बुधवार, 12 अक्तूबर 2011

स्वप्नदोष में आयुर्वेद

यौन-जीवन तभी सफल हो सकता है जब स्त्री और पुरूष दोनों स्वस्थ हों। पुरुषों के शरीर में वीर्य लगातार बनता रहता है। वीर्य को रखने के लिए स्थान की कमी पड़ जाती है। इसलिए, अंडकोष वीर्य को बाहर कर नए वीर्य बनाने के लिए पुराने वीर्य को बाहर कर देते हैं। इस तरह की क्रिया होना सामान्य है। लेकिन बार-बार स्वप्नदोष होने से पुरुषों को कई प्रकार की शारीरिक या मानसिक कमजोरी हो सकती है। बहुत अधिक स्वप्न दोष होने पर उसे निम्न उपायों से रोका जा सकता हैः

- आंवलें का मुरब्बा रोज खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। 
- कांच के गिलास में बीस ग्राम पिसा हुआ सुखा आंवला डाले। इसमें साठ ग्राम पानी भरें और फिर बारह घंटे भीगने दें। फिर छानकर इस पानी में एक ग्राम पीसी हुई हल्दी मिलाएं और पीएं। 
- पिसे हुए अनार के छिलके पांच ग्राम सुबह और शाम लेने से स्वप्न दोष नहीं होता। 
- केला स्वप्न दोष और प्रमेह में लाभदायक है। दो केले खाकर ऊपर से एक पाव गरम दूध तीन महीनें तक रोज पीएं। 
- लहसुन की दो कुली टुकड़े करके पानी से निगल जाएं। इससे स्वप्नदोष नहीं होगा। यह प्रयोग रात को सोते समय हाथ-पैर धोकर रोज करें। 
- प्याज दस ग्राम सफेद प्याज का रस, अदरक का रस आठ ग्राम, शहद पांच ग्राम, घी तीन ग्राम मिलाकर रात्रि को सोते समय पीने से स्वप्नदोष नहीं होता। 
- धनिये को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डे जल से लेने से स्वप्नदोष नहीं होता। 
- तुलसी की जड़ के छोटे-छोटे टुकड़े पीसकर पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है। 
- सुखा धनिया कूट, पीसकर छान लें। इसमें समान मात्रा में पीसी हुई चीनी मिलाएं। सुबह भूखे पेट रात के पानी से एक चाय की चम्मच फक्की लें और एक घंटे तक कुछ न खाएं पीएं(दैनिक भास्कर,उज्जैन,12.10.11)।

1 टिप्पणी:

  1. इस रोग के रोगी के लिए आपने एक लाभकारी नुस्खा पेश कर दिया है।

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।