शनिवार, 19 नवंबर 2011

38 में भी नॉर्मल डिलिवरीःऐश से कुछ सीखिए!

बुधवार सुबह ऐश्वर्या राय ने बच्चन परिवार के नौंवे सदस्य को जन्म दिया और अब लगभग सारे डॉक्टर उनकी तारीफ कर रहे हैं। दरअसल, यह माना जाता है कि 32-33 साल के बाद पहला बच्चा सामान्यत: नॉर्मल नहीं, सिजेरियन से ही होता है। 

38 साल की ऐश्वर्या ने ऑपरेशन की बजाय नॉर्मल डिलीवरी से बच्चे को जन्म देकर सभी के लिए एक उदाहरण बना दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि आज के समय में ज्यादातर महिलाएं अपनी हेल्थ या दूसरी मजबूरियों के कारण ऑपरेशन से डिलिवरी करवाती हैं लेकिन ऐश ने यह बता दिया है कि चाहे कोई महिला कितनी भी अमीर या उम्र वाली क्यों न हो, सब नॉर्मल डिलिवरी करवा सकती हैं। 

आंकड़ों के मुताबिक बड़े शहरों में लगभग 60% महिलाएं ऑपरेशन से बेबी को जन्म देती हैं। कई लेडीज को ज्यादा उम्र के कारण नॉर्मल डिलीवरी में परेशानी होती है। डॉक्टरों के मुताबिक नॉर्मल डिलीवरी से पैदा होने वाले बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी दूसरे बच्चों के मुकाबले ज्यादा होती है। 

हमारे सहयोगी अखबार सांध्य टाइम्स के मुताबिक , दिल्ली-एनसीआर के प्राइवेट अस्पतालों में लगभग 75 से 80 % बच्चे ऑपरेशन से पैदा होते हैं। सरकारी अस्पतालों में केवल 40% बच्चे ही ऑपरेशन से होते हैं। 

बीएलके अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दिनेश कंसल ने बताया कि आजकल ऑपरेशन से होने वाली डिलिवरी के कई कारण रहते हैं। महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा आराम और डाइट लेती हैं। इसकी वजह से फैट बढ़ जाता है और नॉर्मल डिलीवरी में प्रॉब्लम होती है। आजकल बढ़ रहे डाइबिटीज से भी गर्भ के अंदर बेबी का साइज बढ़ जाता है। इस वजह से भी नॉर्मल डिलीवरी में परेशानी होती है। डॉ. कंसल ने बताया कि पैरेंट्स डिलिवरी के दौरान कई तरह के रिस्क से बचने के लिए भी अपॉपरेशन को तवज्जो देते हैं। जो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान जॉब करती हैं, वे एक्सरसाइज नहीं कर पाती और नॉर्मल डिलिवरी के लंबे दर्द से बचना भी ऑपरेशन का एक बड़ा कारण है। ऑपरेशन से बेबी डिलीवरी में केवल 40 मिनट लगते हैं, वहीं नॉर्मल डिलीवरी में 6 से 24 घंटे लग जाते हैं(नवभारत टाइम्स,18.11.11)। 


आज इसी विषय पर नई दुनिया के दिल्ली संस्करण में संदीप देव ने पूछा है कि ऐश्वर्या जब 38 साल की उम्र में सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म दे सकती है,तो फिर दिल्ली की महिलाएं क्यों नहीं? दिल्ली में 35 साल की उम्र की 60 से 70 फीसदी महिलाएं सिजेरियन के जरिए शिशु को जन्म देती हैं। चिकित्सकीय जटिलता के साथ-साथ प्रसव की असह्य पीड़ा से बचने के लिए भी महिलाएं सर्जरी का सहारा लेती हैं। अधिक उम्र की जो महिलाएं सामान्य प्रसव से बच्चे को जनने के लिए तैयार होती हैं,वो भी प्रसव पीड़ा से बचने के लिए एनेस्थीसिया डोज की मांग करती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐश्वर्या द्वारा सामान्य प्रसव से शिशु का जन्म महानगरीय महिलाओं को इसके लिए प्रेरित कर सकता है। 


दिल्ली के रॉकलैंड अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डाक्टर मधु गोयल बताती हैं कि आमतौर पर 30 फीसदी प्रसव ही सर्जरी से होते हैं,लेकि 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं में सर्जरी द्वारा शिशु जन्म की दर 70 फीसदी तक हो जाती है। अधिक उम्र की महिलाओं में उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी कई जटिलताएं उभर आती हैं। यही नहीं,बडी उम्र की महिलाएं प्रसव-पीड़ा से बचने के लिए भी सर्जरी पर दबाव डालती हैं। ऐसी महिलाएं सामान्य प्रसव के लिए तैयार हो भी जाती हैं तो एनेस्थीसिया की डोज अर्थात् एपीड्यूरल की मांग करती हैं ताकि प्रसव का अहसास ही न हो। ये दिल्ली की उच्च-मध्यवर्ग से आने वाली महिलाएं हैं। 


लेडी हार्डिंग अस्पताल की स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ.सीमा सिंघल के अनुसार,सरकारी अस्पताल में 80 फीसदी महिलाएं सामान्य प्रसव से बच्चे को जन्म देती हैं,हालांकि इनमें सामान्य तौर पर 18 से 33 साल की महिलाएं ही अधिक होती हैं। तैंतीस वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में सिजेरियन केस अधिक होता है। ऐसा उनमें उभर आई चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण होता है। सामान्य प्रसव से जन्मे बच्चों में रोग से लड़ने की क्षमता सिजेरियन बच्चों की अपेक्षा कहीं अधिक होती है। दिल्ली की आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. शिवानी सचदेव का कहना है कि 35 साल की उम्र की महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कुछ ज्यादा आराम करती हैं और खाना भी अधिक खाती हैं। इससे गर्भ के अंदर शिशु की गतिशीलता कम हो जाती है. अधिक भोजन से महिलाओं में मोटापा,मधुमेह आदि की समस्याएं देखने को मिलती हैं,जिससे सिजेरियन शिशु की संभावना बढ़ जाती है।

11 टिप्‍पणियां:

  1. ये आपने अच्छा नहीं किया, उनकी उम्र का राज़ खोलकर।

    बाक़ी बहुत कुछ सीखने वाली बात है इनमें!

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  2. बेचारे प्राइवेट नर्सिंग होम वाले! सामान्य प्रसव कराने लगेंगे तो कमा के क्या खाएंगे?

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  3. बहुत बढ़िया सार्थक पोस्ट !

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  4. Its not the problem of Mother or father, its issue with Doctors..They know one language only, MONEY.

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  5. And yes most of the Other cases related to luxury which Parents are having in their life style.

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  6. सभी महिलाओं के लिए सोचने का विषय तो है यह..... और डाक्टर्स के लिए भी....

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  7. फिलहाल तो बेबी बी की सबको खुशी है.एश्वर्या से बहुत सी महिलाये सीख सकती है.

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  8. इसमें डॉक्टरों की भी मेहनत रही होगी ।

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  9. मेरे नए पोस्ट भोजपुरी भाषा का शेक्शपीयर- भिखारी ठाकुर पर आपका इंतजार करूंगा । धन्यवाद

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  10. एकदम बिंदास बात है......दराल सर की बात में भी दम है....

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