शनिवार, 30 अक्तूबर 2010

लकवा

लकवा या स्ट्रोक मस्तिष्क की बीमारी है। यह दो तरह का हो सकता है। पहला, हार्ट से ब्रेन की ओर जाने या आने वाली खून की नलियों (जिन्हें धमनी और शिरा कहते हैं) के फटने और दूसरा, उनके बंद होने की वजह से।

ज्यादातर मरीजों को धमनी में खराबी की वजह से लकवा का शिकार होना पड़ता है, जबकि डिलिवरी के बाद महिलाओं में होने वाला लकवा अक्सर शिरा में खराबी के कारण होता है। ब्रेन में खून की नली के फटने से मरीज को बहुत तेज सिरदर्द (जैसा जीवन में पहले कभी भी न हुआ हो) या कै शुरू हो जाती है, जो बेहोशी, सांस रुकने और पक्षाघात का कारण बन जाता है।

पहचान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ़ कामेश्वर प्रसाद कहते हैं, खून की नलियों के ब्लॉक होने या लीक करने से ब्रेन का प्रभावित हिस्सा काम करना बंद कर देता है जिससे अचानक मरीज के हाथ-पांव चलने बंद हो जाते हैं, उनमें सूनापन आ जाता है और प्रभावित हिस्से के काम के अनुसार मरीज को देखने, बोलने, बात समझने या खाना निगलने में दिक्कत होने लगती है।

अगर ब्रेन का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ हो तो सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और बेहोशी भी आ सकती है। कई बार तो मरीज ठीक-ठाक सोने जाता है, लेकिन जब उठता है तो उसके एक हाथ या पांव रुक जाता है। कभी-कभार तो दिन में ही अचानक खड़े, बैठे या काम करते हुए लकवा मार जाता है।

कारण लकवा का सबसे बड़ा कारण हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। हालांकि डायबिटीज, हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी स्ट्रोक का खतरा बना रहता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं या ज्यादा शराब पीते हैं, तो भी इसका खतरा रहता है।

सावधानियां डॉ़ प्रसाद के अनुसार जानकारी के अभाव में हर वर्ष स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कुछ सावधानियां बरतकर इसके खतरे को टाला जा सकता है।

- यदि आप 20 की उम्र पार कर चुके हैं तो प्रतिवर्ष नियमित रूप से अस्पताल जाकर ब्लड प्रेशर की जांच करवाना शुरू कर दें। यदि उम्र 35 से ज्यादा है तो साल में एक बार ब्लड शुगर और ब्लड लिपिड की जांच करवाना न भूलें।

- जांच के बाद यदि डॉक्टर खाने में परहेज या व्यायाम की सलाह देते हैं तो उसका पालन करें। यदि आपको बीपी की दवाई शुरू करने के लिए कहा जाता है तो नियमित रूप से जीवनभर दवाएं लेते रहें।

- धूम्रपान और ज्यादा शराब पीने से बचें। खाने में नमक कम लें। नमकीन व अचार लेने से बचें।

- वजन पर नियंत्रण रखें। नियमित रूप से व्यायाम, योग वगैरह करें। तेज-तेज चलें, दौड़ें और फिजिकल एक्टिविटी ज्यादा करें। रोज कम से कम 30 मिनट या चार किलोमीटर अवश्य चलें। आपकी गति ऐसी हो कि दस मिनट में कम से कम एक किमी की दूरी तय कर लें। हफ्ते में कम से कम पांच दिन ऐसा करें।

यदि स्ट्रोक हो.. यदि किसी में पक्षाघात के लक्षण नजर आएं और वह बेहोश हो जाए तो तुरंत उसे करवट के बल लिटा दें और जितनी जल्दी हो, अस्पताल पहुंचाएं। इलाज यदि साढ़े चार घंटे के अंदर शुरू कर दिया जाए तो उनके ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

(सुषमा कुमारी,हिंदुस्तान,26.10.2010)

5 टिप्‍पणियां:

  1. यदि स्ट्रोक हो.. यदि किसी में पक्षाघात के लक्षण नजर आएं और वह बेहोश हो जाए तो तुरंत उसे करवट के बल लिटा दें और जितनी जल्दी हो, अस्पताल पहुंचाएं। इलाज यदि साढ़े चार घंटे के अंदर शुरू कर दिया जाए तो उनके ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
    ये बड़े काम की जानकारी है।

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  2. अच्छी जानकारी के लिए धन्यवाद.आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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