सोमवार, 17 जनवरी 2011

मोबाइल फोन कर रहा है दिमाग की बत्ती गुल

मोबाइल फोन का बहुत ज्यादा इस्तेमाल हमारे स्वास्थ्य पर खराब असर डालता है। हममें से ज्यादातर लोग इस बात को जानते तो हैं, पर इस संबंध में दी गई सलाह को मानने की जरूरत कभी नहीं समझते। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के नए शोध में दावा किया गया है कि मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल न सिर्फ पुरुषों को नपुंसक बनाता है,बल्कि इसका मस्तिष्क पर भी बेहदखराब असर पड़ता है। शोध को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) व काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर)ने प्रायोजित कि या था। जेएनयू के प्रोफेसर जितेंद्र बेहारी ने बताया कि हमने चूहों पर परीक्षण किया। इस दौरान चूहों को बिल्कुल ऐसे माहौल में रखा गया जैसा मोबाइल टावर के रेडिएशन के उत्सर्जन और मोबाइल फोन के इस्तेमाल के दौरान होता है। 

दिमाग को कर देता है फ्रीज
फ्री रेडिकल के बनने की वजह से दिमाग के काम करने के तरीके और फिजियोलॉजी पर बुरा असर पड़ता है। फ्री रेडिकलऔर उसके निष्प्रभावीकरणमें असंतुलन हो जाता है तो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (अल्जाइमर,हार्ट फेल, पार्किंसन जैसी बीमारियां) होता है। यह ट्यूमर के विकसित होने का भी कारण होता है। 

घट जाती है प्रजनन क्षमता
रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक रेडियो फ्रिक्वेंसी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के प्रभाव में रहने से द्विगुणित डीएनए, स्पर्म कोशिकाओं में टूट जाते हैं। परीक्षण में पता चला कि रेडिएशन के प्रभाव में आने से स्पर्म की संख्या में कमी आ जाती है। 

शरीर का पानी सोख लेता है मोबाइल
मोबाइल का लंबे समय तक लगातर प्रयोग करने से बिलकुल खाना पकाने की प्रक्रिया की तरह आपके शरीर का पानी रेडिएशन सोख लेता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वद्यिालय के प्रो. जितेंद्र बेहारीका कहना है कि मानव शरीर में करीब 70 प्रतिशत स अधिक पानी होता है। ऐसे में जब ये पानी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के प्रभाव में होता है तब वो रेडिएशन का अवशोषण करता है। उदाहरणत:,जब खाने को माइक्रोबेव ओवेन में पकाया जाता है तो सबसे पहले खाने का पानी सूखता है। करीब-करीब ऐसा ही मानव शरीर में होता है। उन्होंने कहा कि इसका विपरीत असर शरीर के अन्य अंगों पर दिमाग पर पड़ता है। खासकर ऐसे अंगों और दिमाग पर इसका दुष्प्रभाव अधिक होता है क्योंकि इनमें द्रव्य की मात्रा अधिक होती है। शरीर में द्रव्य की मात्रा में असंतुलन की स्थिति होने से कइ बीमारियां पैदा होती है। बेहारी ने बताया कि पश्चिमी देशो में हुए शोध भी इस बात की तसदीक करते हैं कि मोबाइल नपुंसकता को बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल में लंबे समय तक बात करने से मोबाइल काफी गरम भी हो जाता है यह भी सेहत के लिए खासा नुकसानदायक होता है।यही नहीं ,मोबाइल का बेतहाशा प्रयोग करने से विद्युत चुंबकीय क्षेत्र फ्री रेडिकल की संख्या में इजाफा कर देता है जिससे बायोलॉजिकल सिस्टम के बिगड़ने की संभावना काफी बढ जाती है।

बीमारियों का खतरा 
*हृदय रोग 
*आर्थराइटिस
*कैंसर 
*अल्जाइमर 
*जल्द बुढ़ापा आ जाना 

फोन की क्वालिटी अहम 
प्रो. बेहारीने बताया कि इसमें दोराय नहीं कि मोबाइल का अधिक समय तक इस्तेमाल खतरनाक है। पर कितना, यह कई बातों पर निर्भर करता है। रेडिएशन का पड़ने वाला प्रभाव इस पर भी निर्भर करता है कि आप किस क्वालिटी का फोन प्रयोग कर रहे हैं,आपकी उम्र क्या है,कितने समय तक इस्तेमाल करते हैं,आपको कौन-कौन सी बीमारी है आदि(अनुराग मिश्र,हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)

3 टिप्‍पणियां:

  1. अंतिम पैहरे में जो आदि आदि है उसकी जानकारी कहां से मिलेगी.....

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