मंगलवार, 24 अगस्त 2010

स्वास्थ्य प्रश्नोत्तर

मेरे पिताजी की उम्र 62 वर्ष है। पिछले 20 वर्षो से वह सोराइसिस से पीडि़त हैं। कई जगह इलाज करवाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उनका पेट भी थोड़ा निकला है। इसके अलावा नाखूनों में भी समस्या है। क्या आयुर्वेद में इसका कोई कारगर इलाज है? - मनोज कुमार, पीजीआई, लखनऊ बेशक इसका आयुर्वेद में बहुत कारगर इलाज है बशर्ते धैर्य रखकर दवा का सेवन करना पड़ेगा। इसमें अपने पिता जी को रात में हरड़ चूर्ण का इसबगोल की भूसी के साथ सेवन करायें। इसमें वात, पित्त और कफ का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। इस मर्ज में निम्नादि चूर्ण दो ग्राम, चोप चिन्यादि चूर्ण दो ग्राम सुबह और शाम खायें। साथ ही महा मजिष्ठादि की दो गोली, आरोग्य वर्धनी बटी सुबह शाम, खदिरारिष्ट 20 मिली ग्राम, पुनार्वासव 20 मिली ग्राम ट्रिपल सेवन ऑयल, गुड़ुच्यादि तेल मिलाकर लें। इसके अलावा कुछ परहेज जैसे मिर्च, मसाला व गरिष्ठ भोजन न करें। इन सब दवा के खाने से खून शुद्ध होगा और नाखूनों की समस्या में भी आराम मिलेगा। मेरी उम्र 80 वर्ष है। मुझे पिछले काफी समय से अस्थमा की समस्या है। इसके लिए इनहेलर का प्रयोग करता हूं। इन दिनों काफी परेशानी हो रही है, बलगम बहुत आता है। पंखा बर्दाश्त नहीं होता है। घुटनों में भी दर्द बना रहता है। दवा के भरोसे चल रहा हूं। - बलदेव सिंह कोहली, चन्दर नगर लखनऊ आप जिस प्रकार से बता रहे हैं उससे लगता है कि आपको बहुत अधिक परेशानी है। सबसे पहले अगर आप अगरबत्ती या धूप बत्ती जलाते हैं तो उसके धुएं से बचें। पानी उबाल कर पियें। दवा में श्र्वास कास चिन्तामणि रस दो ग्राम, श्र्वास कुठार रस पांच ग्राम, शुद्ध टंकण पांच ग्राम, सीतोपलादि चूर्ण 50 ग्राम मिलाकर 30 खुराक बनायें। एक-एक खुराक को शहद या वासावलेह में मिलाकर लें। सुबह-शाम कण्टकार्यावलेह एक-एक चम्मच गुनगुने पानी से लें। इसके अलावा सोमासव चार-चार चम्मच दो बार गुनगुने पानी में मिलाकर पियें। जोड़ों के दर्द के लिए त्रयोदशांग गुगुल दो गोली सुबह शाम लें। खाने में चिकनाई युक्त भोजन से परहेज करें। मेरी उम्र 35 साल है। इन दिनों घर में लगभग सभी खांसी, जुकाम, बुखार से पीडि़त हैं। कोई कारगर नुस्खा बतायें। - विजय नाथ यादव, सुल्तानपुर वायरल फीवर को आयुर्वेद में वात कफ ज्वर कहते हैं। बरसात के दिनों में इस समस्या से काफी लोग ग्रसित होते हैं। इससे बचाव के लिए त्रिभुवन कीर्ति रस पांच ग्राम, चन्द्रामृत रस पांच ग्राम, सीतोपलादि चूर्ण 50 ग्राम, गोदन्ती भस्म 10 ग्राम लें और इन सभी को मिलाकर 30 खुराक बनायें और सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें। इसके अलावा महासुदर्शन बटी की दो-दो गोली भी दिन में तीन बार गुनगुने पानी से लें। चावल, ठण्डा पानी, खासकर फ्रिज में रखी हुई खाने की चीजों के सेवन से परहेज करें। सर्दी, खांसी और बुखार से बचने के क्या उपाय हैं? - डा. दयाशंकर सिंह, गोसाईगंज, लखनऊ इस मौसम में इन समस्याओं से बचने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए। इसके लिए पांच तुलसी की पत्ती, एक काली मिर्च लगातार लें। साथ ही पानी भी उबालकर पियें। अगर संक्रमण नहीं रुकता है तो नारदीय