सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

दवा खरीदें तो बिल जरूर लें

रात में बच्चे की तबीयत खराब होने पर सोढी साहब राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल के पास स्थित मेडिकल स्टोर गए। दवाई की डिटेल्स को चेक किया तो चौंक गए। दवा और बिल पर दिए गए बैच नंबर अलग थे। जब उन्होंने मेडिकल स्टोर पर शिकायत की तो उन्हें फौरन दवा की डिटेल्स के साथ नया बिल बनाकर दे दिया गया। ज्यादातर स्टोर्स पर ऐसा ही होता है। ऐसे में अगर दवा से कोई नुकसान होता है तो मेडिकल स्टोर इस बात से साफ मुकर जाते हैं कि दवा उनके यहां से ली गई क्योंकि बिल और दवा का बैच नंबर अलग-अलग होता है। क्यों जरूरी है बिलः * खरीदारी के प्रूफ को साबित करने के लिए बिल बहुत जरूरी होता है। अगर आप रिटेलर के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो सीधे कंपनी को लिख सकते हैं। * बिल न होने की सूरत में गारंटी कार्ड भी मान्य नहीं होता। * बिल का फायदा यह है कि रिटेलर आपको नकली प्रॉडक्ट नहीं बेच सकता। * बिना बिल के ली गई दवा से नुकसान होने पर रिटेलर और कंपनी उस प्रॉडक्ट की जिम्मेदारी से मुकर जाते हैं। सही बिल होने पर वे ऐसा नहीं कर सकते। * अगर रिटेलर और कंपनी आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करते हैं या आप उनकी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं तो आप कंस्यूमर कोर्ट जा सकते हैं, लेकिन यहां केस दर्ज कराने के लिए बिल होना जरूरी है। * दवा के नकली होने पर आप दवाई कंपनी के अलावा राज्य सरकार के ड्रग कंट्रोलर को शिकायत कर सकते हैं। * अगर प्रॉडक्ट 'आईएसआई' मार्क है तो आप इसकी खराब क्वॉलिटी की शिकायत 'ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड' में कर सकते हैं। 'आईएसआई' सटिर्फिकेट खराब प्रॉडक्ट के बदले आपको नया प्रॉडक्ट देने की गारंटी देता है। क्या होना चाहिए बिल परः * बिल पर रिटेलर का टिन नंबर होना जरूरी है। बिना टिन नंबर के रिटेलर वैट नहीं चार्ज कर सकता। * प्रॉडक्ट का नाम, उसकी डिटेल्स जैसे बैच नंबर, खरीद की तारीख, एमआरपी और चुकाई जाने वाली कीमत आदि बिल पर लिखे होने चाहिए। * दवा और खाने की चीजों पर पर एक्सपायरी डेट भी लिखी होनी चाहिए। * बिल और प्रॉडक्ट्स पर लिखी डिटेल्स एक जैसी होनी चाहिए। अगर प्रॉडक्ट की डिटेल्स और बिल की डिटेल्स अलग-अलग हैं तो बिल का कोई फायदा नहीं है। यह जानना भी है जरूरीः * वैट एक इंडायरेक्ट टैक्स है। रिटेलर इसे कस्टमर से लेकर राज्य सरकार के खाते में जमा करता है। आपके द्वारा वैट का भुगतान किए जाने से राज्य का विकास होता है। * प्रॉडक्ट खरीदते वक्त हमेशा पक्के बिल की मांग करें। अगर रिटेलर बिल देने में आनाकानी करे तो उससे प्रॉडक्ट न खरीदें। * अगर प्रॉडक्ट की कोई गारंटी/वॉरंटी है तो उसका कार्ड लेना न भूलें। कार्ड पर रिटेलर की स्टैंप और बिल नंबर जरूर लिखा होना चाहिए। * अगर आपके पास बिल नहीं है तो आप रिटेलर या कंपनी को किसी भी गलती के लिए दोषी नहीं ठहरा सकते। * रिटेलर अक्सर बिल पर 12 फीसदी वैट लागू होने की बात कहकर कस्टमर को बिल न लेने की सलाह देते हैं। * बिल होने की स्थिति में अगर प्रॉडक्ट में कोई कमी पाई जाती है तो कंपनी उसके बदले नया प्रॉडक्ट देती है। इसके अलावा, आप प्रॉडक्ट में कमी की शिकायत होने पर अपने पैसे वापस करने की मांग भी कर सकते हैं। * अगर कंपनी आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती है तो आप कंस्यूमर कोर्ट में केस दर्ज करा प्रॉडक्ट की कीमत के अलावा हर्जाने की मांग भी कर सकते हैं। * शिकायत होने पर रिटेलर और कंपनी के साथ हुए पत्र व्यवहार/फॉलो-अप का रेकॉर्ड मेनटेन रखें। * हमेशा बिल और गारंटी/वॉरंटी कार्ड को संभाल कर रखें। हेल्पलाइनः अगर रिटेलर या कंपनी बिल देने में आनाकानी करे या बिल में गलत जानकारी लिखी हो तो राज्य सरकार के ट्रेड एंड टैक्स डिपार्टमेंट को इस पते पर लिखें : आयुक्त, ट्रेड एंड टैक्स विभाग, दिल्ली सरकार, बिक्री भवन, आईपी एस्टेट, नई दिल्ली-110002 फोन : 011-2331 9691/2331 8568, फैक्स: 011-2331 9474 email: cst@delhisalestax.com इसके अलावा आप फाइनैंस मिनिस्टर, दिल्ली सरकार को इस पर लिख सकते हैं : डॉ. अशोक कुमार वालिया, वित्त मंत्री, दिल्ली सरकार, छठी मंजिल, ए-विंग, दिल्ली सचिवालय, आईपी एस्टेट, नई दिल्ली-110002 फोन : 011-2339 2103-04 आप दिल्ली सरकार के जन शिकायत सिस्टम 'आपकी सुनवाई' पर भी शिकायत कर सकते हैं। फोन नंबर है - 155345 रियलिटी चेकः कंस्यूमर जागरूक नहीं हैं, इसलिए उसका शोषण होता है। अगर जागरूक कंस्यूमर बिल की मांग करता है तो उसे भारी-भरकम वैट का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। ऐसा कोई प्लैटफॉर्म नहीं है, जहां पर कंस्यूमर को फौरन इंसाफ मिल सके। कंस्यूमर कोर्ट ही एकमात्र ऑप्शन हैं। इन अदालतों में भी कई-कई साल तक लोगों को इंसाफ नहीं मिल पाता(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,3.10.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही उपयोगी ओर ज्ञानवर्धक जानकारी ,इसके लिए बहुत-२ धन्यवाद एवं आभार आपका कुमार राधारमण जी

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