शनिवार, 5 नवंबर 2011

अल्जाइमरः सचेत रहने से ही होगा बचाव

भूलने की बीमारी के सामान्य रूप को अल्जाइमर कहा जाता है। नवम्बर महीने को इस बीमारी के प्रति जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है। इस लाइलाज बीमारी के प्रति अधिक से अधिक जागरूकता फैलाकर ही हम अपना बचाव कर सकते हैं। अनुजा भट्ट बता रही हैं क्या है अल्जाइमर और कैसे हम इसकी चपेट में आने से बच सकते हैं-

चीजों को रख कर भूल जाना या बात करते करते रुक जाना और फिर सोचना कि आप क्या बात कर रहे थे जैसी गतिविधियों को उम्र बढ़ने के सामान्य लक्षणों के तौर पर रेखांकित किया जा सकता है। लेकिन जब किसी को अपना नाम न याद आ रहा हो या अपने बच्चों को पहचानने में दिक्कत हो रही हो तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। यह याददाश्त को प्रभावित करने वाली एक मानसिक गड़बड़ी है, जिसे डिमेंशिया कहा जाता है। अल्जाइमर इसी मानसिक गड़बड़ी का सबसे सामान्य रूप है। 

अल्जाइमर 60 साल साल या उससे अधिक उम्र के लोगों में हो सकता है। कम उम्र के लोगों में अमूमन यह नहीं होता है। भारत में 37 लाख लोग डिमेंशिया के शिकार हैं और इनमें से 90 फीसदी अल्जाइमर से पीड़ित हैं। इस बीमारी का अनुवांशिक नाता होने के कारण दुनिया के लोगों में यह आस जगी है कि इस बीमारी पर अब नियंत्रण कर पाना संभव हो सकेगा। सोलह साल में पहली बार इस रोग से संबंधित जीन के बारे में जानकारी मिली है और इस शोध ने वैज्ञानिकों को उन सिद्धांतों पर फिर से सोचने को प्रेरित किया है कि यह रोग कैसे पनपता है। 

अल्जाइमर स्मृति खो देने वाली मानसिक बीमारी है जिसमें एक स्थिति ऐसी आती है कि मरीज खुद को भी पहचान पाने में असमर्थ हो जाते हैं। अपना स्वयं का नित्यकर्म आदि कर पाना भी इनके लिए मुश्किल हो जाता है। लेकिन ऐसे मरीजों और इस गंभीर मर्ज से परेशान लोगों के लिए एक खुशखबरी है। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर रोग से संबंधित दो प्रमुख जीन्स को खोज निकाला है। 

ये जीन्स सोलह हजार डीएनए नमूनों पर चिह्न्ति किए गए थे और ये कोलेस्ट्रॉल के विघटन के लिए जाने जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस रोग के अनुवांशिक अध्ययन के जरिए इसके इलाज के नए रास्ते खुलेंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस खोज से परंपरागत दवाओं के माध्यम से इस रोग के इलाज के नए रास्ते खुलेंगे। दवाओं के बाजार में उतरने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। अल्जाइमर की सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि इसका अब तक कोई इलाज नहीं है। फिलहाल लक्षण की पहचान हो जाए तो दवाओं की मदद से इस समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। हालांकि दुनिया भर में इसके इलाज की खोज के लिए दवाएं विकसित करने की कोशिश हो रही है। 

इसके लक्षण 
छोटी-छोटी चीजें जैसे चाबियां, रिमोट, गैस पर दूध इत्यादि रखकर भूल जाना घर का नंबर या रास्ता भूल जाना नींद न आना, भूख का ध्यान न रहना, खाना भूल जाना हर समय तनाव में रहना, कुछ न कुछ सोचते रहना, चिड़चिड़ा होना, बात-बात पर गुस्सा होना इत्यादि इसके लक्षण हैं 

बचने के उपाय 
नियमित तौर पर व्यायाम करने से याददाश्त बढ़ सकती है। यही नहीं, वे अधिक दिनों तक भूलने की बीमारी का शिकार होने से भी बच सकते हैं हल्दी के औषधीय गुणों में डिमेंशिया बीमारी से निजात दिलाने की ताकत होती है खानपान पर विशेष ध्यान दें। ग्रीन टी, मछली, टमाटर, इत्यादि को अपने खानपान में शामिल करें हरी सब्जियों और अंगूर आदि फलों को अपने आहार में प्रमुखता से शामिल करें प्रतिदिन थोड़ी मात्र में अखरोट का सेवन अवश्य करें शहद को हर रोज किसी न किसी रूप में लेने से याददाश्त अच्छी रहती है पका कद्दू हफ्ते में एक बार अवश्य खाएं, यह याददाश्त बढ़ाने का अच्छा उपाय है 

कुछ सरल उपाय 
पुरानी बात याद करने की कोशिश कीजिए हिसाब-किताब जुबानी जोड़ने-घटाने की कोशिश कीजिए 

सावधानियां 
रोगी को घर से अकेले न निकलने दें बात-बात पर रोगी से बहस न करें रोगी को अकेलापन या बीमार महसूस न होने दें रोगी को दिनभर व्यस्त रखें(अनुराधा गोयल,हिंदुस्तान,दिल्ली,3.10.11)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. bahut hi badhiya jankari....
    apki salah par amal karenge..
    jai hind jai bharat

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  2. गज़नी ने इसे फ़ेमस कर दिया।

    आपका आलेख इसके विभिन्न पहलू को उजागर करता काफ़ी ज्ञानवर्धक है।

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