मंगलवार, 26 जुलाई 2011

हैल्थ-सन,मुसली पावर एक्स्ट्रा और डी-गोल्ड से सावधान रहें

सैक्स पावर बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक कैप्सूल का इस्तेमाल करने वालों को सावधान होना पड़ेगा। राजस्थान में,तीन आयुर्वेदिक औषधियों में एलोपैथी दवा 'वियाग्रा' के साल्ट 'सिल्डेनाफिल' की मिलावट पाई गई है। आयुर्वेद विभाग तीनों फर्मों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा। वहीं इन फर्मो के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले उदयपुर के ड्रग इंस्पेक्टर को चार्जशीट दी गई है।
आयुर्वेद विभाग को पिछले दिनों कुछ दवाओं में एलोपैथी दवाओं के साल्ट मिले होने की शिकायत मिली। इस विभाग ने इसकी जांच करवाई तो तीन दवाओं में मिलावट पाई गई। इनमें 'हैल्थ-सन' (बैच नम्बर एचएस 152), मूसली पावर एक्सट्रा (बैच नम्बर एमपी, जी, 118/10) और 'डी-गोल्ड 8000' (बैच नम्बर 1115) शामिल है।
विभाग ने इस संबंध में उदयपुर के ड्रग इंस्पेक्टर रामपाल सोमानी को कार्रवाई के लिए कहा। लेकिन उन्होंने चार महीने तक मामला दबाए रखा। लापरवाही उजागर होने पर विभाग ने सोमानी को चार्जशीट थमा दी है।
रिपोर्ट आए चार महीने
राज्य के औषधि नियंत्रक डी.के.श्रृंगी ने 7 अप्रेल 2011 को भेजी रिपोर्ट में आयुर्वेद विभाग को लिखा था कि उदयपुर से जांच के लिए भेजी गई उक्त तीनों दवाओं में वियाग्रा टेबलेट के प्रमुख घटक सिल्डेनाफिल की मिलावट किए जाने की पुष्टि हुई है। उक्त तीनों औषधियों में मिलावट की रिपोर्ट 7 अप्रेल 2011 को ही विभाग को मिल गई। इसके बाद भी विभाग की ओर से आज तक कोई कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यहां से निर्मित
जांच रिपोर्ट के अनुसार हैल्थ सन की निर्माता कम्पनी ज्योति हर्ब इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मोहाबेवाला, देहरादून है। मूसली पावर एक्सट्रा का निर्माण कुनाथ फार्मासिटीकल्स मुवातपुझा, एर्नाकुलम में हुआ है जबकि डी गोल्ड 8000 की निर्माता डी-इंडिया हर्बल लासुधा मोरी, इंदौर है।
भीलवाड़ा और उदयपुर से नमूने
विभाग ने हैल्थसन और मूसली पावर एक्स्ट्रा के नमूने भीलवाड़ा से और डी-गोल्ड 8000 के नमूने उदयपुर से उठाए। दोनों ही स्थानों पर इस्तगासे दायर किए जाएंगे।
रोक की सिफारिश करेंगे
उदयपुर के ड्रग इंस्पेक्टर रामपाल सोमानी को मामले में संबंधित के खिलाफ इस्तगासा पेश करने को कहा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सोमानी को मामले में चार्जशीट दी गई है। तीनों कम्पनियां दूसरे राज्यों की हैं। वहां की राज्य सरकारों को पत्र लिखकर उक्त दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की सिफारिश भी की जा चुकी।
-एन.के.शर्मा, आयुर्वेद निदेशक
इस्तगासा दायर किया जाएगा। कुछ तकनीकी कमियां हैं जिन्हें पूरा किया जाना है। बिना सम्पूर्ण दस्तावेजों के इस्तगासा करना बेकार है। इसलिए देरी हुई। इस्तगासे में उन दुकानदारों को भी पार्टी बनाया जाएगा जिनके यहां से नमूने उठाए गए हैं।
-रामपाल सोमानी, ड्रग इंस्पेक्टर, आयुर्वेद, उदयपुर
(युगलेश शर्मा,राजस्थान पत्रिका,अजमेर,26.7.11)

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खतरनाक खेल खेल रहे हैं ये लोग ।
    अच्छा सचेत किया है ।

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  2. आयुर्वैदिक दवाइयों के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाने वाली इन कम्पनियों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये। लोग इन दवाओं को सुरक्षित समझकर अनजाने में नुकसान उठा रहे हैं।

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  3. यह समझ नहीं आया कि इस्तगासे में उन दुकानदारों को पार्टी क्यों बनाया जाएगा जिनकी दुकान से सेम्पल लिये गये हैं। क्या आयुर्वेदिक दवाओं के दुकानदारों को कम्पनियों द्वारा भेजी गयी दवाओं की हर बन्द बोतल की जाँच की ज़िम्मेदारी और सक्षमता है?

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