मंगलवार, 14 सितंबर 2010

अमीबियासिस

यह जलजनित रोग है। संक्रामक जल लेने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में यह आसानी से पहुंच जाता है। प्रोटोजोन, एंट-अमीबा हिस्टोलाइटिका, बड़ी आँत को अपना घर बनाता है।

लक्षण : पतले दस्त, परिवर्तित पाखाने की आदत, भोजन पश्चात दस्त, पेट में दर्द, जो रुक-रुक कर हो, कब्ज एवं दस्त बारी-बारी से हों, अपच वायु-विकार हो। भोजन निर्माण एवं संग्रहण से संबंधित समस्त तत्व शुद्धता तथा कीट से बचाव पर केंद्रित होते हैं। विशेष रूप से होटल, ठेले आदि पर अशुद्ध पानी से बने चटखारेदार खाद्य पदार्थ, वेटर द्वारा नाखून, सिर एवं शरीर के अन्य खुले भाग का ध्यान न रखे जाने के कारण अमीबियासिस का जीवाणु एक से दूसरे तक पहुंचता है। यह एककोशीय जीवाणु बड़ी आँत के अतिरिक्त लिवर, फेफड़ों, हृदय, मस्तिष्क, वृक्क, अंडकोष, अंडाशय, त्वचा आदि तक में पाया जा सकता है।

उपचार : चिकित्सक की सलाह से दवा लें। दूषित जल के संपर्क से त्वचा संबंधी रोग भी हो जाते हैं। जहां तक संभव हो सड़क पर बहते पानी में नंगे पाँव निकलने की कोशिश न करें। पेयजल में क्लोरिवेट दवा डालें(हिंदुस्तान,दिल्ली,24.8.2010)।

3 टिप्‍पणियां:

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।