गुरुवार, 4 नवंबर 2010

शुगर-फ्री कैलोरी-फ्री नहीं होता

दीपावली में शुगरफ्री मिठाई के नाम पर कालाजाम, कराची हलवा, मोतीपाक लड्डू, डोडा बरफी, पनीर लड्डू, संदेश, क्रीम लड्डू, क्रीम बर्फी, क्रीम रोल, बॉर्नवीटा बर्फी, कैडबरी रोल, जीनी लड्डू जैसी कई वैरायटी पेश की गई हैं। मिठाइयों के अलावा शुगर-फ्री ड्रिंक, चॉकलेट, जैम, केक जैसी तमाम चीजें भी मार्किट में उपलब्ध हैं।

इन चीजों को बनाने में शुगर के अलावा घी, खोया जैसी बाकी वे सारी चीजें उतनी ही होती हैं, जितनी आम मिठाइयों में, लेकिन लोग शुगर फ्री के नाम पर जमकर खा लेते हैं और बाकी चीजें उनका कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर सब बढ़ा देती हैं। यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। इनमें आर्टिफिशल स्वीटनर्स डाले जाते हैं, जिन्हें लंबे वक्त तक इस्तेमाल करना नुकसानदेह हो सकता है।

शुगर-फ्री कैलोरी-फ्री नहीं अक्सर लोग शुगर-फ्री को कैलोरी फ्री मानते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। अक्सर एक के बजाय लोग दो-तीन डाइट कोक पी जाते हैं, जबकि इनमें सोडियम और फॉस्फोरस ज्यादा होता है। ये हड्डियों के लिए नुकसानदेह हैं। फॉस्फोरस बॉडी में से कैलशियम रिप्लेस करता है। ऐसे में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा, अनिद्रा, अवसाद और पेट की तमाम बीमारियां हो सकती हैं।

शुगर फ्री के नाम पर जिस रसायन ‘एस्पार्टेम’ का प्रयोग होता है, वह मानव मस्तिष्क की न्यूरल कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इतना ही नहीं, गर्भावस्था में इसका सेवन शिशु को मानसिक विकलांग कर सकता है। साथ ही मिर्गी और अस्थमा जैसी बीमारियां हो जाती हैं। सिरदर्द, चक्कर, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना, उलटी, जोड़ों में दर्द, पैरों का सुन्न हो जाना या पेट में गड़बड़ी जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं।

कम दिखने और याददाश्त कम होने जैसी परेशानियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशल स्वीटनर्स अगर लिमिट में लिए जाएं तो सुरक्षित हैं। इन्हें कभी सीधे नहीं खाना चाहिए, बल्कि चाय-दूध में डालकर ही लें। आर्टिफिशल स्वीटनर को उबालना भी नहीं चाहिए। चाय-दूध, खीर आदि के ठंडा होने पर ही उनमें आर्टिफिशल स्वीटनर मिलाएं। इसकी एक दिन में दो से चार गोलियां खा सकते हैं। एक-आध साल लेने के बाद कुछ महीनों का गैप रखना चाहिए। उस दौरान, मीठे से दूर ही रहें।

क्या हैं आर्टिफिशल स्वीटनर मीठा दो तरह का होता है, न्यूटीट्रिव और नॉन न्यूटीट्रिव। एक वह, जिसमें पोषक तत्व हैं और दूसरा, जिसमें पोषक तत्व नहीं होते। नॉन न्यूटीट्रिव यानी इनमें कोई कैलोरी नहीं होती। इन्हें आटिर्फिशल स्वीटनर या शुगर-फ्री कहा जाता है। यह मीठा ब्लड शुगर लेवल पर कोई असर नहीं डालता।

