मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

हिमाचल में डॉक्टरों को मिला दवा दुकानों पर छापे मारने का अधिकार

हिमाचल में,पुलिस की छापामारी के दौरान अब स्थानीय डॉक्टर ड्रग इंस्पेक्टर की भूमिका में होंगे। प्रदेश के सभी 12 सीएमओ और 73 बीएमओ पुलिस का सहयोग करेंगे। नारकोटिक ड्रग एक्ट की ऐसी ही कुछ शक्तियां आईजीएमसी और मेडिकल कॉलेज टांडा माइक्राबायोलॉजिस्ट डॉक्टरों को भी दी गई हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन शक्तियों के चलते डॉक्टर अपने स्तर पर अपने क्षेत्र में पुलिस की मदद से दवा की दुकानों और नशीली दवाओं की खरीद फरोख्तकरने वालों पर शिकंजा कस सकेंगे। इससे पहले ऐसा करने के लिए पुलिस और ड्रग इंस्पेक्टर की मौजूदगी होना जरूरी थी। केवल ड्रग इंस्पेक्टर की दवा की दुकानों के खातों की जांच कर सकता था।

राज्य में ड्रग इंस्पेक्टरों का संकट दूर करने के लिए जल्द ही 10 के करीब ड्रग इंस्पेक्टरों की भर्ती की जा सकती है। इसके लिए स्वास्थ्य सुरक्षा विनियम निदेशालय ने प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इस समय प्रदेश के प्रदेश के 12 जिलों के लिए आठ ड्रग इंस्पेक्टर हैं। ऐसे में कई जिलों में एक ड्रग इंस्पेक्टर को दो—दो जिलों को कार्यभार देखना पड़ रहा है।

ड्रग इंस्पेक्टरों की कमी के चलते सभी जिलों में दवा की दुकानों और दवाइयों के सही उत्पादन और मार्केटिंग पर नजर रखने में परेशानी आ रही है। प्रदेश में अवैध तौर पर नशीली दवाओं की बिक्री पर शिकंजा कसने में भी परेशानी आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिक ड्रग इंस्पेक्टर की तैनाती के बाद प्रदेश में छापामारी, लाइसेंसिंग और दवा क्वालिटी जांच कार्य नियमित रूप से चल सकेगा। बड़े जिलों में दो—दो ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किए जा सकेंगे। किसी एक अवकाश पर होने के बावजूद काम प्रभावित नहीं हो सकेगा।

अभी कार्यप्रणाली नियमित नहीं हो पा रही है। एक जिले के पूरे निरीक्षण में ही कई दिन लग जाते हैं। दवाइयों की सैंपलिंग भी समय पर नहीं पा रही है। स्वास्थ्य सुरक्षा विनियम निदेशक रोहित जमवाल का कहना है कि ड्रग इंस्पेक्टर की कमी को लेकर विभाग गंभीर है। नई भर्तियों को लेकर विभाग ने प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। जैसे ही सरकार से मंजूरी मिलती है ड्रग इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

स्वास्थ्य निदेशक डॉ. विनोद पाठक का कहना है कि गैर-कानूनी तरीके से नशीली दवाइयों की बिक्री में इजाफा हुआ है। ये दवाइयां केवल डॉक्टर की पर्ची पर दी जा सकती हैं। बिना स्टॉक तैयार किए इन दवाइयों की बिक्री अपराध है। इसलिए डॉक्टरों को ये शक्तियां मिलने से काफी हद तक इस इस अवैध कारोबार पर लगाम कसी जा सकेगी। स्वास्थ्य सुरक्षा विनियम निदेशक रोहित जमवाल ने बताया कि प्रदेश में अभी 14 अन्य डॉक्टरों को ये शक्तियां दी गई हैं। भविष्य में इस संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है(दैनिक भास्कर,शिमला,21.12.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. पहले ही दवा विक्रेताओं मे इतनी साँठ गाँठ है कि ये निर्णय तो नशा और बढायेगा। सब से हानिकारक होगा ये फैसला। आभार।

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