मंगलवार, 24 मई 2011

प्रसव के बाद अवसाद की समस्या

कुछ महिलाओं को प्रसव के तुरंत बाद अवसाद घेर लेता है। इसकी वजह से या तो प्रसूता की भूख मर जाती है या वह बहुत अधिक खाने लगती है। अवसाद में डूब जाने के कई कारण हो सकते हैं। प्रसव पश्चात अवसाद प्रसव के बाद से छह महीनों के बीच कभी भी खड़ा हो सकता है। हमारे देश में अक्सर इस समस्या को ठीक से नहीं समझा जाता है। इसकी वजह से कई प्रसूताओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

नवजात का जन्म हमेशा खुशियाँ लेकर ही आता हो यह जरूरी नहीं है। जब प्रसूता के मन में कई तरह की चिंताएँ होती हैं तब बच्चे को जन्म देकर भी वह खुश नहीं रह पातीं। कई बार माँ की भूमिका में आकर भी चिंताओं से घिरी रहती हैं। अवसादग्रस्त नव प्रसूता की सिर्फ भूख-प्यास ही गायब नहीं होती, बल्कि उसे संसार भी असार नज़र आने लगता है।

क्या हैं लक्षण
भूख अनियंत्रित होना (बढ़ना या घटना)।

बच्चे के साथ नई जिंदगी से सामंजस्य न बैठा पाना।

बच्चे के प्रति अतिरिक्त रूप से चिंतित और व्यथित रहना।

अपराध बोध से ग्रस्त होना।

बच्चे के साथ अकेले रहने के ़खयाल भर से डर जाना। विश्वासपात्र से मदद लें

क्या है कारण
प्रसव पश्चात अवसाद के कारणों को अब तक पहचाना नहीं जा सका है। संभव है कि-

आप पहले भी अवसादग्रस्त रह चुकी हों।

आपका सहयोग करने के लिए कोई पारिवारिक सदस्य, सहेली अथवा दूसरा कोई सपोर्ट सिस्टम न हो।

नवजात बीमार पैदा हुआ हो।

जब आप स्वयं बच्चे थे तब अपनी माँ को खो दिया हो।

वैवाहिक जीवन में तीव्र तनाव से गुजर रही हों तो प्रसव के बाद अवसाद घेर सकता है।

जन्म लिया बच्चा आशा के अनुरूप (लड़का या लड़की) न हो।



विश्वासपात्र से मदद लें
यदि आप अवसादग्रस्त हैं तो आपको किसी की सहायता लेना चाहिए। नवजात शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए भी आपका अवसाद से बाहर आना जरूरी है। आप परिवार के किसी सदस्य से अपने दिल की बात कह सकती हैं। इसके अलावा किसी सहेली या विश्वासपात्र से मदद माँग सकती हैं। सामुदायिक सहायता उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं से संपर्क किया जा सकता है। यदि इनमें से किसी से भी आप संतुष्ट न हों तो आपको पेशेवर मनोचिकित्सा का सहारा लेने में भी हिचकिचाहट नहीं होना चाहिए। मनोचिकित्सा को ध्यान रखना चाहिए कि प्रसूति के पश्चात अवसाद के लिए इलाज कराते समय मरीज को कष्टप्रद पुरानी यादें भी सामने आ सकती हैं। यदि काउंसिलिंग के बाद भी आप अवसाद से बाहर नहीं आ पा रही हैं तो फिर आपको एंटी डिप्रेसेंट दवाओं की जरूरत होगी। इलाज कई महीनों तक चल सकता है और दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी होते हैं।

यह करें

प्रसव पश्चात अधिक से अधिक आराम करें।

ठीक से खाने का ध्यान रखें।

अपने पति के साथ हंँसी-खुशी के चंद लम्हें जरूर निकालें। सारा ध्यान बच्चे पर केंद्रित न करें। 

किसी सहेली अथवा रिश्तेदार से मन की बात जरूर करें। अंदर ही अंदर घुटने की कोई जरूरत नहीं है
अवसाद से ऐसे निपटें
१५ ग्राम गुलाब की पत्तियों को २५० मिली लीटर उबलते पानी में डालकर गुलाब-आसव तैयार करें। कभी-कभी चाय-कॉफी की जगह ये पेय लेना फायदेमंद होता है। 

अवसाद की स्थिति से उबरने के लिए इलायची का सेवन बहुत फायदेमंद होता है। चाय बनाते समय इलायची के दाने पीस कर इसमें डालें। इलायची की चाय अवसाद के इलाज में दवाई का काम करती है।

अवसाद और नाड़ी तंत्रिका की कमज़ोरी से निपटने के लिए काजू भी बड़े फायदेमंद होते हैं। यह विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, खासकर थायमिन से भरपूर होते हैं, जो भूख बढ़ाते हैं और तंत्रिका तंत्र के लिए भी लाभकारी होते हैं। काजू से राइबोफ्लेविन भी मिलता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है और हम सक्रिय और प्रसन्न बने रहते हैं। 

सेवफल को दूध और शहद के साथ लें। यह तंत्रिका तंत्र के लिए एक असरकारी टॉनिक की तरह काम करता है।
अवसाद से उबरने के लिए सेवफल का सेवन करना बहुत अच्छा होता है। इसमें विटामिन-बी,पोटेशियम और फॉस्फोरस जैसे कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो ग्लुटामिक एसिड बनने में सहायक होते हैं। ग्लुटामिक एसिड तंत्रिका कोशिकाओं में होने वाली क्षति को नियंत्रित करता है।
(डॉ. नीरजा श्रीवास्तव,सेहत,नई दुनिया,मई द्वितीयांक 2011)।

1 टिप्पणी:

  1. डॉ. नीरजा श्रीवास्तव ने बहुत संवेदन शील समस्या पर अच्छा लिखा है , मुझे ये भी लगता है ... कि प्रसव से पहले बहुत सपने संजोये होते हैं , मगर हकीकत ये होती है कि छोटे बच्चे के साथ रातों को जागना होता है ..कितनी ही तरह की समस्याओं का सामना करना होता है ..और सबसे ज्यादा गम होता है अपनी वो पहली सी सुखद जिन्दगी को खो देने का ..फिर नाजुक मन और कमजोर शरीर ...यही भावनात्मक पहलू है ... पढवाने का बहुत बहुत शुक्रिया ..

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