मंगलवार, 8 मार्च 2011

महिला दिवस के ढोल-नगाड़ों की हक़ीक़तःसेनेटरी पैड तक खरीदने में असमर्थ हैं महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की १०१ वीं वर्षगांठ है और भारत को आजाद हुए भी ६० वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन इस देश का सच यह है कि मासिक धर्म के दौरान आज भी ६८ फीसदी ग्रामीण महिलाएं सेनेटरी पैड नहीं खरीद सकती हैं! एसी निल्सन सर्वे और प्लान इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सेनेटरी पैड का खर्च वहन नहीं करने की वजह से ग्रामीण महिलाएं इसका इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं।

इस सर्वे के प्रकाश में आने के बाद ही वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने सेनेटरी नैपकीन पर लगने वाले १० फीसदी के उत्पाद शुल्क को घटाकर एक फीसदी कर दिया है। यही नहीं, दिल्ली सरकार भी अपने स्कूलों में प़ढ़ने वाली ल़ड़कियों को भी सेनेटरी पैड मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। यही कारण है कि सरकार ने इस अभियान के लिए पैड पर लगने वाले वैट को भी माफ कर दिया है।

कालरा अस्पताल के निदेशक डॉ. आरएन कालरा के अनुसार आज भी गांव की महिलाएं पीरियड के दौरान गंदे कप़ड़े का उपयोग करती हैं, जिससे वह संक्रमण की चपेट में आ जाती हैं।

ग्रामीण इलाके की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की एक ब़ड़ी वजह यौनांग की साफ-सफाई का न होना है। उनके अनुसार दिल्ली सरकार द्वारा अपने स्कूलों के बच्चियों को मुफ्त सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की योजना के बारे में प़ढ़ा था। यह एक सही कदम है।

सर्वेक्षण में यह स्पष्ट हुआ है कि ७५ फीसदी ग्रामीण महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता व सही देखभाल की जानकारी का अभाव है। ८१ फीसदी ग्रामीण महिलाएं उन कप़ड़ों का इस्तेमाल करती हैं, जिनसे संक्रमण की आशंका अधिक होती है। ये कप़ड़े या तो रद्दी होते हैं या फिर सेनेटरी पैड की अपेक्षा बेहद सस्ते होते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मासिक धर्म के दौरान पर्याप्त देखरेख न होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्र की किशोर वय ल़ड़कियां कम से कम ५० दिन स्कूल नहीं जा पाती। यह राष्ट्रव्यापी सर्वे १०३३ ग्रामीण महिलाओं व १५१ स्त्री रोग विशेषज्ञों के बीच अक्टूबर २०१० में किया गया था। सर्वे बताती है कि भारत में मासिक धर्म से गुजरने वाली ३५.५ करो़ड़ महिलाओं में से केवल १२ फीसदी महिलाएं ही सेनेटरी नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं।

डॉ. आरएन कालना के अनुसार पीरियड के दौरान सेनेटरी नैपकिन का उपयोग प्रजनन नलिका में संक्रमण से बचाव के लिए उपयोगी साबित होता है। इससे सर्वाइकल कैंसर की संभावना समाप्त होती है(संदीप देव,नई दुनिया,दिल्ली,8.3.11)।

9 टिप्‍पणियां:

  1. सही बताया । इसीलिए सरकार मासिक धर्म सप्ताह मना रही है ।

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  2. सही बात कही आपने.एक प्रश्न है आपसे हालांकी वो इस सन्दर्भ में नहीं है.
    आपके एक पहले के लेख में आपने कहा था की मेथी के बीज मधुमेह में लाभदायक होते है....
    लेकिन मैंने कहीं सूना की ऐसा करना किडनी के लिए नुकसानदेह होता है...
    इस बारे में थोड़ी और जानकारी मिल जाय तो अच्छा रहे...
    प्रणाम.

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  3. यह दुखद और चिंता का विषय है।

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  4. यह दुखद और चिंता का विषय है।
    अच्छा आलेख.

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