लक्ष्मी विलास रस और सुदर्शन घन बटी की तीन गोली दिन में तीन बार लें। मेरी माता जी की उम्र 45 वर्ष है। उन्हें पिछले काफी समय से बवासीर की शिकायत है। क्या करें? - शिवेन्द्र सिंह, सोहावल, फैजाबाद बवासीर मर्ज में पंचसकार चूर्ण एक चम्मच, अर्शोघ्नी बटी की एक गोली रात में गुनगुने पानी के साथ लें। इसके अलावा कंकायन बटी की दो गोली सुबह-शाम लें। बादी चीजों के सेवन से बचें। मेरी उम्र 35 वर्ष है। बाजार का खाना, जंक फूड खाने से अक्सर गला रुंध जाता है। इसके लिए क्या करें? - स्मृति बंसल, ऐशबाग, लखनऊ अगर हो सके तो सबसे पहले बाहर की चीजों को खाने से परहेज करें। सभी को पांच तुलती की पत्ती, एक काली मिर्च गुनगुने पानी से चबाकर खायें। जो काली मिर्च न खा पाये वह शहद के साथ भी खा सकता हैं। इसके अलावा बहेड़ा के छिलके को हल्के घी में भूने और उसके टॉफी की तरह चूसें। गले की खराश दूर होगी। दवा में सीतोपलादि 50 ग्राम, नारदीय लक्ष्मी विलास रस पांच ग्राम, शुद्ध टंकण 10 ग्राम लें और तीनों को मिलाकर 30 पुडि़या बनाकर दिन में तीन बार एक-एक खुराक का शहद के साथ सेवन करें, आराम मिलेगा। मेरी माता जी की उम्र 55 वर्ष है। दो साल से पैर फट रहा है। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने फंगस बताया। लगातार दवा भी खिलायी जा रही है लेकिन आज तक कोई फायदा नहीं हुआ। - पंकज यादव, फैजाबाद आपकी माता जी की पैर में फंगस की ही समस्या है। इसमें चोप चिन्यादि चूण आधा चम्मच, पंच निम्बादि चूर्ण आधी चम्मच दिन में तीन बार लें। इसके अलावा खाना खाने के बाद महामजिष्ठाद्यारिष्ट, खदिरारिष्ट दोनों को चार-चार चम्मच बराबर पानी में मिलाकर पियें। पैरों में महामरिच्यादि तेल लगाये। नमक कम करें और तली भुनी चीजों के सेवन से बचें। मेरी उम्र 35 साल है। 15 दिन से शाम को बहुत तेज सिरदर्द होता है और जुकाम भी हो जाता है। इस समस्या का समाधान बतायें। - मनोज तिवारी, गोंडा इस प्रकार के सिरदर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले तुलसी व यूकेलिप्टस की दो-दो पत्तियां डालकर पानी उबालें और उसकी भाप लें। दवा में नारदीय लक्ष्मी विलास रस पांच ग्राम, सीतोपलादि चूर्ण 50 ग्राम, चन्द्रामृत रस पांच ग्राम लेकर सभी को मिलाकर 30 खुराक बनायें और एक-एक खुराक सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें, अवश्य फायदा होगा। मेरी उम्र 60 वर्ष है। हमेशा पेट में खुश्की बनी रहती है। पेट साफ नहीं होता है। बार-बार मल त्यागने जैसा एहसास होता है। चिकित्सकों को दिखाया तो उन्होंने इरिटेबुल बाउल सिण्ड्रोम बताया। नींद भी नहीं आती है। - जेपी धवन, लखीमपुर लगातार पेट खराब रहना अच्छी बात नहीं है। इसके लिए छोटी हरण को हल्की आंच में घी से भून लें। जब वह फूल कर ठण्डी हो जाए तो उसे पीस कर रख लें और आधा चम्मच से एक चम्मच तक एक चुटकी सेंधा नमक के साथ मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें। इसके अलावा सौफ 100 ग्राम (इसमें 50 ग्राम सौफ को भून लें और 50 ग्राम कच्ची रखें और दोनों को मिलायें) ईसबगोल 100 ग्राम, बेलगिरी चूर्ण 100 ग्राम लें। इन सभी को मिलाकर रख लें। फिर एक-एक चम्मच सुबह-शाम ताजे पानी के साथ लें। तीन महीने तक यह नियमित करें। नींद न आने