रविवार, 15 मई 2011

याद्दाश्त के लिए डायनैमिक न्यूरोबिक्स

डायनैमिक न्यूरोबिक्स के स्टैप्स

1.सही डायरेक्शन में मुंह करके खड़े हों पूर्व की ओर मुंह करना बेहतर होगा। पूर्व से बैंगनी रंग की प्राण-ऊर्जा प्रकाशित होती है, जो ऊर्जा चक्रों को सक्रिय करती है।

2.बाएं दिमाग को एक्टिव करो
बाएं अंगूठे व इंडेक्स (तर्जनी) फिंगर से दाएं कान को हल्का सा मलो, अंगूठा बाहर की तरफ होना चाहिए। इस तरह कान मसलने से जरूरी ऊर्जा कनेक्शन पैदा होगा, जिससे बायां दिमाग व पिट्यूटरी ग्लैंड एक्टिव और एनर्जी से भरपूर हो जाएंगे।

3.दाएं दिमाग को एक्टिव करो
दाएं अंगूठे व इंडेक्स (तर्जनी) फिंगर से बाएं कान को हल्का सा मलो, अंगूठा बाहर की ओर होना चाहिए। इस तरह कान मसलने से जरूरी ऊर्जा कनेक्शन पैदा होगा, जिससे दायां दिमाग व पीनियल ग्लैंड एक्टिव और एनर्जी से भरपूर होंगे।

4.एनर्जी चैनल्स को जोड़ो
शरीर की एनर्जी वायरिंग को पूरा करने के लिए जीभ को तालू से जोड़ना होगा।

5.उंगलियां सही जगह पर हों
जब ईयरलोब को हल्का सा मसलोगे तो अंगूठे बाहर की तरफ तथा उंगलियां अंदर की तरफ होनी चाहिए। यही उंगलियों की सही पोजिशन है। ऐसा करने पर दिमाग की प्राण-ऊर्जा का स्तर ऊंचा उठता है तथा असर भी ज्यादा होता है। अगर अंगूठे अंदर की तरफ कर लोगे तो इससे उतना प्रभाव नहीं पड़ेगा।

6.बाजू सही जगह पर हो
दाईं बाजू बाहर की तरफ होनी चाहिए तथा बाईं बाजू अंदर की तरफ होनी चाहिए। इससे भी दिमाग एक्टिव और एनर्जी से भरपूर होगा।

7.गहरे नीले रंग की इमेजिनेशन के साथ एनर्जी बढ़ाओ
डायनैमिक न्यूरोबिक्स धीरे-धीरे हमारी सोई पावर्स जगाकर भीतरी रसायन प्रक्रिया में भी हिस्सा लेता है। मानसिक चित्रण का सुरक्षित और असरदार तरीका यही है कि तुम देखो कि गहरा नीला रंग तुम्हारे पूरे शरीर में फैलते हुए दिमाग की एक-एक कोशिका तक पहुंच रहा है। नीले रंग की किरणें दिमाग व पूरे नर्वस सिस्टम को एनर्जी देती हैं।

8.उठक-बैठक शुरू करो
बैठते हुए अंदर सांस लो और उठते हुए सांस बाहर छोड़ो। दोनों सैशन 14 बार तक दोहराओ।

9.उंगलियां हटा लो
एक्सरसाइज पूरी होने पर उंगलियों को ईयरलोब से हटाकर रिलैक्स हो जाओ।
(बिस्वरूप राय चौधरी,हिंदुस्तान,दिल्ली,9.5.11)

8 टिप्‍पणियां:

  1. "आ..याsss है मुझेsss
    फिर यादss वोह ज़ालिम
    गुज़रा ज़माssना
    बचपन का..."

    ....इस अभ्यास को करते ये गाना जरूर याद आ गया.

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  2. सही गाने का आलाप कुछ यूँ है :
    "आssयाsss है मुझेss
    फिर याssद वोह ज़ाsलिम
    गुज़रा ज़माssना
    बचपन का...."

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  3. सही आलाप है, प्रतुल जी।

    कुमार जी, उपयोगी व्यायाम है।

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  4. जो भी हो हमारा पुराना सिस्टम ही ठीक था, उट्ठक बैठक करते थे और अगर इधर-उधर कुछ हुआ तो कान उमेठ कर गाल गरम कर दिया जाता था।

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  5. बहुत दिलचस्प जानकारी है ।
    लगता है करने में भी मज़ा आएगा ।

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  6. कुमार जी, उपयोगी व्यायाम है।
    देखते है कल यह बात याद रहती है कि नहीं ?

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  7. हमारा पुराना सिस्टम ही ठीक था, उट्ठक बैठक .

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