बुधवार, 10 नवंबर 2010

खुली हल्दी पाउडर का प्रयोग घातक

सेहत के लिए मुफीद मानी जाने वाली हल्दी आपको बीमारी भी दे सकती है। बाजार में बिक रहे खुले हल्दी पाउडर में तमाम तरह के हानिकारक रसायनों का प्रयोग हो रहा है। यह राजफाश लखनऊ स्थित भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) के वैज्ञानिकों ने किया है। संस्थान के फूड टॉक्सीकोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों ने लखनऊ के अलग-अलग बाजारों से हल्दी पाउडर के नमूने लिए थे। पचास नमूने ब्राण्डेड के जबकि इतने ही नमूने खुली हल्दी के लिए गए। इन सौ नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया तो चौंकाने वाली जानकारियां सामने आयीं। सभी ब्राण्डेड नमूने प्रयोग के लिए सुरक्षित पाए गए जबकि जांचे गए खुले नमूनों में से 17 फीसदी में खतरनाक मेटेनिल यलो रंग की मिलावट पाई गई। शेष नमूनों में नकली व प्रतिबंधित रंगो का प्रयोग किया गया था। आइआइटीआर के फूड टॉक्सीकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डा.मुकुल दास ने बताया कि खुली मिल रही हल्दी की घटिया किस्म का इस्तेमाल होता है। इसमें हल्दी को पीला करने वाला रंग करक्यूमिन काफी कम मात्रा में होता है। इस कारण यह हल्दी पाउडर हल्के पीले रंग का दिखायी देता है। इस हल्दी पाउडर को चटक पीला रंग देने के लिए प्रतिबंधित के अलावा नकली रंगों का भी प्रयोग किया जाता है। करक्यूमिन लौंगा किस्म उपयुक्त दरअसल हल्दी की करक्यूमिन लौंगा किस्म ही खाने के लिए उपयुक्त है। इसमें हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य तत्व करक्यूमिन 2 से 4 फीसदी तक पाया जाता है जबकि अन्य किस्मों में 2 फीसदी से कम पाया जाता है। यही वजह है कि लौंगा किस्म की हल्दी सेहत के लिए मुफीद मानी जाती है। मेटेनिल यलो रंग हानिकारक वैज्ञानिकों के अनुसार इस रंग को खाने से अपच व एलर्जी हो सकती है। यही नहीं, लीवर और प्रजनन तंत्र पर भी इसका बुरा असर पड़ता है(रूमा सिन्हा,दैनिक जागरण,लखनऊ,10.11.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने बिल्‍कुल सही कहा है इस बारे में .......पर किया क्‍या जाये हर जगह मिलावट तो पहले मिलती है शुद्धता बाद में ।

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