शनिवार, 5 मार्च 2011

मटर ही नहीं,उसका छिलका भी उपयोगी

बिना बीज का खीरा, लाल पत्ता गोभी और ऐसी मटर जिसका छिलका भी खाने योग्य है, देखना हो तो  दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा आएं। यहां चल रहे तीन दिवसीय कृषि मेले में दूसरे दिन संस्थान द्वारा विकसित संकर सब्जियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ये सब्जियां अधिक स्वादिष्ट तो हैं ही, साथ ही कैंसर, हृदयाघात रोधी व आंखों की ज्योति बढ़ाने वाली भी हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने विदेश में उगाई जाने वाली कई सब्जियों की संकर प्रजाति तैयार की है, जो अभी अंडर ट्रायल हैं। इन सब्जियों को संस्थान ने पहली बार प्रदर्शित किया है।
लाल पत्ता गोभी (रेड कैबेज), तीन तरह की ब्रोकली, जमुनी आस्ट्रेलियन ग्रीन व बिना बीज का खीरा लोगों को खूब भा रहा है। पांच रंगों में पांच तरह की गाजर भी पंसद की जा रही है। संस्थान ने ऐसी मटर प्रदर्शित की है, जिसका छिलका भी खाया जा सकता है। मटर की इस किस्म जीपी-901 को अभी तक आम नाम नहीं दिया गया है। इसकी गुणवत्ता की जांच चल रही है। इसके बाद ही इसे लोगों के लिए जारी किया जाएगा।
इसके अलावा पूसा ने लाल पत्ता गोभी प्रदर्शित की है, जो सामान्य पत्ता गोभी की तरह डेढ़ से दो किलोग्राम तक होती है। वनस्पति विभाग के प्रमुख डॉ. प्रीतम कालिया ने कहा कि इस पत्ता गोभी में एंटी आक्सिडेंट व एथोसयानिन केमिकल यौगिक होता है। इससे शरीर में कैंसर रोधी क्षमता बढ़ जाती है।
तीन तरह की ब्रोकली प्रदर्शित की गई है। यलोइस हैडिंग ब्रोकली देखने में फूल गोभी की तरह होती है, लेकिन इसका रंग हल्का पीलापन लिए हरा होता है। वजन तीन से चार किलो तक होता है। पत्तागोभी की तरह दिखने वाली ब्रसल्स स्प्राउट्स प्रदर्शित की गई है, जो आकार में टमाटर की तरह होती है।
विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीतम कालिया ने कहा कि सभी गोभी वर्गीय सब्जियों में कैंसर रोधी तत्व होते हैं। ब्रोकली में यह तत्व अधिक होता है। इसलिए विदेशी सब्जियों को भारतीयकृत किया जा रहा है, ताकि शहरी क्षेत्र में इसकी उपज कर लोग खुद को सेहतमंद रख सकें। उन्होंने कहा कि यलोइस हैडिंग ब्रोकली में सलफोरासेन इंडाल थ्री कारबिनाल होता है, जो आइसोथायोसाइनेट यौगिक होता है और कैंसर रोधी होता है। इसके अलावा ब्रोकली में क्लोरोफिल की मात्रा होने से आंख की रोशनी बढ़ती है। जामुनी कैंसर रोधी होने के साथ दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है। खास बात यह कि इन सब्जियों की खेती गमले में छत या बालकनी में भी की जा सकती है। इसलिए लोग इसकी खेती कर फायदा उठा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में ब्रोकली की खेती की जा रही है। दिल्ली में भी इसकी मांग बढ़ रही है। अभी तक जानकारी के अभाव में लोग खानपान में कम ही इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा सफेद रंग का बैंगन प्रदर्शित किया गया है, जो शुगर रोधी है(दैनिक जागरण,दिल्ली,5.3.11)।

5 टिप्‍पणियां:

  1. उपयोगी जानकारीपूर्ण -रंग बिरंगी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए ज्यादा लाभदायक होती हैं -क्यों आप अगली किसी पोस्ट में बतायें !

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  2. बहुत अच्छी बात है। इस तरह के शोध और अनुसंधान को बढावा दिया जाना चाहिए।

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    मटर का छिलका तो पहले भी खाने योग्य ही था ... जिसे गाय आसानी से खा जाती है उसे उसे मैंने भी बचपन में खूब खाया है.
    छिलका तो नीम्बू का भी खा ही लेते हैं .......... अचार रूप में.......
    अब पूसा वाले कल कहें कि हमने बैंगनी रंग का ऐसा नीम्बू विकसित किया है जिसका भरता बनाकर खाया जा सकता है.
    ....... हमें बहुत खुशी होगी.
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    आज़ तो खुश होने की वजह तमाम हैं. कुछ भी नया हो जाये बस. .......
    गमले में बेचारे पेड़ को पौधा बनकर ही गुजारा करना पड़े बेशक ............. प्रकृति प्रेमी फिर भी खुश है.
    बेचारी मुर्गी अंडा दे-देकर थक जाये लेकिन उसे जबरन 'अंडा उगलवाने की मशीन' बनाने पर तुले हैं. ........ वर्ल्ड स्वास्थ्य संस्थाओं के जीव प्रेमी.

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  4. नूतन प्रयोग मगर बाजार में आने पर ही लाभप्रद.

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  5. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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