रविवार, 23 अक्तूबर 2011

महिलाओं में बहुत बढ़ रहा है तनाव

पिछले दिनों आई एक स्टडी में पता लगा है कि घर और काम के डबल बोझ की वजह से पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ढाई गुना ज्यादा डिप्रेशन की शिकार होती हैं। खासकर अपनी गोल्डन ऐज यानी 25 से 40 साल की उम्र में उन्हें सबसे ज्यादा डिप्रेशन होता है : पिछले कुछ सालों में बेशक महिलाओं ने बहुत प्रोग्रेस की है और उनकी पोजिशन में चेंज भी बहुत आया है, लेकिन इसी के साथ बढ़ी है उनकी टेंशन। इसी का नतीजा है कि बीते 40 सालों में महिलाओं में डिप्रेशन डबल हो गया है। यानी अगर आप करियर, फैमिली लाइफ और रिलेशनशिप्स के बीच खुद को जकड़ा हुआ महसूस करती हैं, तो इसका मतलब है कि आपको खुद पर ध्यान देने और अपने बारे में सोचने की जरूरत है। गौरतलब है कि पिछले दिनों आई एक स्टडी में बताया गया है कि करियर और बच्चों, दोनों की उधेड़बुन में उलझी महिलाओं की जिंदगी में 1970 के मुकाबले डिप्रेशन डबल हो गया है। देखने में आया है कि खासतौर पर 25 से 40 साल की उम्र के बीच की महिलाएं अपने मेल कलीग्स के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा डिप्रेशन में रहती हैं। 

मैरिड वुमन 
होम्योपैथिक फिजिशियन और स्ट्रेस काउंसिलर डॉ. यात्री ठाकुर को इस स्टडी से कतई हैरान नहीं हैं। उनका मानना है कि हर जगह खुद को परफेक्ट साबित करने के चक्कर मंे महिलाएं खुद से ही बहुत उम्मीद करने लगती हैं और इनके पूरे न हो पाने का नतीजा होता है डिप्रेशन। बकौल डॉ. यात्री, 'आजकल हरेक महिला मल्टीटास्कर बनकर हर जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से निभाना चाहती है। जाहिर है, ऐसे में उसके पास अपने लिए कतई वक्त नहीं बचता। इसके अलावा, महिलाएं अक्सर हार्मोनल इंम्बैलेंस का शिकार होती हैं, जिस वजह से उन्हें मूड स्विंग की प्रॉब्लम भी रहती है।' वैसे , डॉ . यात्री की मानें , तो आजकल की शादीशुदा महिलाएं , जिनके बच्चे भी हैं , उन्हें सबसे ज्यादा स्ट्रेस और प्रॉब्लम्स रहती हैं। दरअसल , उनके आगे वर्क प्रेशर , इन लॉज की डिमांड , सपोर्ट नहीं करने वाला हसबैंड , फाइनेंशल डिफिकल्टीज और बच्चों की हेल्थ व एजुकेशन जैसी तमाम परेशानियां होती हैं। यही नहीं , अगर कोई महिला लिव इन रिलेशनशिप से ब्रेकअप वाले फेज से गुजर रही हैं , तो उस दौरान उसे डिप्रेशन होने के सबसे ज्यादा चांस होते हैं। 

सिंगल वुमन 
देखा जाए , तो आजकल की स्मोक और डिं्रंक करने वाली महिलाओं की मॉडर्न जेनरेशन की लाइफ में रिलेशनशिप से जुड़ी परेशानियां बढ़ गई हैं। वहीं पहले की महिलाओं में एनेक्सिटी , इटिंग डिस्ऑर्डर और इनसोमनिया जैसी प्रॉब्लम्स ज्यादा हुआ करती थीं। हालांकि आजकल की महिलाएं डिप्रेशन और स्ट्रेस को लेकर पहले से ज्यादा अवेयर हो गई हैं। बावजूद इसके , मैरिड विमन के अलावा सिंगल महिलाओं को भी ज्यादा डिप्रेशन हो रहा है। सायकॉलजिस्ट मानसी हसन बताती हैं , ' आजकल यंग वुमन पर एकेडमिक और करियर समेत तमाम बर्डन हैं। इस वजह से वे देर से शादी करती हैं , लेकिन ज्यादा उम्र तक कंुवारी रहने की वजह से उन्हें प्रॉब्लम हो जाती हैं। 25 से 30 उम्र की तमाम सिंगल विमन अकेलेपन का शिकार हो जाती हैं , क्योंकि अपने लंबे वर्किंग ऑवर्स की वजह से उनके पास रोमांटिक रिलेशनशिप या शादी के लिए वक्त ही नहीं होता। इसके अलावा , जंक फूड खाने , प्रॉपर फूड अवॉइड करने और एक्सरसाइज व नींद पूरी नहीं कर पाने की वजह से उनकी फिजिकल हेल्थ पर भी असर पड़ रहा है। ' डॉ . हसन के मुताबिक , जॉब्स की तलाश में अपनी फैमिली व फ्रेंड्स से दूर बड़े शहरों का रुख करने वाली लड़कियों को डिप्रेशन होने के चांसेज ज्यादा रहते हैं। 

