मंगलवार, 13 सितंबर 2011

ज़ीरो फ़िगर का जुनून और आपका स्वास्थ्य

अगर करीना कपूर का जीरो फिगर देखकर आप पर भी वैसा ही फिगर पाने का जुनून सवार है, तो इतना जान लीजिए कि यह फिगर वाकई आपको "जीरो" कर देगा। आजकल फिल्मी तारिकाओं के नए लुक "जीरो फिगर" को देखकर बहुत सी युवतियों पर ऎसा असर हुआ कि उनमें रातों रात जीरो फिगर पाने की होड़ सी मच गई है। एक समय था जब नारी का हष्ट-पुष्ट होना उसकी सुंदरता का पैमाना माना जाता था। समय बदला और उसके साथ सुंदरता का पैमाना भी। पहले चला स्लिम-ट्रिम फिगर का फण्डा और अब आया है "जीरो फिगर"। अगर आप भी इसे पाने की अंघी दौड़ में शामिल हैं, तो आपको इस घटना की जानकारी होनी चाहिए। यह घटना है मशहूर मॉडल एना करॉलिना रीस्टॉन की। जिसे जीरो फिगर की चाहत में अपनी जान से हाथ घोना पड़ा। यूरोप की 21 वर्षीय इस मॉडल ने जीरो फिगर को मॉडलिंग की ऊंचाइयों तक पहुंचने की सीढ़ी माना। कई महीनों से डाइटिंग पर चल रही एना एनोरेक्सिया रोग से ग्रसित हो गई थी। मृत्यु के समय उसका वजन मात्र 88 पौंड था। तो अब आप यह सोच सकती हैं कि मॉडल और अभिनेत्रियों की नकल करके जीरो फिर पाने की चाहत आपको किस हद तक ले जा सकती है। 

आज की सुंदरता, कल पर भारी 
विशेषज्ञों का कहना है कि पौष्टिक और भरपेट भोजन शरीर के लिए उतना ही जरूरी है, जितना कि सांस लेना। जीरो फिगर पाकर अच्छे दिखने की चाह आपके कल को प्रभावित कर सकती है। दुबला-पतला शरीर पाने की चाह में की गई लंबी डाइटिंग का सीघा असर हॉर्मोन्स पर पड़ता है। डाइटीशियन अर्चना जैन बताती हैं कि जीरो फिगर यानी बीमारियों को बुलावा देना। शरीर में फैट्स का होना भी जरूरी है। फैट्स न सिर्फ शरीर के तापमान को बनाए रखता है, बल्कि विटामिन को भी सोखता है। शरीर में कम से कम 15 प्रतिशत फैट होना जरूरी है। अगर इसे भी कम कर दिया जाए, तो शरीर की रोग-प्रतिरोघक क्षमता खत्म हो जाती है। 

गर्भघारण में समस्या 
पतलापन गर्भघारण में बाघक बन सकता है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. किरण गुप्ता कहती हैं कि एक सीमा से ज्यादा की गई डाइटिंग का दुष्प्रभाव गर्भाशय पर पड़ता है। हमारे शरीर को औसतन रोज 1600 से 24 00 कैलोरीज की आवश्यकता होती है। अगर इसे घटाकर हम 1200 से कम कर देते हैं, तो हमारा शरीर जरूरी तत्वों हड्डियों से लेना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। 

खिलवाड़ सेहत से 
जीरो फिगर का क्रेज आपको बहुत महंगा पड़ सकता है। सवाई मानसिंह अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अजीत शक्तावत कहते हैं शरीर में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट्स तीनों ही बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। लंबी डाइटिंग करने से सबसे पहले शरीर से कार्बोहाइड्रेट्स फिर प्रोटीन और सबसे बाद में फैट्स कम होते हैं। ऎसे में फैट्स कम करने के चक्कर में शरीर से कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन स्वत: घीरे-घीरे खत्म हो जाते हैं और कई तरह की बीमारियां हमें घेरने लगती हैं। कड़ी डाइटिंग से एनोरेक्सिया और बुलमिया रोग शरीर में घर कर जाते हैं जिसमें या तो भूख ही नहीं लगती या फिर आप जो भी खाते हैं शरीर उसे अपनाता नहीं है। 

असर दिमाग पर भी 
मनोचिकित्सकों की मानें तो सुंदर दिखने की चाह में डाइटिंग में जुटी लड़कियां कई मानसिक रोगों से भी ग्रसित हो जाती हैं। लगातार पतले होने के प्रयास में उनमें हीन भावना आ जाती है। मनोचिकित्सक आई. डी. गुप्ता कहते हैं कि जो डाइटिंग करते हैं उन्हें यह नहीं पता होता कि वे दिन में कितनी कैलोरी ग्रहण कर रहे हैं और कितनी उनके उपयोग में आ रही है। जिससे शरीर के हॉर्मोन्स गड़बड़ा जाते हैं। ऎसे में मस्तिष्क के हॉर्मोन्स पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क के आगे के हिस्से में ग्लुकोज की मात्रा कम पहुंचती है, जिससे याददाश्त कम होती है। 

