय रोगों के लिए सर्दी के महीने बेहद घातक होते हैं । ठंडे मौसम का हृदय रोगों से गहरा संबंध होता है । हृदय एवं रक्त संचार कई तरह से प्रभावित होते हैं । गाढ़ा हो जाने से रक्त का लसलसापन बढ़ जाता है । पतली रक्त नलिकाएं और संकरी हो जाती हैं । इससे रक्त का दबाव बढ़ जाता है, दिल की धड़कन भी बढ़ जाती है। 

जाड़े की दस्तक के साथ ही मौज-मस्ती का सिलसिला शुरू हो रहा है । क्रिसमस से लेकर पूरे जनवरी महीने तक बेफिक्री का आलम रहेगा। रंग में भंग डालने की मेरी कोई मंशा नहीं है लेकिन मौज-मस्ती के अपने धांसू आइडिया के साथ अपने दिल की खैरियत के खयाल की गठरी भी बांध लें तो बेहतर होगा । इस दौरान दिल की तरफ से बेतकल्लुफ हो जाना खतरे से खाली नहीं है । ब्रिटेन के चर्चित कवि टी. एस. इलियट की तर्ज पर कहें तो दिल की परवाह नहीं की तो ये महीने सबसे निर्दयी साबित हो सकते हैं । खाने-पीने का दौर ही नहीं, जाड़े की ठिठुरन भी घातक साबित होती है । सीधे कहें तो इन महीनों में दिल के दौरे का खतरा बहुत बढ़ जाता है । उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोग तो खास खयाल रखें । हदय रोगों के लिए ये महीने सबसे घातक होते हैं । 

ठंडे मौसम का हृदय रोगों से गहरा संबंध होता है । हृदय एवं रक्त संचार कई तरह से प्रभावित होते हैं । गाढ़ा हो जाने से रक्त का लसलसापन बढ़ जाता है । पतली रक्त नलिकाएं और संकरी हो जाती हैं । इससे रक्त का दबाव बढ़ जाता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है । यह स्थिति दिल के मरीजों के लिए तो ठीक नहीं ही है, उनके दिलों के लिए भी घातक हैं जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा एवं कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों से लैस हैं । इस मौसम में श्वसन से संबंधित बीमारियां होती हैं जो दिल पर बुरा असर डालती हैं । जाड़े में लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं । उच्च रक्तचाप एवं खून को पतला करने सहित अन्य जरूरी दवाइयों से बचते हैं । मस्ती के दौरान उन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते जो दिल के दौरे की तरफ इंगित करते हैं । छाती के दर्द तक को गैस या अपच के कारण हुआ समझने की भूल करते हैं । जाड़े में अधिक समय तक ठंड में रहने और खुली जगह में शारीरिक मेहनत करने से बचें तभी आपके दिल की गर्मजोशी बरकार रहेगी । 

होम्योपैथ 
हृदय रोगों से बचाव के लिए हमेशा तत्पर रहने की जरूरत है । ३५-४० वर्ष के लोगों में आजकल हृदय रोग के ज्यादा मामले देखे जा रहे हैं । इसकी मुख्य वजह अतिरिक्त वसा वाला भोजन, आरामतलब जीवन, तनाव एवं फास्ट फूड आदि माना जा सकता है । सर्दियों में अतिरिक्त वसा युक्त भोजन, मांसाहार, शराब आदि का सेवन हृदय रोगों को आमंत्रण देता है । देखा जा रहा है कि बच्चों और युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है । यह भी हृदय रोगों का कारण है । आजकल हृदयघात के लिए लाइपोप्रोटीन, फीनोटाइप, इन्सुलिन प्रतिरोध, हिमोसिस्टीन आदि भी जिम्मेदार हैं । 

नए शोध बताते हैं कि सर्दियों में लोग ज्यादा धूम्रपान करते हैं । इससे थ्रामबोसिस की संभावना बढ़ जाती है । महिलाओं में ज्यादा गर्भनिरोधी गोलियों का सेवन भी थ्रामबोसिस को बढ़ा देता है और हृदयघात हो सकता है । सर्दियों में नमक का ज्यादा सेवन भी उच्च रक्तचाप को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है । सर्दियों में घुटनों के रोग व रुमेटाइड आर्थराइटिस आदि की वजह से भी हृदय रोगों में अधिकता देखी जाती है । आवश्यकता है कि लोग सर्दियों में अपनी जीवनशैली स्वास्थ्यवर्द्धक रखें । नियमित व्यायाम, लंबी सैर, सादा भोजन, तनाव से मुक्ति आदि हृदय रोग से मुक्ति के नहीं बल्कि संपूर्ण आरोग्य के नुस्खे हैं। होम्योपैथी में हृदय रोगों से बचाव व उपचार की अच्छी औषधियां उपलब्ध हैं। हृदय में थक्का बनने से रोकने के लिए एलियबसिपा,लैकेसिस,डिजिटेलिस,एकोनाइट आदि दवाएं बेहद प्रभावी हैं लेकिन ध्यान रहे कि होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श के बिना दवाएं न लें। 

