सोमवार, 14 मार्च 2011

आयुर्वेदिक प्राथमिक चिकित्सा

जब कभी अचानक कोई दुर्घटनावश इमरजेंसी आती है, उस समय कोई डॉक्टर तत्काल उपलब्ध नहीं होते हैं और रोगी की प्राणरक्षा करना जरूरी हो तो प्राथमिक उपचार देना होता है। प्राथमिक उपचार के बाद किसी भी योग्य डॉक्टर से चिकित्सा लेनी चाहिए। आयुर्वेद चिकित्सा में प्राथमिक चिकित्सा के उपाय हैं जो घर में या आसपास के परिवेश में मौजूद साधनों से किए जा सकते हैं।

अतिसार..
अचानक अजीर्ण या अन्य कारणों से पतले दस्त लगने लगते हैं। इस स्थिति को अतिसार या डायरिया कहते हैं।

जायफल चूर्ण एक चम्मच पानी में देना चाहिए अथवा इसका घोल २ चम्मच मीठे दही से देना चाहिए।

निर्जलीकरण अधिक उल्टी और दस्त होने पर शरीर एकदम कमजोर हो जाता है, जो होंठ सूखने लगते हैं, रोगी थका-थका सुस्त हो जाता है, आँखें शरीर के भीतर धँस जाती हैं, प्यास अधिक लगती

चोट लगना
किसी धारदार या नुकीली वस्तु से चोट लगने की स्थिति में यदि रक्तस्राव हो रहा है तो सबसे पहले रक्तस्राव रोकना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में मुलैठी चूर्ण घी में मिलाकर उसकी धार घाव पर डालें, इससे वेदना शांत होगी। मुलैठी चूर्ण को घाव पर डालकर कसकर पट्टी बाँध दें, जिससे खून बहना बंद हो जाएगा।

यदि मुलैठी चूर्ण उपलब्ध नहीं मिल सके तो हल्दीअथवा फिटकरी चूर्ण का तत्काल उपयोग करके पट्टी बाँध दें।

भारी वस्तु के आघात से चोट के स्थान पर खून नहीं निकलता, बल्कि नीला निशान बन जाता है। कभी-कभी गुमड़ निकल जाता है। ऐसी स्थिति में प्याज, आम्बा हल्दी, नमक या तिल को कुचलकर पोटली बना लें, इस पोटली को सरसों के तेल में भिगोकर गर्म सेक करें फिर इसे बाँध दें, इससे जमा खून फैलेगा तथा वेदना शांत होगी।

काँटा चुभने पर उस स्थान पर थूहर का दूध २ बूँद टपका दें, यदि काँटा भीतर टूट गया हो तो वह बाहर आ जाएगा।

जंतु दंश
अलग-अलग प्रकार के जंतु दंश में अलग-अलग प्राथमिक उपचार होता है। तलैया, भँवरी, बिच्छू काटने की घटनाओं में भयंकर पीड़ा होती है। सबसे पहले प्रयास करके डंक को निकाल देना चाहिए। उसके बाद डंक स्थान से ऊपर के भाग को डोरी अथवा कपड़े से कसकर बाँध देना चाहिए।

आँकड़े के दूध की दो बूँद नाक में डालें। अर्क कपूर या तारपीन का तेल दंश के स्थान पर लगाएँ। उपरोक्त साधन उपलब्ध न होने पर प्याज या तंबाकू पीसकर बाँध दें।

कानखजूरा काटने पर गूलर के पत्ते को पीसकर दंश स्थान पर बाँध दें।

सर्पदंश का पता चलते ही तत्काल दंश स्थान से विसंक्रमित सुई से थोड़ा खून निकाल कर बहने दें। रोगी को सोने न दें, उसका आत्मविश्वास जगाते रहे। दूध में घी मिलाकर पिलाएँ तथा तुरंत चिकित्सालय ले जाएँ(डॉ. विनोद बैरागी,सेहत,नई दुनिया,मार्च प्रथमांक 2011)।

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