गुरुवार, 2 सितंबर 2010

अस्पताल गर्भवती महिला के इलाज से मना नहीं कर सकता

स़ड़क पर बच्चे को जन्म देने के बाद महिला की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अस्पताल गर्भवती महिला को इलाज देने से इनकार नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार से यह पूछा है कि आखिरकार इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही है। खंडपीठ ने कहा कि गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा देने के अदालती आदेश के बावजूद बच्चे फुटपाथ पर पहली सांस ले रहे हैं। खंडपीठ ने कहा कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह नजर रखे कि अस्पताल में बच्चों की उचित देखभाल हो रही है या नहीं। किसी भी सूरत में अस्पताल गर्भवती महिला के इलाज से इनकार नहीं कर सकता। खंडपीठ ने सरकार को चार हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल कर इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। पिछले दिनों को कनॉट प्लेस के निकट शंकर मार्केट के फुटपाथ पर महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था। महिला फुटपाथ पर गंदे पानी के बीच प़ड़ी हुई पाई गई थी। चार दिनों के बाद महिला की मौत हो गई। न्यायालय ने कहा है कि सरकार द्वारा गरीब लोगों के लिए कल्याणकारी योजना चलाने के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं। न्यायालय ने कहा कि सिविल सोसायटी में इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए। खंडपीठ ने इस मामले में न्यायालय की मदद के लिए सीनियर एडवोकेट कोलिन गोनजालविस को अमेकस क्यूरी नियुक्त किया है। बच्ची का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने खंडपीठ के समक्ष पेश होकर कहा कि बच्ची सेप्टीसीमिया रोग से पीड़ित है। लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची अब खतरे से बाहर है क्योंकि रोग प्रारंभिक चरण में था, जिसे दूर कर दिया गया है। हालांकि न्यायालय ने डॉक्टरों को समय-समय पर बच्चे की जांच करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने डॉक्टरों को एचआईवी टेस्ट करने की भी सलाह दी है। न्यायालय ने बच्ची को फुटपाथ से पुलिस तक पहुंचाने वाली महिला रीतू आर्थर फ्रेड्रिक को हफ्ते में तीन दिन मिलने की इजाजत दी है। मुलाकात ४५ मिनट की होगी। बच्ची को फिलहाल एक गैर सरकारी संस्था में रखा गया है(नई दुनिया,दिल्ली,2.9.2010)।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी हर पोस्ट, हर प्रस्तुति अप्रतिम होती है

    उपयोगी भी और रोचक भी.

    मुबारक हो........

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