के लिए ब्राह्मी बटी की दो गोली रात में सोते समय सेवन करें। गरिष्ठ भोजन न करें। मेरे भाई की उम्र 20 वर्ष है। उसे पिछले कई दिनों से बुखार है। लगातार दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है। इससे काफी दुबला हो गया है। क्या करें जिससे उसकी तबियत ठीक हो जाए। -रंजीत कुमार गौड़, फैजाबाद लगातार बुखार रहना काफी परेशानी भरा हो सकता है। इससे न सिर्फ वह दुबला हो जाएगा, व्यवहार में चिड़चिड़ापन भी आ जाएगा। इसके लिए त्रिभुवन कीर्ति रस पांच ग्राम, सीतोपलादि चूर्ण 50 ग्राम, गोदन्ती पांच ग्राम, प्रवाल पिष्टी तीन ग्राम लेकर सभी को मिलाये। इन सबकी 30 खुराक बनाकर दिन में तीन बार लें। इसके अलावा सुदर्शन घन बटी की दो-दो गोली दिन में तीन बार लें। तुलसी, अदरक, काली मिर्च और मिसरी का काढ़ा भी इसके साथ दे सकते हैं। काफी फायदा होगा। दही, चावल और ठण्डे पानी से परहेज करें। मेरे पिता की उम्र 62 वर्ष है। मौसम बदलने के साथ परेशानी होने लगती है। काफी समय से अस्थमा की भी समस्या है। थोड़ा सा चलने या सीढि़यां चढ़ने में भी सांस फूल जाती है। बहुमूत्रता की भी समस्या से काफी समय से ग्रसित हैं। कृपया कोई कारगर दवा बतायें। - रजनीश, फैजाबाद शरीर में सभी परेशानियां प्रतिरोधक क्षमता की कमी से आती हैं। अस्थमा और बहुमूत्रता की भी समस्या इसी कारण से होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए आयुर्वेद में काफी अच्छी दवाएं हैं, परहेज भी अधिक करने पड़ते हैं। इसमें सबसे पहले ठण्डा पानी, चावल और दही खाने से बचें। हल्दी 50 ग्राम, मुलैठी 50 ग्राम, काली मिर्च 10ग्राम, पिपली, सोंठ 10-10 ग्राम पीसकर रख लें और आधा से एक चम्मच तक सुबह-शाम दिन में दो बार दें। इसके साथ शिवा गुटिका की दो गोली भी सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ दें। ताजा आंवला हल्का भून लें और अदरक, काली मिर्च, लहसुन के साथ चटनी बनाकर खायें। स्वर्ण बसंत मालिनी की एक-एक गोली और कण्टकार्यावलेह सुबह-शाम एक-एक चम्मच लें। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। सांस की समस्या है। यह समस्या चलने पर बढ़ जाती है। सर्दियों में यह परेशानी काफी बढ़ जाती है। कई चिकित्सकों को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। क्या करें? - सुखराज, श्रावस्ती आपके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से यह समस्या है। इसके लिए आंवला चूर्ण 100 ग्राम, हल्दी चूर्ण 100 ग्राम, मुलैठी चूर्ण 100 ग्राम लेकर सभी को एक साथ पीस लें। इसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लें। ताजा आंवला अदरक, काली मिर्च, लहसुन, मिसरी की चटनी के साथ लें। महालक्ष्मी विलास रस की एक-एक गोली तीन महीने तक लें। इससे आपको काफी फायदा होगा। चावल, दही और खटाई से परहेज करें। मौसमी फल जरूर खायें(दैनिक जागरण,लखनऊ,24.8.2010)।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे! ये तो बड़ा उपयोगी सिरीज़ है। बड़े काम की जानकारी दी है आपने।

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने रोगों की बहुत कारगर आयुर्वेदिक चिकित्सा लिखी है। आभार!

    उत्तर देंहटाएं

एक से अधिक ब्लॉगों के स्वामी कृपया अपनी नई पोस्ट का लिंक छोड़ें।