गुरुवार, 19 मई 2011

महिलाएँ और ऑस्टियोआर्थराइटिस

क्या आपने कभी सोचा है कि हड्डियाँ भी जिंदा अवयव हैं और वे लगातार बदल रही हैं? क्या आप यह भी जानती हैं कि वयस्क होने पर हर ७ से १० साल में हड्डियों का पूरा ढाँचा बदल जाता है? जब तक इनमें से कोई एक हड्डी टूट नहीं जाती तब तक हम इसके महत्व को नहीं समझ पाते।

एक महिला का शरीर कमनीयता और सुंदरता की सटीक मिसाल होता है। उसकी हड्डियाँ भी नाज़ुक होती हैं। वह अपने संपूर्ण जीवन में माँ, बेटी, पत्नी और घरेलू महिला के तौर पर कई भूमिकाएँ निभाती हैं। कई बार परिवार की खातिर रोजगार के लिए घर से बाहर भी जाती है। इस सबका उसकी सेहत पर खासा असर पड़ता है। इतनी अधिक भूमिकाएँ निभाते हुए उसके पास कसरत करने का समय ही नहीं होता। चूँकि माँ भी है, इसलिए हमेशा अपने से पहले परिवार और बच्चों के भले के बारे में सोचती है। इतनी सभी भूमिकाओं के चलते उसकी सेहत पीछे छूट जाती है। वह यह भूल जाती है कि वह पुरुषों से अलग है और उसकी आवश्यकताएँ भी भिन्ना हैं। उसे अतिरिक्त देखभाल की जरूरत है। ऑस्टियोआर्थराइटिस निश्चित ही एक ऐसी समस्या है, जो महिलाओं में बहुत ही आम है। जो कामकाजी नहीं हैं और घरेलू महिलाओं के तौर पर जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका स्वास्थ काफी नजरअंदाज किया जाता है। वे खुद भी अपने रखरखाव के प्रति उदासीन रहती हैं। जब तक कोई आपात स्थिति निर्मित नहीं हो जाती तब तक वे चिकित्सक के पास जाना तक उचित नहीं समझतीं।

बनावट होती है भिन्न

महिलाओं के शरीर की बनावट भिन्न होती है। उनके कूल्हे घुटनों को जोड़ों के मुकाबले चौड़े होते हैं। उनके कूल्हे पुरुषों की तरह घुटनों की सीध में नहीं होते। इसी अलाइनमेंट के कारण महिलाओं के घुटनों में पुरुषों के मुकाबले अधिक जल्दी खराबी होती है। शोधों से पता चला है कि इस्ट्रोजेन कार्टीलेज को सूजन, जलन और दर्द से बचाता है, जो कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस होने का प्रमुख कारण है। रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में इस्ट्रोजनेन का स्तर तेजी से घट जाता है, जिससे उनकी हड्डियाँ टूटने की कगार पर पहुँच जाती हैं।

यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है

चाहे हम बदलती जीवनशैली को ही दोष क्यों न दें, लेकिन महिलाओं के मुद्दे अब हरेक की नज़र में आ रहे हैं। हम इस तथ्य से भी मुँह नहीं मोड़ सकते हैं कि वे महिलाएँ जो अभी हाल ही में माँ बनी हैं, उनकी भी नियमित जाँचें की जानी चाहिए।


नियमित करें कसरत 

जो महिलाएँ नियमित कसरत नहीं करती हैं, वे अपनी अस्थियों को खराब होने का न्यौता दे रही हैं। नियमित कसरतों से मुंह मोड़ने वाली महिलाएं अक्सर अस्थिक्षरण जैसी गंभीर समस्या को न्यौता देती हैं। 


क्या हैं कसरतें

महिलाओं को रनिंग,डांसिंग और वेट लिफ्टिंग जैसी कसरतें भी करनी चाहिए। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से अस्थियों का घनत्व और मज़बूती बढ़ती है। जो महिलाएं पहले से ही हड्डियों के कम होते घनत्व की समस्या से जूझ रही हैं,उन्हें कसरतों से भी लाभ मिलता है। स्वीमिंग और योग भी महिलाओं की अच्छी-खासी मदद कर सकते हैं। शारीरिक कसरतों से हड्डियों पर हल्का तनाव पड़ता है जिससे वे और अधिक मज़बूत हो जाती हैं।

नियमित पौष्टिक भोजन

भारतीय महिलाओं की खुद के पोषण के प्रति उदासीनता उनकी कई समस्याओं की जड़ है। नियमित पौष्टिक भोजन करके वे कई समस्याओं,जैसे-हड्डियों की कमज़ोरी को भी दूर रख सकती हैं। हड्डियों की कमज़ोरी के कारण ही बैठे-ठाले हड्डियां टूटने लगती हैं। हड्डियां मज़बूत रहेंगी तो ज़िंदगीभर स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहेगा।
(डॉ. हर्षवर्धन हेगड़े, सेहत,नई दुनिया,मई द्वितीयांक 2011)

4 टिप्‍पणियां:

  1. kyaa yae aalekh mae naari blog par repost kar saktee hun

    kripyaa email sae suchit kar dae

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  2. आभार इस जानकारी के लिये।

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  3. एक महत्वपूर्ण विषय -४५ वर्ष से ऊपर हो चली महिलओं को हड्डी में कैल्सियम की जांच करवा कर आवश्यकतानुसार कैल्शियम और विटामिन डी-३ का टैबलेट जरुर खाना चाहिए !

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