शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2010

कॉमनवेल्थःआहार और प्रदर्शन

हजम करने की ताकत ही बलवान व श्रेष्ठ बनाती है। खाने को तो कोई कुछ भी खा लें लेकिन यदि पचा नहीं पाए तो दुनिया हँसती है, ताना मारती है और कमजोर समझती है। कॉमनवेल्थ गेम्स ठीक से संपन्न हो गए। आयोजकों व खिलाड़ियों ने अब तक का श्रेष्ठ प्रदर्शन किया, सभी बधाई के पात्र हैं। शारीरिक विकास व निरंतर सक्रियता के लिए भोजन, पानी और हवा पर्याप्त मात्रा में मिलना आवश्यक है। इनके बिना शरीर का पूर्ण विकास संभव नहीं है। शरीर के लिए संतुलित भोजन और मन के लिए उत्तम विचार आवश्यक है। भोजन के अभाव में शरीर का विकास रुक जाता है और उत्तम विचारों के न मिलने से मन कुंठित हो जाता है। अच्छे भोजन के साथ अच्छा पाचन तंत्र भी आवश्यक है। वैज्ञानिकों ने आदमी के व्यक्तित्व और उसके कसरत करने के बीच का संबंध पता लगाने का दावा किया है। पीटर बीरो, जो कि मानवीय व्यवहार का अध्ययन कर रहे हैं, का कहना है कि मानव महज कसरत करने वाला पशु नहीं है। एक ही नस्ल का मनुष्य होने के बावजूद उनकी गतिविधियों का स्तर अलग-अलग होता है। डॉ. बीरो के अनुसार महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे व्यवहार इस बात पर निर्भर करते हैं कि शक्ति को कैसे हासिल किया जा रहा है और उसका विस्तार कैसे किया जा रहा है। शक्ति को भोजन या गतिविधियों के द्वारा बढ़ाया जा सकता है। एक महत्वपूर्ण अध्ययन के अनुसार साहसी पक्षियों की तुलना में आलसी व कमजोर पक्षी अपने शिकार आधे बार ही पूरे कर पाते हैं। पीटर बीरो का अध्ययन बताता है कि शरीर की चयापचय दर एवं व्यक्तित्व के बीच एक संबंध देखा गया है। चयापचय क्रिया में भोजन ऊर्जा में परिवर्तित होता है। इस शोध में ज्ञात हुआ है कि विनम्र या आक्रामक होना चयापचय क्षमता से संबंधित होता है। पक्षियों की कई प्रजातियों, चूहों और मछलियों के अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ है कि ये प्रजातियाँ अपने कम चयापचय वाले साथियों के प्रति आक्रामक या प्रभावी रहती हैं। यह बात मनुष्य पर भी लागू होती है। इस अध्ययन से यह स्पष्ट है कि शरीर, व्यवहार, व्यक्तित्व, शक्ति व पाचन तंत्र का गहरा संबंध है। यद्यपि हमारे मनीषी यही बात अनेक बार अनेक तरीकों से साफ कर चुके हैं। सीधे व सपाट शब्दों में यही कहा जा सकता है कि यदि पेट ठीक काम कर रहा है तो पूरा शरीर व दिमाग काबू में रहेगा और व्यक्तित्व निखरेगा। वर्तमान में कॉमनवेल्थ गेम्स के परिणामों व भारत का प्रदर्शन देखकर यह बात पुष्ट होती है। आगामी ओलिम्पिक में हमारे नीति नियंता इस ओर विशेष ध्यान दें तो निश्चित रूप से भारत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है क्योंकि भारत में योग्य प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें आवश्यकता है हजम करने लायक खुराक व ठीक प्रशिक्षण व प्रबंधन की(अलका दर्शन श्रीवास्तव,नई दुनिया,15.10.2010)

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सटीक बात लिखी है आपने
    हम भी यही चाहते हैं

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  2. baat to bilkul sahi hay janab..khao pachao aur khelo..aise bhi agar ham swast nahi rahenge to apni umda pradarshan se pichhe rah jayenge..aane wale samay ke liye bahut sari shubhkaamnayen

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  3. सर्वमान्य नियमों के हिसाब से बातें ठीक है ..लेकिन आज बनावटी और नकली नियम ज्यादा प्रभावी हैं जो जितना भ्रष्ट वो उतना बड़ा खिलाडी और मदारी उदाहरण के तौर पे शरद पवार को ले सकतें हैं ...सारे देश का खाना हजम कर गया है इस खिलाडी ने ...मजाल है की पूरे देश की व्यवस्था एक सवाल भी कर सके ...?

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  4. वाह भाई! बहुत शोध कर यह आलेख लिखा है आपने। बहुत सी नई जानकारी मिली।

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