शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2010

अंग प्रत्यारोपण कानून में संशोधन की तैयारी

नया अंग प्रत्यारोपण कानून कार्निया निकालने वालों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इस कारण मरीज कार्निया प्रत्यारोपित नहीं करा पा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नए कानून में संशोधन की तैयारी कर रहा है।
देश में हर साल औसतन 21 लाख से ज्यादा लोग अंधता के शिकार होते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इनमें सबसे ज्यादा यूपी के साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग हैं। इनमें 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे भी हैं। दिल्ली में अंधता का ग्राफ 32092 पर है। केंद्र सरकार ने नेत्रदान को बढ़ावा देने के लिए हेमा मालिनी, ऐश्वर्या राय को ब्रांड एंबेसडर बनाया था। अभियान के बाद लोग नेत्रदान के लिए आने भी लगे थे। मंत्रालय के अनुसार देश में लगभग 11 लाख लोग कार्निया की खराबी के कारण आंखों की रोशनी खो चुके हैं। इनमें 80 फीसदी को कार्निया प्रत्यारोपण से रोशनी मिल सकती है। पिछले साल मात्र 45000 कार्निया ही आई बैंकों में जमा हुए। मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. ए.एस. राठौर के अनुसार, पिछले साल अंग प्रत्यारोपण कानून में परिवर्तन के बाद अंगदान करने वालों का कार्निया निकालने के लिए दो डॉक्टर होने जरूरी हैं। पहले प्रशिक्षित कार्यकर्ता भी कार्निया निकालते थे। दूर-दराज के इलाकों में डॉक्टरों के उपलब्ध होने में परेशानी होती है। सेंटर फॉर साइट के निदेशक डॉ. महिपाल सचदेव का कहना है कि एड्स, हेपेटाइटिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित लोगों का कार्निया प्रयोग नहीं हो सकता(अमर उजाला,दिल्ली,15.10.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. Radharaman sir,
    aakde ki mane to ang pratyaropan ki zarurat samajh me aati hay..kanun me sansodhan ki zarurat agar hay to jald se jald aisa ho jana chahiye..jisse bahut sare marizon ko laabh mil sake.

    aapka blog mujhe bahut achchha lagta hay.

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