बैलेंस रखिए 
एक्स मॉडल और एक्ट्रेस सुषमा रेड्डी इस स्टडी के नतीजों से सहमत हैं। वह कहती हैं , ' इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय महिलाएं काम और घर के बीच पिसती हैं। इस वजह से उन्हें कहीं न कहीं डिपे्रशन हो जाता है। ' सुषमा के मुताबिक , आजकल की महिलाओं पर एक वक्त में तमाम तरह के प्रेशर रहते हैं। इनमें काम व दूसरों से बेहतर दिखने का प्रेशर जैसी वजहों से महिलाएं आसानी से डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इसके अलावा , लुक्स व फिगर में अच्छी न होने वाली लड़कियों के डिप्रेस्ड होने के सबसे ज्यादा चांसेज रहते हैं। दरअसल , आजकल तमाम लड़कियां यंग और ब्यूटिफुल बने रहने के लिए पतली कमर चाहती हैं। ऐसे में , मोटी और खराब फिगर वाली लड़कियांे का फ्रस्टेट होना स्वाभाविक है। इन तमाम प्रॉब्लम्स के सल्यूशन के लिए प्रीतंभरा सुषमा बताती हैं , ' आजकल की मुश्किल भरी जिंदगी में फ्रस्टेट होने से बचने के लिए महिलाओं को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि सबसे पहला लाइफ को लेकर अपना गोल क्लियर करें , अपने आप पर उम्मीदों का बोझ न लादें और इमोशनल क्राइसिस में प्रफेशनल्स की मदद लें। इस तरह आप खुद को डिप्रेशन से बचा पाएंगी ' (नवभारत टाइम्स,दिल्ली,20.10.11)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. महिलायें अगर सुपर वुमन बननेकी होड़ में शामिल हुई है तो,
    यह सब तो होना ही है ! बहुत सुंदर जानकारी सहमत हूँ !

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  2. वाकई आधुनिकता और परंपरागत जिम्मेदारियों के बीच पिसने से महिलाओं मे डिप्रेशन की अधिक समस्या हो गई है। इलाज के साथ-साथ रहन-सहन एवं खान-पान के तौर-तरीकों मे परिवर्तन करके भी इसे काबू किया जा सकता है।

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  3. आपकी यह सुन्दर प्रस्तुति कल सोमवार दिनांक 24-10-2011 को चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ की भी शोभा बनी है। सूचनार्थ

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  4. सहमत हूं ..
    .. सपरिवार आपको दीपावली की शुभकामनाएं !!

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  5. इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय महिलाएं काम और घर के बीच पिसती हैं। इस वजह से उन्हें कहीं न कहीं डिपे्रशन हो जाता है।

    विचारणीय पोस्ट ... संतुलन बनाना ज़रुरी है लेकिन आज की भाग दौड की ज़िंदगी में यह काम भी काफी मुश्किल है ...

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  6. बहुत प्रभावी सार्थक विचारणीय प्रस्तुति....
    आपको दीप पर्व की सपरिवार सादर शुभकामनाएं

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  7. बहुत ही गम्भीर विषय को प्रस्तुत करती आपकी सार्थक रचना|
    पुरुषों को भी महिलाओं के रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाना चाहिए|
    जीवन की गाडी सहयोग और सब के खुश रहने से ही सही तरीके से चल पाएगी|
    दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!
    जहां जहां भी अन्धेरा है, वहाँ प्रकाश फैले इसी आशा के साथ!
    chandankrpgcil.blogspot.com
    dilkejajbat.blogspot.com
    पर कभी आइयेगा| मार्गदर्शन की अपेक्षा है|

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