हर पांच में से एक की चाहत जीरो फिगर 
दुबला-पतला दिखने की चाह 18 से 25 साल की लड़कियों में सर्वाघिक है। वेट वॉचर मैग्जीन की ओर से 1200 लड़कियों पर किए सर्वे में यह सामने आया है कि हर पांच में से एक लड़की जीरो फिगर पाने की जद्दोजहद में लगी है। यही नहीं इनमें से मात्र 20 प्रतिशत ही ऎसी हैं, जो खुद को मेंटेन कर पाती हैं। क्या है जीरो फिगर ब्रिटिश जनरल ऑफ साइकेट्री के अनुसार जीरो फिगर 32-22-34 है। इसके अनुसार 22 इंच की कमर एक आठ साल की स्वस्थ बच्ची की कमर की जितनी होती है(पत्रिका डॉट कॉम से साभार)।

फिल्म एवं टीवी आज मनोरंजन के सबसे प्रमुख माध्यम बन गए हैं। इनके नायक-नायिका एवं कलाकार सबको प्रभावित कर रहे हैं। इनकी नायिकाओं से नारी वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। ये नायिकाओं की छरहरी काया को आदर्श मानकर उसकी दीवानी हो गई है और अपनी काया को छरहरी करने के लिए अविवेकपूर्ण डायटिंग कर रही हैं। दैनिक आवश्यकता से भी कम मात्रा में भोजन कर रही हैं। अपना मन मारकर भूखी रह रही हैं। 

नगरों में रहने वाली युवतियां एवं महिलाएं ज्यादातर ऐसा कर रही हैं। ये स्लिम होने अर्थात जीरो फिगर पाने के लिए भोजन त्याग रही हैं। पानी पीकर भूखी रह रही हैं। ये ऐसा कर अपना शरीर और स्वास्थ्य दोनों चौपट कर रही हैं। 

देश के महानगरों में जीरो फिगर का जोरदार आकर्षण है। वहां की नारियां वजन एवं शरीर घटाने की भूख में भूखी रह रही हैं। ये ऐसा कर जरूरी पोषण तत्व के अभाव में अपने को बीमार कर रही हैं। डायटिंग करने वाले शहरों में से मायानगरी मुम्बई को शिखर स्थान मिला है। यहां की 55 प्रतिशत लड़कियां रोजाना डायटिंग कर रही हैं। 

शरीर को व्यक्ति की उम्र एवं उसके कार्य के अनुसार दैनिक ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। यह ऊर्जा एवं पौष्टिक तत्व हमें भोजन से मिलता है। स्लिम होने, जीरो फिगर पाने अविवेकपूर्ण भोजन कम करने या त्यागने से वजन व मोटापे से मुक्ति जरूर मिलती है किन्तु शरीर व स्वास्थ्य दोनों गड़बड़ा जाते हैं। 

स्लिम होने, जीरो फिगर पाने एवं डायटिंग करने को अपने आहार का युक्तिसंगत नियोजन करना चाहिए। किसी भी स्थिति में ऊर्जा एवं पौष्टिक तत्व जरूरी हैं। इसके लिए संतुलित आहार जरूरी है। अवैज्ञानिक डायटिंग से सिरदर्द, आलस्य, अनिद्रा, त्वचा रूखी होना, बाल कमजोर होना, अनीमिया, दिल की धड़कन बढऩा, हड्डी कमजोर होना, शरीर निर्बल होना, प्रजनन प्रभावित होना जैसी परेशानी भविष्य में आ सकती हैं। वजन कम करने हेतु डायटिंग से बेहतर खाने में संतुलित आहार का उपयोग किया जाए। विशेषज्ञों की सलाह के बिना ही लड़कियां कैलोरी और वसा से परहेज करती हैं जबकि इनकी शरीर को जरूरत भी होती है(नीलिमा सीतेश,दैनिक ट्रिब्यून,13.09.2011)। चित्र संताबंता डॉटकॉम से संपादित रूप में।

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सही कहा । बहुत भयंकर रोग है साइज़ ज़ीरो का क्रेज़ ।
    हमें तो करीना को देखकर मितली सी आती थी ।

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  2. उपरी सौन्दर्य और आंतरिक सौन्दर्य
    एकदूसरे पर निर्भर करते है !
    आंतरिक सौन्दर्य बोध उपरसे भी
    मनुष्य को प्रभावशाली बना देता है !
    ऐसा मै सोचती हूँ......
    अच्छी जानकारी दी है आपने !

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  3. अब तो न ज़ीरो बनने की उम्र है और न हीरो बनने की। लेकिन इस आलेख में कुछ ऐसा है जिसे इस शौक को पालने वालों को बता तो सकता ही हूं।

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  4. उपयोगी जानकारी देती हुई पोस्ट ..

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