आयुर्वेद 
वैसे तो दिल की बीमारी रोगी से हमेशा सावधानी मांगती है पर सर्दियों में अधिक सतर्कता बरतनी जरूरी हो जाती है । सर्दियों में हृदयरोगियों को कुछ विशेष एहतियात बरतने चाहिए । जैसे बहुत अधिक परिश्रम, तीक्ष्ण आहार एवं गरिष्ठ भोजन आदि से बचना चाहिए । गर्म-सर्द से बचने का हर संभव प्रयास करना चाहिए । सर्दियों में मल-मूत्र रोकने व चिंता करने से बचने की पूरी कोशिश करनी चाहिए । आयुर्वेद में हृदय रोगियों के लिए कुछ ऐसे उपाय हैं जो सर्दियों में उनके हृदय की देखभाल के लिए हितकारी हैं । 

ठंड से बचाव व रक्तचाप सुचारु रखने के लिए वक्ष स्थल पर वात नाशक तेल या मोम तेल की मालिश करें । आमतौर पर लोग सर्दियों में आलस्य व ठंड की वजह से प्रातः काल टहलने में आनाकानी करते हैं पर इस मौसम में सुबह स्वच्छ वायु में टहलना बहुत आवश्यक है । हो सके तो प्राणायाम का अभ्यास भी करें । सर्दियों में आंवले का मुरब्बा, गुलकंद, चंदन का अवलेह, संतुलित मात्रा में मक्खन व मिसरी का सेवन, जौ, परवल, करेला, सेंधा नमक, मुनक्का, पुराना गुड़, सोंठ, अजवायन, लहसुन, अनार, अमलताश, नई मूली, अदरक, सिरका, मधु आदि दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हैं । सर्दियां बलकारक व रसायन औषधियों के प्रयोग का सही मौसम है इसलिए प्रतिदिन च्यवनप्राश, अश्वगंधा चूर्ण, नागबला चूर्ण, अर्जुन का चूर्ण आदि का सेवन हृदयरोगियों के लिए बहुत लाभकारी हैं । 

इसके अलावा, हृदयावर्ण रस, प्रभाकर वटी, चिंतामणि रस, हृदयरत्न चूर्ण, अर्जुनारिष्ट, पाठादि चूर्ण आदि का सेवन सर्दियों में लाभदायक है । सर्दियों में हृदयरोगियों को अपनी विशेष देखभाल करनी चाहिए । भोजन पर नियंत्रण व संतुलित शारीरिक श्रम सर्दियों में खुशहाल दिल की राह खोलती हैं(डाक्टर पुरूषोत्तम लाल से धनंजय की बातचीत, डाक्टर ए के अरूण से प्रियंका पांडेय पाडलीकर की बातचीत तथा डाक्टर आकाश परमार के विचारों पर आधारित यह आलेख संडे नई दुनिया, 20-26 नवम्बर,2011  के अंक में प्रकाशित है)।

11 टिप्‍पणियां:

  1. दिल के रोगों से बचने के लिए दिल का ख़याल रखने वाला एक दिलदार भी साथ चाहिए,
    आजकल डाक्टर यह भी बताते हैं।
    आपकी पोस्ट अच्छी है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत ही साथक पोस्ट जो इसको अनदेखा करते हैं आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. सजग करती पोस्ट..... अच्छी जानकारी मिली ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. उपयोगी जानकारी देने हेतु आभार !

    प्रस्तुत कहानी पर अपनी महत्त्वपूर्ण प्रतिक्रिया से अवगत कराएँ ।

    भावना

    उत्तर देंहटाएं
  5. उपयोगी जानकारी देने हेतु आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत अच्छी पोस्ट आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपने सर्दी आते ही अच्छा चेताया है ....हमलोग अक्सर लापरवाही कर देते हैं

    उत्तर देंहटाएं
  8. कुमार जी,
    दिल के मरीजो के लिए उपयोगी जानकारी आभार,
    उत्तम पोस्ट...
    मेरे नए पोस्ट पर आइये स्वागत है,

    उत्तर देंहटाएं
  9. बदलते मौसम में सजग करती पोस्ट बढ़िया जानकारी मिली आभार ....

    उत्तर देंहटाएं
  10. बड़े काम की बात बताई है आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  11. अच्छी जानकारी देती सार्थक पोस्ट

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।