सोमवार, 17 जनवरी 2011

दिल्लीःगर्भपात के मामले में नियमों की अनदेखी

राजधानी में ऐसे क्लीनिक चलाए जा रहे हैं, जहां गर्भपात के मामलों में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस सिलसिले में कानून व नीतियों के प्रति जागरूकता लाने के प्रयास तेज करने की जरूरत है। यह टिप्पणी रोहिणी कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लॉ की अदालत ने युवती से दुष्कर्म के बाद उसका गर्भपात कराने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य निदेशालय को कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश की प्रति दिल्ली सरकार के प्रधान स्वास्थ्य सचिव, दिल्ली चिकित्सा परिषद के सचिव सहित संबंधित उपायुक्त को भी भेजने को कहा है। अदालत ने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेगनेंसी एक्ट के तहत 12 सप्ताह से अधिक गर्भवती महिला का गर्भपात न कराने का प्रावधान है। गर्भपात भी तभी कराया जा सकता है, जब महिला के जीवन को खतरा हो या फिर वह दुष्कर्म की शिकार हुई हो। गर्भपात सरकार से पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर के अलावा उन्हीं अस्पतालों में कराया जा सकता है, जिसका संचालन सरकार की ओर से किया जा रहा है या फिर चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता वाली जिलास्तरीय कमेटी से अनुशंसित हो, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। महेंद्रा पार्क थाना क्षेत्र में रहने वाली पीडि़ता ने अपने साथ काम करने वाले पंकज मित्तल पर शादी का दबाव बनाने और उसके साथ दुष्कर्म कर बिना उसकी सहमति के गर्भपात कराने का आरोप लगाया है। मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि पीडि़ता का गर्भपात रोहिणी सेक्टर सात में निजी क्लीनिक चलाने वाली डॉ. निशा जैन ने कराया था। डॉ. निशा जैन का क्लीनिक गर्भपात के कानूनी मानकों को पूरा नहीं कर रहा था। ऐसे में सरकारी वकील ने मामले में चिकित्सक को भी अभियुक्त बनाने के लिए आवेदन दाखिल किया था(दैनिक जागरण,दिल्ली,17.1.11)।

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