सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

अकेलापन है सबसे बड़ा रोग,अपनत्व है हज़ार मर्ज़ों की दवा

अगर कहते हैं कि प्यार किस्मत वालों को मिलता है तो यूँ ही नहीं कहते। प्यार हमें खुश रखता है। प्यार हमें स्वस्थ रखता है। प्यार हमें लंबी उम्र देता है। जी हाँ, ये प्यारभरी बातें भर नहीं हैं। यह सब वैज्ञानिक शोधों के बाद सामने आया सच है, जिसमें भावुकता नहीं ठोस चिकित्सकीय आधार है। प्यार हमारे अंदर रोगों से लड़ने की अपार शक्ति पैदा करता है। जब किसी रोगी को किसी के द्वारा उसे प्यार किए जाने का एहसास होता है तो उसके शरीर में इस तरह के रासायनिक बदलाव होते हैं, जिसके चलते उसमें रोगों से लड़ने की क्षमता काफी बढ़ जाती है। अपने लिए, दूसरों के लिए जीने की लालसा रोग से छुटकारा पाने की ताकत भर देती है उनमें।

दरअसल, विभिन्न शोध अध्ययनों से जाहिर हुआ है कि प्यार में अपार ताकत होती है। इसलिए दोस्तों के साथ गपशप करना, माँ-बाप के करीब रहना, किसी से दिल खोलकर बात करना जैसी छोटी-छोटी बातों का हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। एक परीक्षण में पाया गया कि जिन लोगों को प्यार और भावनात्मक सुरक्षा अधिक मिलती है, उनकी धमनी में उन लोगों की तुलना में ब्लॉकेज कम होते हैं, जो प्यार और आत्मीयता से वंचित होते हैं। चिंता का भी हमारे स्वास्थ्य से गहरा संबंध होता है। "चिंता चिता के समान है" यह तो हम सभी जानते हैं। अतः जो लोग हमेशा किसी न किसी कारण से चिंता में पड़े रहते हैं, उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता और वे जल्द ही किसी न किसी रोग के शिकार हो जाते हैं। एक अन्य परीक्षण में पाया गया कि जो लोग हमेशा चिंतित रहते हैं, उन्हें एंजाइना पेन (हृदय शूल) का खतरा दूसरों की तुलना में अधिक होता है। शोधकर्ताओं का यह भी निष्कर्ष था कि पत्नी का प्यार पति के शारीरिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। सामाजिक समर्थन और स्वीकृति की भी इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसा देखा गया है कि जो लोग समाज और जाति से कटकर रहते हैं, दस-बारह सालों में उन्हें मृत्यु का भय उन लोगों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक होता है, जो भावनात्मक स्तर पर समाज से जुड़े रहते हैं।

प्यार, आदर और आत्मीयता की अनुभूति हमारे स्वस्थ और निरोगी रहने के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? यह एक रहस्य है, पर महत्वपूर्ण है, इसमें संदेह नहीं, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे स्वास्थ्य और जीवन को प्रभावित करने वाले इन महत्वपूर्ण तथ्यों की अहमियत को हम नजरअंदाज कर देते हैं। आज आवश्यकता है इनके महत्व को समझने और उन पर अमल करने की। हमारे स्वास्थ्य और जीवन का हमारी भावनाओं से गहरा ताल्लुक होता है, अगर हम भावनात्मक स्तर पर भरे-पूरे होते हैं तो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसके विपरीत अगर हम भावनात्मक रूप से रीते होते हैं तो हममें रोगों से लड़ने, निपटने की क्षमता भी कम होती है। इसलिए खुशदिल लोग और खुशदिल माहौल में रहने वाले लोग कम बीमार पड़ते हैं, साथ ही उनमें कार्यक्षमता भी परेशान और भावुक स्तर पर रीते लोगों के मुकाबले ज्यादा होती है।

