गुरुवार, 17 मार्च 2011

गर्भधारण के लिए स्वयं को स्वस्थ बनाएँ

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिला के पोषण आवश्यकताओं का इस बात से गहरा संबंध होता है कि उसका गर्भाधान के पूर्व पोषण स्तर कैसा रहता है, क्योंकि सुपोषित महिला के पास विभिन्न पोषक तत्वों का एक रिजर्व स्टॉक रहता है, जो गर्भावस्था के दौरान कमी आने पर कुपोषण से जच्चा-बच्चा दोनों की रक्षा करता है, अतः यह कहा जा सकता है कि गर्भधारण के पूर्व अच्छा पोषण स्तर बनाए रखना गर्भधारण की एक अनिवार्य आवश्यकता है।

कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे

गर्भावस्था के पूर्व का वजन

इसका सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु के वजन पर पड़ता है। सामान्य से कम वजन की महिलाएँ प्रायः कम वजन के शिशु को जन्म देती हैं, भले ही गर्भावस्था के दौरान उनका पोषण ठीक रहा हो और उनके वजन में भी सामान्य रूप से वृद्धि हुई हो। सामान्य से अधिक वजन की महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान विभिन्न जोखिम बढ़ जाती है एवं गर्भावस्था जन्य डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

गर्भावस्था के पूर्व के पोषक तत्व

फोलिक एसिड : ४०० माइक्रोग्राम फोलिक एसिड प्रतिदिन लेना प्रत्येक महिला के लिए आवश्यक है। यह विटामिन हरी पत्तेदार सब्जियों, स्ट्राबेरी, फलियों, संतरे, मोसंबी जैसे फलों आदि में पाया जाता है। अतः इनके नियमित सेवन से गर्भस्थ शिशु की स्पाइनल कार्ड में होने वाले जन्मजात विकार जैसे स्पाईनल बायफिडा की समस्या कम हो जाती है। किस प्रकार गर्भवस्था के पहले २८ दिनों में फोलिक एसिड की समुचित मात्रा देना अत्यन्त लाभदायक होता है। चूँकि अधिकांश मामलों में गर्भावस्था के पहले २८ दिनों का पता महिलाओं को लग ही नहीं पाता इसलिए जरूरी है कि महिलाएँ पहले से ही फोलिक एसिड का नियमित सेवन करती रहें।

लौह तत्व : ४०० से ५०० माइक्रोग्राम लौह तत्व गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (रक्त की कमी) को रोकने हेतु आवश्यक है। मटन, चिकन, फिश, हरी सब्जियों, गोभी एवं फलियों जैसे मटर, बालोर आदि में लौह तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

केल्शियम : हड्डियों के निर्माण एवं इनके क्षरण की स्थिति को रोकने के लिए व्यायाम अत्यन्त आवश्यक है। केल्शियम की कमी से एक ओर जहां गर्भवती महिला में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या उत्पन्न हो सकती है वहीं शिशु की अस्थियों के विकास पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। सामान्यतः केल्शियम की १२०० माइक्रोग्राम एवं गर्भावस्था में ४०० माइक्रोग्राम की और अतिरिक्त मात्रा लेने की आवश्यकता प्रत्येक महिला को होती है।

विटामिन ए : यह महिला एवं गर्भस्थ शिशु की आँखों को स्वस्थ रखने हेतु एक जरूरी विटामिन है एवं सामान्य रूप से इसकी ८०० माइक्रोग्राम मात्रा गर्भावस्था के पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान लिया जाना आवश्यक है। यह फल-फूल, मछली, मांस आदि में प्रचुर मात्रा में उपस्थित होता है । इसके अतिरिक्त विभिन्न विटामिनों की भी शरीर को आवश्यकता होती है जिनकी जरूरी मात्रा निम्नानुसार लेनी चाहिए।



विटामिन के नाम-गर्भावस्था के पूर्व गर्भावस्था के दौरान
विटामिन बी-१ ११ से १५ मिलीग्राम

विटामिन बी-२ १३ से १६ एमजी

विटीमिन बी एवं सी १५ से २२ मिलीग्राम

विटामिन बी-१२ २ से २२ एमसीजी

विटामिन-डी २०० से ४०० आययू 

विटामिन-ई ८ मिलीग्राम ८ मिलीग्राम

विटामिन-के ६० मिलीग्राम ६० मिलीग्राम

ज़ाहिर है, यदि महिलाएँ गर्भधारण के पहले से अपने पोषण पर ध्यान दें तो न केवल उसकी गर्भावस्था बिना संकट के गुजरेगी बल्कि वह एक स्वस्थ शिशु को भी जन्म दे सकेगी।
(डॉ. शैफाली ओझा,सेहत,नई दुनिया,मार्च द्वितीयांक 2011)

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी जानकारी ... लेकिन भारत में लोग न्यूट्रिशियन से ज्यादा दवाओं पर धन खर्च करते हैं, इस विषय में जागरूकता बहुत कम है. मैंने देखा है, आजकल साठ रूपये का एक लीटर पट्रोल और सौ रूपये का मोबाइल रीचार्ज एक गिलास जूस से ज्यादा ज़रूरी लगता है

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  2. Nice , health awareness is more important than running around for medicines.

    www.dietsession.com

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