आमतौर पर डायबिटीज के मरीज और वजन कम करने के इच्छुक लोग ऐसे मीठे का इस्तेमाल करते हैं। इस कैटिगरी में प्रमुख स्वीटनर हैं सैक्रीन। यह मार्किट में मौजूद सबसे पुराना आर्टिफिशल स्वीटनर है। सैक्रीन स्वीट-ए-लो, शुगर ट्वीन, स्वीट मैजिक, सुकारिल आदि ब्रैंड नाम से मिलता है, लेकिन अब यह ज्यादा चलन में नहीं है।

इन दिनों सबसे ज्यादा एस्पार्टम बिकता है। यह एस्पार्टिक एसिड और फिनाइल एलालाइन जैसे केमिकल्स से मिलकर बनता है। इसके एक ग्राम में चार कैलोरी होती हैं, लेकिन एक बार में इतनी कम मात्र खाने की चीजों में इस्तेमाल की जाती है कि अमूमन कैलोरी काउंट नहीं हो पाती। इसे भी मोटे तौर पर शुगर-फ्री ही माना जाता है।

सुक्रालो आम चीनी से ही बनाया जाता है, लेकिन इसमें कैलोरी नहीं होती। यह मार्किट में स्प्लेंडा नाम से मिलता है। यह चीनी से 600 गुना ज्यादा मीठा है। चीनी से बना है, इसलिए इसे नुकसानदेह नहीं माना जाता। स्टीविया स्टीविया एक पौधा है। यह नेचुरल है और विदेशों में काफी चलन में है। इसे घर में भी लगा सकते हैं। पत्तियों को पीसकर तरल रूप में या सुखाकर पाउडर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

कौन न करें सेवन बारह वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों के अलावा पार्किंसन, ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन, किडनी और मिर्गी के मरीजों को आर्टिफिशल स्वीटनर नहीं लेने चाहिए।

क्या खाएं कार्बोहाइड्रेट वाले ऐसे खाद्य पदार्थ को चुनें जिनका ग्लाईसेमिक सूचकांक कम हो। इस तरह के खाद्य पदार्थ आम तौर पर ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक होते हैं क्योंकि इनमें विटामिन, खनिज, फाइबर इत्यादि होते हैं एवं ये कम परिष्कृत होते हैं जैसे फल, हरी सब्जियां, सेम इत्यादि।

सभी प्रकार के विटामिन, प्रोटीन, खनिज, फाइबर इत्यादि खाने में शामिल करें। शोध से पता चलता है कि फाइबर से समृद्ध आहार आपके शरीर में रक्त शर्करा को नियंत्रित करने के साथ कोलेस्ट्रॉल को भी घटाते हैं। फल और सब्जियों का भरपूर सेवन करें और अपने भोजन में साबुत अनाज जरूर शामिल किया करें। पपीता, सेब और अमरूद खा सकते हैं पर इसकी मात्र 100 ग्राम से ज्यादा न हों।

खाना पकाने के लिए स्वास्थ्यवर्धक तेलों का उपयोग करें (जिनमें मोनो और पाली-असंतृप्त वसा रहते हों) न कि संतृप्त वसा और ट्रांस वसा वाले तेलों का। यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि आप कितनी मात्र में खा रहे हैं। इतना ध्यान में रखें कि आप जरूरत से ज्यादा जितनी भी कैलोरीज लेंगे वह अतिरिक्त वसा में परिवर्तित होकर आपके शरीर में संग्रहित हो जायेगा और जरूरत से ज्यादा कैलोरीज के कारण आपका वजन, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा की मात्र बढ़ेगी।

अत्यधिक वजन या वसा के कारण आपके शरीर की इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती है (इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त शर्करा को नियंत्रण में रखता है)। मोटापे से ग्रस्त लोगों या ज्यादा वजन वालों को खास ध्यान रखना चाहिए।

(अनुजा भट्ट,हिंदुस्तान,दिल्ली,2.11.2010)

1 टिप्पणी:

  1. सजग करती पोस्ट.
    मैंने तो यहाँ तक सुना है के सुगर फ्री से कैंसर तक होता है

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