अक्सर देखा गया है कि जिनके बारे में डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि उनके ठीक होने या बचने की कोई संभावना नहीं है, उनमें से कई लोग न केवल बच जाते हैं, बल्कि कई सालों तक स्वस्थ जीवन भी जीते हैं। कौन कह सकता है कि यह प्यार की अद्भुत शक्ति का चमत्कार नहीं है? अब इसका यही अर्थ हुआ न कि इलाज के अलावा और भी कोई चीज है, जो हमें किसी रोग से छुटकारा पाने में मदद करती है और वह चीज है- प्यार का एहसास, जो रोग से लड़ने वाले हार्मोनों की सक्रियता को तीव्र कर देता है। इससे हमारे अंदर जीने की लालसा बलवती हो जाती है और हम अपने रोग पर काबू पा जाते हैं। पर इन सबसे हमारा मतलब यह नहीं कि संतुलित आहार और दवाइयों का कोई महत्व नहीं है। कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि प्यार किए जाने का एहसास न केवल रोगों से छुटकारा पाने के लिए, बल्कि लंबे स्वस्थ जीवन के लिए भी बेहद जरूरी है।सबसे बड़ा रोग अकेलापन

हाल ही में स्वीडन में किए गए एक परीक्षण में पाया गया कि जो लोग एकांत और अकेलेपन के शिकार थे, उन्हें असमय मृत्यु का खतरा दूसरों की अपेक्षा चार गुना अधिक था। इसी संबंध में अधिक उम्र के लोगों पर एक अन्य अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि जिन लोगों को प्यार, आदर और भावनात्मक सहयोग नहीं मिलता, उनमें अकाल मृत्यु की दर दूसरों की तुलना में दो गुना अधिक होती है।

परिवार के सदस्यों, सहकर्मियों और अपने संप्रदाय के लोगों के साथ भावनात्मक जुड़ाव हमें संक्रामक रोगों से भी बचाता है। इस तरह के शोध से यह भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यदि व्यक्ति को प्यार और आत्मीयता मिलती है तो न केवल उसका स्वास्थ्य ठीक रहता है, बल्कि रोग हो जाने पर वह जल्दी ठीक भी हो जाता है। एकांत और अकेलापन कष्ट, रोग और मृत्यु के भय की तीव्रता को बढ़ा देता है(मीरा राय,नायिका,नई दुनिया,2.1.11)

10 टिप्‍पणियां:

  1. पारिवारिक और व्यक्तिगत ही नहीं सामाजिक समस्या भी बन रही है यह .....

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  2. यह सच है कि प्यार और स्नेह में बेपनाह ताकत होती है ! मेरा अपना खुद का अनुभव है कि स्नेह के साथ माथे पर रखा हाथ ही आधी बीमारी ठीक करने के लिए काफी होता है ! मगर यह हाथ सबके भाग्य में नहीं होता !
    आज के समय में स्नेही जन मिलना ही दुर्लभ हैं !
    बेहतरीन लेख के लिए आपका आभार !

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  3. "हैं जिनके पास अपने तो वो अपनों से झगड़ते हैं
    नहीं जिनका कोई अपना वो अपनों को तरसते हैं

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  4. सच कहा शत प्रतिशत , सुन्दर आलेख , ब्लॉग के नाम अनुसार उपचार करता हुआ...

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  5. बिल्कुल सही कहा...भावनात्मक सुरक्षा इंसान को हर प्रकार से मज़बूत बना देती है...आपका आलेख पढ़कर अच्छा लगा कि जब हम सब अकेलेपन की एक प्रकार की दीवार में चुनते जा रहे हैं, कोई है जो अभी भी हमें प्यार और भावनाओं से रू-ब-रू कराने की कोशिश कर रहा है...

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  6. बहुत अच्छा लेख लिखा आपने ।
    रात भर तरसते रहे सूरज की रौशनी को
    और सुबह हुयी तो सोते रहे शाम तक
    (जब हमे प्यार मिलता है अब हम उसकी कद्र नही करते , हाँ जब नही मिलाअ तो जिन्दगी के माअने ही बेमानी से लगते है )

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  7. सतीश अंकल ने यहाँ का पता दिया...
    बहुत ही अच्छा उपचार बताया है
    लेख एकदम सत्य है... सच
    धन्यवाद इन विचारों को बाटने के लिए...

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  8. bahut achha laga lekha padhkar....
    prem isliye bhi sashkat hai ki vo hame hamesha
    yeha ahasas dilata hai ki tum mere liye bahut khas ho....

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  9. मैं अपने गुरु भाई सतीश सक्सेना का शुक्र-गुजार हूँ |जो मुझे यहाँ तक लाए | मैं इसमें लिखी बातों के भुगतने का सबूत हूँ | ये शत:प्रतिशत ठीक हैं |इस लेख के जरिये हम जैसो का ख्याल रखने ले लिए दिल से आप को मुबारक |
    खुश रहिये सेहत तो आप बाँट ही रहे है |

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