गुरुवार, 25 नवंबर 2010

देश के इतिहास में पहली बार,दाहिने हार्ट का सफल ऑपरेशन रायपुर में हुआ

राजधानी के एक निजी अस्पताल में दाएं हार्ट का सफल ऑपरेशन किया गया है। डॉक्टरों का दावा है कि देश का यह पहला मामला है। इस तरह के ऑपरेशन में हाई रिस्क होता है।

इसमें मरीज की जान बचने की संभावना कम होती है। कार्डियोलॉजिस्ट को भी सर्जरी के दौरान काफी परेशानी होती है। एक लाख लोगों में दो के हार्ट बाईं के बजाय दाईं ओर हो सकते हैं।

राजेंद्रनगर निवासी 55 वर्षीय कृष्णा खंदार को हार्ट अटैक आने पर आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे एस्कार्ट अस्पताल रिफर किया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि कृष्णा का हार्ट बाईं के बजाय दाईं ओर स्थित है। यह स्थिति उनके लिए अचंभित करने वाली थी।

यहां के चीफ कार्डियोलाजिस्ट डॉ. सतीश सूर्यवंशी ने दिल्ली के एक विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेकर 9 नवंबर को कृष्णा का सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन का खर्च राज्य सरकार ने संजीवनी कोष के तहत उठाया।

मुख्य नली में ब्लाकेज :
कृष्णा के हार्ट की मुख्य नली में ब्लाकेज था। दिल की धड़कन बहुत धीमी थी। इसे सामान्य करने के लिए तार डाला गया। इसके बाद एंजियोप्लास्टी की गई। धड़कन को सामान्य करने के लिए पेसमेकर भी लगाया गया। डॉ. सूर्यवंशी ने बताया कि कृष्णा को इससे पहले कभी कोई परेशानी नहीं हुई थी।


मकान बेचने की थी तैयारी
कृष्णा का इलाज कराने के लिए घर वाले मकान बेचने या गिरवी रखने की योजना बना रहे थे। मरीज के बड़े बेटे ने बताया कि कारपेंटरी कर गुजारा करने के कारण ऑपरेशन के लायक पैसे नहीं थे। अस्पताल जाने के बाद डॉक्टरों ने राज्य सरकार के संजीवनी कोष के बारे में बताया। इलाज में एक भी पैसा नहीं लगने से हमें राहत मिली है। इसके लिए राज्य सरकार धन्यवाद का पात्र है।


लीवर भी दाहिनी के बजाय बाईं ओर था
कृष्णा का हार्ट के साथ लीवर भी अपोजिट साइड में था। लीवर दाहिनी के बजाय बाईं ओर था। इस स्थिति को डेक्सट्रोकाडिया विथ साइट्स इनवर्सेस कहा जाता है।

एमएमआई में कार्डयिक सर्जन डॉ. वाहिद सुल्तान के मुताबिक मां के गर्भ से ही बच्च अपोजिट हार्ट व लीवर लिए पैदा होता है। इसे कंजेनेटल एनामली केस कहते हैं। यह काफी रेयर होता है। बचपन में जब तक कोई पीडियाट्रिक्स सर्जन न देख ले, हार्ट या लीवर अपोजिट होने का पता नहीं चलता।

हार्ट व लीवर अपोजिट साइड होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं है। हार्ट अटैक आने के बाद इस तरह के केस का इलाज करना हाई रिस्क हो जाता है। मरीजों की जान बचाने में सफलता का प्रतिशत काफी कम हो जाता है। एनाटॉमी अपोजिट होने से सही ओरिएंटेशन भी नहीं हो पाता(दैनिक भास्कर,रायपुर,25.11.2010)।

नोटःइस पोस्ट की चर्चा दिनांक 26.11.2010 के चर्चामंच पर की गई है जिसका लिंक यहां है

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट का लिंक कल शुक्रवार को (२६--११-- २०१० ) चर्चा मंच पर भी है ...

    http://charchamanch.blogspot.com/

    --

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  2. कितने अजूबे होते हैं दुनिया में ...अच्छी जानकारी देती पोस्ट

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  3. जानकारी के लिए धन्यवाद. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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  4. इसके लिए राज्य सरकार धन्यवाद का पात्र है।

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