शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

सेंथेटिक पायरेथाइराइड दिलाता है मच्छरों से मुक्ति

कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान डेंगू की दहशत न फैले, इसके लिए नगर निगम अचूक दवा का इस्तेमाल करने जा रहा है। निगम के दावे पर विश्वास करें तो ऐसी दवा का प्रयोग किया जा रहा है, जिसे एक बार छिड़कने मात्र से ही तीन महीने तक मच्छरों से निजात मिल सकेगी। यह दवा केवल दीवारों पर ही छिड़की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान में दर्जनों निगमकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। राजधानी में मच्छरों से निपटने के लिए जितनी भी कीटनाशक दवाओं का प्रयोग हो रहा है, वह निष्प्रभावी साबित होने लगी है। डेंगू व मलेरिया के मामले लगातार बढ़ रहे है। कॉमनवेल्थ गेम्स को देखते हुए कई देशों ने भी दिल्ली में फैले डेंगू को लेकर चिंता जाहिर कर दी। ऐसे में नई दवा सरकार और निगम के लिए ’वरदान‘ साबित हो सकती है। नगर निगम की स्वास्थ्य समिति अध्यक्ष डा. वीके मोंगा के अनुसार डेंगू के कहर को ध्यान में रखकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मुम्बई की एक भारतीय दवा कंपनी की सिफारिश की थी। इसमें कहा गया कि कंपनी द्वारा बनाई जाने वाली ’सेंथेटिक पायरेथाइराइड‘ नामक दवा के प्रयोग से मच्छरों की समस्या से पूरी तरह निपटा जा सकता है। इस दवा का प्रयोग मलेशिया, सिंगापुर के अलावा मुम्बई में भी किया गया, जिसके बेहतर परिणाम मिले है। यह दवा केवल दीवारों पर ही छिड़की जा सकती है अन्यत्र स्थान पर नहीं। दवा छिड़कने के बाद ढाई से तीन माह तक दीवार व उसके आसपास के क्षेत्र में मच्छर नहीं आ सकते। पिछले करीब दो सप्ताह से खेलगांव में इसका प्रयोग किया जा रहा है। दवा का छिड़काव केवल प्रशिक्षित कर्मी ही कर सकते है। अन्य लोगों से यह दवा नहीं छिड़कवाई जा सकती। इसी पहलू को ध्यान में रखकर नगर निगम ने मच्छरों का प्रजनन रोकने के लिए लगाए गए करीब 80 कर्मियों को राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान में प्रशिक्षण दिलवाया। डा. मोंगा का कहना है कि आज से राष्ट्रमंडल खेलों से संबंधित अन्य 21 स्थानों पर इस दवा के छिड़काव का काम शुरू हो जाएगा। दवा छिड़कने वाले कर्मियों को विशेष दस्ताने, मास्क, जूते व जैकेट उपलब्ध कराई जा रही है। संभावना है कि इस दवा के छिड़काव के बाद राजधानी स्थित खेल स्थलों पर आने से भयभीत विदेशियों के मन से दहशत को खत्म करने में भी मदद मिलेगी(राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,3.9.2010)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आप तो हर पोस्ट में जानकारियों का भंडार प्रस्तुत कर रहे हैं।
    आपके प्रयास को सलाम।
    यह भी मेरे लिए एक नई जानकारी है।

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  2. इसे कहते हैं बगल में छोरा और शहर में ढिंढोरा । भारत में कोई चीज बन रही है और उसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन बता रहा है !!
    विदेशियों की जान वाकई कीमती है चाहे वो डेंगू हो या परमाणु ईंधन, देशी मर रहे थे तो कोई फिक्र नहीं ।
    मेरा भारत महान

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